राज्यसभा में भी बिल पास, विरोध में उतरे किसान

राज्यसभा में भी बिल पास, विरोध में उतरे किसान

संसद के मानसून सत्र के दौरान कृषि विधेयकों को लेकर हुए हंगामे के बीच रविवार को रूलबुक फाड़ते टीएमसी के डेरेक ओ ब्रायन। -प्रेट्र

हरीश लखेड़ा/ ट्रिन्यू

नयी दिल्ली, 20 सितंबर

सड़कों पर किसानों के प्रदर्शन और सदन में विपक्ष के भारी हंगामे के बीच राज्यसभा ने रविवार को कृषि संबंधी 2 बिलों को ध्वनिमत से पारित कर दिया। लोकसभा पहले ही इन्हें मंजूरी दे चुकी है। कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन व सरलीकरण) विधेयक तथा कृषक (सशक्तीकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक को सरकार विपक्ष के अलावा एनडीए की सहयोगी पार्टी अकाली दल के भारी विरोध के बावजूद पारित कराने में सफल रही। इस दौरान विपक्षी दलों के सांसदों ने कोरोना प्रोटोकॉल को नजरंदाज करते हुए वेल में जाकर जमकर हंगामा किया। सदन की बैठक का समय बढ़ाने से नाराज टीएमसी के डेरेक ओ ब्रायन ने तो उपसभापति के आसन पर लगे माइक को तोड़ डाला और रूलबुक भी फाड़ दी। विपक्षी सांसदों ने कृषि बिलों की प्रतियां भी फाड़ दीं। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार के पास बहुमत नहीं होने के बावजूद बिलों को ध्वनिमत से पारित किया गया।

राज्यसभा में इन बिलों पर चर्चा के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने जवाब देते हुए कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य का इस विधेयक से कोई लेना-देना नहीं है। हालांकि, विपक्ष उनके जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के सांसद वेल में पहुंच कर हंगामा करने लगे। वैसे, विपक्षी सदस्य कृषि मंत्री के जवाब के समय से ही हंंगामा करने लगे थे। दरअसल, राज्यसभा की कार्यवाही का समय एक बजे तक निर्धारित है और उपसभापति हरिवंश ने बिल पारित होने तक सदन का समय बढ़ा दिया। इसके विरोध में विपक्ष के सांसदों ने हंगामा शुरू कर दिया। इस हंगामे पर सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई। बाद में बिलों को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।

उपसभापति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का ऐलान

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद अहमद पटेल ने कहा कि उपसभापति हरिवंश के रवैये ने लोकतांत्रिक परंपराओं और प्रक्रियाओं को नुकसान पहुंचाया है। हमने उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला किया है।

‘एमएसपी की जिम्मेदारी कौन लेगा’

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट किया, ‘राज्यसभा में आज जिस तरह कृषि विधेयक के रूप में सरकार ने किसानों के खिलाफ मौत का फरमान निकाला, उससे लोकतंत्र शर्मिंदा है।’ कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ‘15.5 करोड़ किसान एमएसपी हासिल कैसे करेंगे? सरकार एमएसपी को कानूनी जिम्मेदारी देने से क्यों भाग रही है। मंडी के बाहर एमएसपी की जिम्मेदारी कौन लेगा।’

अब सशक्त बनेंगे किसान : मोदी

विधेयक पारित होने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह देश के कृषि इतिहास के लिए ऐतिहासिक क्षण है। इससे कृषि क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन आएगा और करोड़ों किसान सशक्त बनेंगे। प्रधानमंत्री ने दोहराया कि एमएसपी की व्यवस्था जारी रहेगी। मोदी ने कई ट्वीट कर कहा कि ये विधेयक कृषि क्षेत्र में पूर्ण बदलाव सुनिश्चित करेंगे और करोड़ों किसानों को सशक्त बनाएंगे। उन्होंने कहा कि दशकों तक बिचौलियों की ओर से किसानों को विवश रखा गया और तंग किया जाता रहा। ये विधेयक उन्हें मुक्ति दिलाएंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन बिलों के पास होने से किसानों की पहुंच भविष्य की टेक्नोलॉजी तक आसान होगी। इससे न केवल उपज बढ़ेगी, बल्कि बेहतर परिणाम सामने आएंगे।

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