पेपरलेस विधानसभा

हाईटेक होने से हरियाणा के विकास को गति

पेपरलेस विधानसभा

यह बदलते वक्त की मांग है कि जनप्रतिनिधि संस्थाएं हाईटेक हों। देश में कई राज्य पेपरलेस विधान सभा की ओर बढ़ चुके हैं, इसी कड़ी में अब हरियाणा भी जुड़ने जा रहा है। यहां ई-विधानसभा की तैयारियां अंतिम चरण में हैं और इससे जुड़े प्रशिक्षण विधायकों व अधिकारियों को दिये जा चुके हैं। साथ ही विधानसभा में सभी जरूरी डिवाइसेज भी स्थापित किये जा चुके हैं। दरअसल, इस दिशा में प्रयास गत वर्ष फरवरी में शुरू हुए थे और इसे अंतिम रूप देने में करीब सत्रह माह का समय लगा। अब सदन का पेपरलेस सत्र आठ अगस्त को शुरू होगा। निस्संदेह, अमृत महोत्सव के दौर में यह हरियाणा में लोकतंत्र की नई उपलब्धि होगी। इस परियोजना का शुभारंभ मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर करेंगे और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला व केंद्रीय संसदीय मंत्री प्रहलाद जोशी कार्यक्रम से ऑनलाइन जुड़ेंगे। उल्लेखनीय है कि नेशनल ई-विधान एप्लिकेशन हरियाणा के डाटा के साथ अपडेट कर दी गई। साथ ही केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्रालय की टीम ने यहां विधायक व अधिकारियों को प्रशिक्षण भी दिया है। यह परियोजना पहले ही सिरे चढ़ जाती मगर कोविड संकट के चलते इसमें कुछ विलंब हुआ। इसके बावजूद विधानसभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता व अधिकारी परियोजना को सिरे चढ़ाने के लिये लगातार प्रयासरत रहे। इस योजना को मूर्त रूप देने के लिये करीब साढ़े आठ करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया था। विधानसभा के डिजीटलाइजेशन हेतु गत वर्ष पच्चीस फरवरी को त्रिपक्षीय एमओयू साइन किया गया था। समय-समय पर नेशनल ई-विधानसभा एप्लिकेशन से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। सुखद यह है कि इस परियोजना से हरियाणा विधानसभा को 5.6 करोड़ रुपये की बचत होगी। निस्संदेह, पेपरलेस विधानसभा बनने से कागज की बचत होने से पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिलेगा जो ग्लोबल वार्मिंग संकट के दौर में एक रचनात्मक पहल होगी। जिससे आम आदमी को भी पर्यावरण संरक्षण के लिये प्रेरित किया जा सकता है। निस्संदेह हमारे जनप्रतिनिधि लाखों लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं, वे इस पहल से अपने क्षेत्र के लोगों को पर्यावरण संरक्षण में रचनात्मक भूमिका के लिये प्रेरित कर सकते हैं।

वाकई पेपरलेस विधानसभा से आर्थिक बचत,पर्यावरण चेतना के साथ ही पारदर्शिता को भी बढ़ावा मिलेगा। जनप्रतिनिधियों के सामने एक क्लिक में अपने क्षेत्र व राज्य का सारा डाटा उपलब्ध हो जायेगा। साथ ही डिजीटलाइजेशन के उपरांत विधानसभा सचिवालय में सदन की कार्यवाही में लगने वाले कागज की बचत होगी। सदन की कार्यवाही के दौरान कार्यसूची बनाने, नोटिस व बुलेटिन जारी करने, सदन में पूछे जाने वाले सवाल व उनके जवाब, सदन के पटल में रखे जाने वाले दस्तावेजों तथा अनेक समितियों की रिपोर्टों को तैयार करने में जहां लंबा वक्त लगता था, वहीं सदन पर आर्थिक बोझ भी बढ़ता था। अब बिना कागज के उपयोग के तुरत-फुरत काम होगा। हमारे माननीय भी हाईटेक बनेंगे और उनकी कार्यशैली को गति मिलेगी। विधायक उपयोगी जानकारी तथा विभिन्न नियमावलियों को एक क्लिक के जरिये हासिल कर सकेंगे। जब वे अपनी बात सदन में रखेंगे तो उनके सामने सभी तथ्य मौजूद होंगे। साथ ही आम लोगों को डिजीटल प्रक्रिया के जरिये सहज ही सूचनाएं मिल सकेंगी। निस्संदेह इस प्रकिया से जहां विधानसभा की कार्यवाही को गति मिलेगी, वहीं पारदर्शिता को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिजिटल भारत मुहिम को भी इस प्रयास से व्यापक गति मिलेगी। दरअसल, इसी महत्वाकांक्षी मुहिम के तहत ही देश की संसद व विधानसभाओं तथा विधान परिषदों का डिजीटलीकरण करके उन्हें कागज मुक्त करने का प्रयास किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि सारे देश में करीब उन्नीस राज्य व केंद्र शासित प्रदेश इस परियोजना के तहत एमओयू पर हस्ताक्षर कर चुके हैं। हरियाणा इस परियोजना के तीसरे चरण में पहुंच चुका है। अच्छी बात यह है कि विधानसभा के हाईटेक होने से विधायकों व जनता के बीच भी संवाद व संपर्क को गति मिलेगी। साथ ही सदन में विधायी कामकाज में भी पारदर्शिता व तेजी आएगी। अब जनता भी अपने इलाके के कामों की जानकारी ऑनलाइन आसानी से प्राप्त कर सकेगी।

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