एकदा

विलक्षण प्रतिभा

विलक्षण प्रतिभा

यूनान के महान दार्शनिक प्लेटो का जन्म एथेंस में 427 ई. पू. में एक प्रसिद्ध तथा अमीर घराने में हुआ था। बीस वर्ष की आयु में वे महान दार्शनिक सुकरात के संपर्क में आए और सुकरात की विलक्षण प्रतिभा से प्रभावित होकर उन्होंने अपने व्यक्तित्व को सुकरात के व्यक्तित्व में लीन कर दिया। इसलिए प्लेटो सुकरात के सबसे प्रिय शिष्य थे। एक दिन प्लेटो एथेंस नगर में हो रही एक सभा में पीछे की पंक्ति में आकर चुपके से बैठ गये। सभा के आयोजकों ने उन्हें देख लिया और उनसे मंच पर चलने का आग्रह करने लगे। इस पर प्लेटो ने कहा मुझे मंच पर जाने की आवश्यकता नहीं है। मैं जिधर बैठ जाता हूं, लोगों के मुंह स्वत: ही उधर मुड़ जाया करते हैं।

प्रस्तुति : मनीषा देवी 

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