त्याग के रिश्तों की बेमिसाल रोहिणी : The Dainik Tribune

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त्याग के रिश्तों की बेमिसाल रोहिणी

त्याग के रिश्तों की बेमिसाल रोहिणी

अरुण नैथानी

सामाजिक परंपराओं के चलते सदियों से पुत्रमोह में आकंठ डूबे भारतीय समाज में बेटियों के त्याग व समर्पण की अनगिनत मिसालें प्रेरणादायी रही हैं। यह बहस का विषय हो सकता है कि पीर-पैगंबरों और देवी-देवताओं से लाख मन्नतें मांग हासिल बेटे मां-बाप के आत्मीय अहसासों से कितने जुड़ पाते हैं। मगर एक बात तो तय है कि कन्यादान कर दी गई बेटियां विवाह के बाद भी गर्भनाल की तरह मां-बाप से गहरे तक जुड़ी रहती हैं। उनके सुख-दुख में हमेशा खड़ी नजर आती हैं। एक ओर ससुराल के प्रति समर्पण, पति व बच्चों के प्रति दायित्वों के निर्वहन के बावजूद उसके दिल के एक कोने में मां-बाप के लिये जगह दर्ज रहती है। वह भी तब जब हमारे समाज में खून के रिश्ते संक्रमण के दौर से गुजर रहे हैं। गाहे-बगाहे ऐसे तमाम उदाहरण हमारे सामने आते हैं जिसमें बेटियां उम्रदराज मां-बाप का सहारा बनकर बेटी होने का फर्ज निभाती हैं। मां-बाप के आंगन में जन्मी और पति के आंगन में महकती बेटियां दिल से मां-बाप से कभी अलग नहीं होतीं। वे हमेशा मां-बाप के जिगर का टुकड़ा बनी रही हैं। ऐसा ही हालिया उदाहरण रोहिणी आचार्य का है, पिता के लिये जिसके समर्पण व त्याग की देश में मुक्तकंठ से प्रशंसा की जा रही है।

रोहिणी आचार्य का पहला परिचय तो यह है कि वे देश के मशहूर राजनीतिक परिवार की बेटी हैं। लेकिन उसने आत्मीयता व त्याग के साहसिक फैसले से अपनी अलग पहचान बना ली है। सिंगापुर में एक आम परिवार के रूप में जीवन-बसर करने वाली रोहिणी दरअसल, बिहार में राजनीतिक वर्चस्व व वाद-विवाद के कारण सदा सुर्खियों में रहने वाले लालू यादव की दूसरे नंबर की बेटी हैं। हाल ही में कई रोगों से जूझ रहे लालू यादव को अपनी किडनी देने के कारण रोहिणी सुर्खियों में हैं। दरअसल, काफी समय से बीमार चल रहे लालू यादव को मधुमेह व उच्च रक्तचाप जैसी कई बीमारियों ने घेर लिया था। मधुमेह के घातक प्रभाव उनके शरीर के अंगों पर नजर आये, जिसके चलते डॉक्टरों ने उन्हें गुर्दा प्रत्यारोपण की सलाह दी थी। ऐसे मामलों में बेहतर होता है कि कोई परिवार का सदस्य ही अपनी किडनी दे। लालू यादव परिवार में जब किडनी देने वाले सदस्य की तलाश हुई तो रोहिणी सबसे ज्यादा उपयुक्त पायी गई। रोहिणी ने तब कहा कि किडनी तो सिर्फ मांस का एक टुकड़ा भर है, मैं तो पिता के लिये सर्वस्व अर्पित कर सकती हूं। उन्होंने सोशल मीडिया के लिये लिखा भी कि मां-बाप तो हर बच्चे के लिये धरती पर भगवान जैसे होते हैं। हर बच्चे का धर्म है कि वह मां-बाप की पूजा व सेवा करे। फिलहाल, लालू यादव व रोहिणी आचार्य सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ हॉस्पिटल में हैं और दोनों डॉक्टरों की देखभाल में हैं।

दरअसल, रोहिणी आचार्य लालू यादव की दूसरी संतान हैं। उनसे बड़ी बहन मीसा भारती हैं। मीसा भारती फिलहाल राज्यसभा सांसद हैं। रोहिणी के बाद चार और बहनें हैं और फिर तेजप्रताप व तेजस्वी यादव का जन्म हुआ। दोनों बेटों के बाद परिवार में एक और बेटी आई थी। रोहिणी का जन्म 1 जून, 1979 में पटना में हुआ था। रोहिणी के नाम के साथ कालेज की पढ़ाई के दौरान आचार्य उपनाम जुड़ गया। प्रारंभिक पढ़ाई पूरी करने के बाद रोहिणी ने चिकित्सा के क्षेत्र में करिअर बनाने का संकल्प लिया। कालांतर में रोहिणी ने एमजीएम मेडिकल कालेज, जमशेदपुर से एमबीबीएस किया। पढ़ाई के दौरान शादी हो जाने के कारण रोहिणी को डॉक्टरी की प्रैक्टिस करने का मौका नहीं मिला। उनका विवाह सिंगापुर में आईटी पेशेवर समरेश सिंह यादव से हुआ। समरेश का परिवार मूलत: औरंगाबाद का रहने वाला है। वे इस क्षेत्र के प्रतिष्ठित यादव परिवार से संबंध रखते हैं। परिवार के कई लोग उच्च सरकारी पदों पर रहे हैं। विवाह के बाद वह पति के साथ सिंगापुर में रहने लगीं। उनके दो पुत्र व एक बेटी है। दरअसल, रोहिणी के ससुर रणविजय सिंह राजस्व सेवा के अधिकारी थे और लालू यादव के कालेज के सहपाठी थे। दोनों परिवारों की सहमति से रोहिणी का विवाह हुआ।

बहरहाल, पिता लालू यादव को किडनी देने पर रोहिणी को पूरे देश में सकारात्मक प्रतिसाद मिला। यहां तक कि लालू यादव के घोर राजनीतिक विरोधियों ने भी उनके निर्णय की भूरि-भूरि प्रशंसा की। बिहार के बेगूसराय सांसद तथा केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी रोहिणी के फैसले की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। जाने-माने टीवी पत्रकार रवीश कुमार लिखते हैं कि सोशल मीडिया पर रोहिणी के स्नेह की अभिव्यक्ति बाप-बेटी के रिश्ते को गरिमा देती है। निस्संदेह, रोहिणी का पिता को किडनी देने का फैसला न केवल विशिष्ट मानवीय पहलू है बल्कि साहस से भरा भी है। समाज के विभिन्न वर्गों के लोग इस फैसले को पिता के प्रति समर्पण की अनूठी मिसाल बता रहे हैं। निस्संदेह, आज जब रक्त के रिश्ते दरक रहे हैं, रोहिणी ने पारिवारिक मूल्यों की प्रेरक मिसाल दी है।

ऐसा भी नहीं है कि प्रेम-समर्पण का यह रिश्ता एकतरफा है। लालू यादव भी अपनी बेटी से उतना ही प्रेम करते हैं। सिंगापुर में किडनी प्रत्यारोपण के बाद जब लालू यादव को होश आया तो उनका पहला प्रश्न यही था कि रोहिणी कैसी है? कहीं न कहीं यह उनकी अपनी किडनी देने वाली बेटी की फिक्र को दर्शाता था। रोहिणी ने भी आपरेशन से पहले पिता की गोद में बैठी हुई की अपनी फोटो सोशल मीडिया पर अपलोड की। यह बताने को कि वह बचपन से पापा की लाडली रही है।

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