उलटवांसी

बिन इश्तिहार मैदान में हैं धारदार

बिन इश्तिहार मैदान में हैं धारदार

आलोक पुराणिक

आलोक पुराणिक

आईपीएल 2021 को धोनी की टीम चेन्नई सुपर किंग्स ने जीत लिया। धोनी किक्रेट के हिसाब से बुजुर्ग हो चुके हैं, चालीस के करीब के धोनी, कई इश्तिहारों से भी रिटायर हो चुके हैं। पर क्रिकेट से रिटायर न हुए, यह साफ हुआ। आईपीएल के फाइनल में जीतकर धोनी ने साबित किया कि उम्र सिर्फ एक नंबर है, जज्बा हो तो खेला जा सकता है। अमिताभ बच्चन तो रोज ही साबित करते हैं कि उम्र सिर्फ नंबर है, जज्बा हो तो कुछ भी बेचा सकता है। हालांकि हाल में उन्होंने पान-मसाला बेचने से इनकार कर दिया है। अलबत्ता वाशिंग पाउडर और नमकीन भुजिया से लेकर स्कूटी व ब्यूटी क्रीम वह बेचते रहेंगे। पान-मसाले से फिल्म स्टारों को परहेज करना चाहिए। एक स्टार पिताश्री पान-मसाला बेचते रह गये, पुत्र पर आरोप लग गया कि वह ड्रग्स चरस-गांजा बेच रहा है। बेटे बाप से आगे जायें, पर इस तरह से आगे न जायें। आगे जाना ठीक है, पर पान-मसाले के आगे चरस-गांजा बेचकर आगे जाना तो खतरनाक है।

खैर, कुल मिलाकर मसला यह है कि बहुत आइटम के इश्तिहार करने वाले विराट कोहली की टीम आईपीएल फाइनल तक ही पहुंच न पायी और कोहली के मुकाबले कम इश्तिहार करने वाले धोनी की टीम आईपीएल फाइनल में पहुंची भी और उसे जीता भी। क्यों, इसकी एक वजह तो यह है कि बंदा कम इश्तिहारों में काम करेगा, तो खाली रहेगा। खाली रहेगा, तो खेल पर ध्यान देगा। वरना तो यूं होगा कि अभी शैंपू की शूटिंग से निकले, तो नमकीन-भुजिया की शूटिंग कर लो, फिर पंखा बेच आओ। सिर्फ खेलने पर ध्यान लगायेगा बंदा तो सुबह से शाम तक सिर्फ खेलेगा, सिर्फ खेलेगा, तो जाहिर है परफारमेंस सुधरेगी। इस कहानी से तो हमें यह शिक्षा मिलती है। कोहली साहब को सीख लेनी चाहिए कि बुजुर्गों से आगे निकलें, तो यूं निकलें कि सिर्फ इश्तिहारों में आगे न निकलें, बल्कि आईपीएल फाइनल जीतकर आगे निकलें। धोनी से हमें सबको यही सीख लेनी चाहिए कि अपने मूल काम पर ध्यान लगाओ।

इस मामले में संगीतकारों का मामला ठीक है। सरोद के विख्यात उस्ताद अमजद अली अब रिटायरमेंट के बाद इलायची की आड़ में पान-मसाला बेचते हैं। चलो बात समझ में आती है। रिटायर हो लिये हैं, अब इलायची वगैरह बेच रहे हैं। मन लगा रहता है। घरवाले भी खुश रहते होंगे कि चलो बुजुर्गवार सही टाइम पास कर रहे हैं, अपने में बिजी रहते हैं। अमजद अली साहब जब अपने करिअर के शीर्ष पर थे, तब वो इलायची की आड़ में पान-मसाला बेचते न दिखे। शायद नौजवानी में संगीत बिना पान-मसाले के ही जोरदार बजा लेता है बंदा। फिर उम्र बढ़ने पर संगीत को पान-मसाले की जरूरत पड़ सकती है। संभव है।

कोहली धोनी से सबक लें और अपने कुछ इश्तिहार धोनी को ट्रांसफर कर दें।

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