डीआरडीओ का रक्षा कवच

मुकाबले को आक्रामक सांचे में ढलती सेना

मुकाबले को आक्रामक सांचे में ढलती सेना

एल. एस. यादव

एल. एस. यादव

चीन की सीमा पर उसके साथ पिछले वर्ष जो तनाव शुरू हुआ था, वह अभी तक समाप्त नहीं हुआ है। गलवान घाटी में चीनी सैनिकों को माकूल जवाब देकर भारतीय सैनिकों ने अपनी ताकत का परिचय दे दिया है। चीन ने अरुणाचल प्रदेश, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश व उत्तराखण्ड से सटी सीमा तक अपनी सैन्य तैयारी बढ़ा रखी है। चुनौती से मुकाबले को सेना के जवानों को मजबूत किया जा रहा है।

सीमा की रक्षा करने वाले जवानों को बुलेटप्रूफ जैकेट एवं माइनस डिग्री के तापमान से निपटने के लिए वर्दी जैसी मूलभूत रक्षा जरूरतों से सुसज्जित कर दिया गया है। पूर्वी लद्दाख में खून जमा देने वाली ठंड में सेना के 50000 हजार जवान तैनात हैं। इनकी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए डीआरडीओ ने कई ऐसी जरूरी चीजें विकसित की हैं जो सैनिकों को काफी सहूलियतें प्रदान कर रही हैं। देश के पूर्वी लद्दाख, सियाचिन और कश्मीर जैसे बर्फीले व ऊंचाई वाले इलाकों में सीमा पर ठंड से जूझने वाले सेना के जवानों के लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने विशेष तोहफा दिया है। इनमें वातावरण को गर्म करने वाला हिम तापक और बर्फ पिघलाने वाला डिवाइस भी है। जिसके जरिए सेना का बंकर माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तापमान में गर्म रहेगा। इस डिवाइस को डीआरडीओ की शाखा डिफेंस इंस्टीट्यूट फार फिजियोलाॅजी एंड एलाइड साइंसेज ने तैयार किया है।

यह डिवाइस सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रिसिटी और केरोसिन तीनों से चल सकती है। इससे 20 वर्ग मीटर के एरिया वाला बंकर या टेंट गर्म रखा जा सकता है। चार्जर कंट्रोलर वोल्टेज को कंट्रोल करने के साथ-साथ पंखे को भी चलाता है। यही पंखा टेंट या बंकर में गर्म हवा फैलाता है। इस डिवाइस से नीले रंग की रोशनी फैलती है जो आक्सीजन लेवल को कम नहीं होने देती। इसीलिए यह डिवाइस किसी तरह के ब्लास्ट के दौरान निकलने वाली जहरीली गैस कार्बन डाईआक्साइड से भी सैनिकों काे बचाएगी। सेना ने इस डिवाइस को खरीदने के लिए 420 करोड़ रुपये का आर्डर भी डीआरडीओ को दे दिया है। इसी संस्था ने एक एलोक्रीम भी तैयार की है जो भीषण ठंड से त्वचा को होने वाले नुकसान से बचाती है। इस संस्था ने फ्लेक्सिबिल बोतल और सोलर स्नो मेल्टर भी तैयार किया है। ये दोनों चीजें जवानों को अत्यन्त ऊंचाई वाले इलाकों में पीने का पानी मुहैया कराती हैं।

लद्दाख क्षेत्र में सीमा पर टैंक व सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस की तैनाती कर दी गई है। सेना की आपूर्ति व्यवस्था में कोई परेशानी न आए, इसके लिए सीमा पर बिछाए सड़कों के जाल ने स्थिति को बेहतर बना दिया है। इस वर्ष कई हथियार परीक्षण के बाद सेना को सौंप दिये जाएंगे। चीन के साथ सीमा पर जारी तनाव के बीच सैन्य ताकत बढ़ाने के उद्देश्य से सेना को दस दिन से बढ़ाकर अब 15 दिनों के गहन युद्ध हेतु हथियार-गोला बारूद एकत्र रखने की छूट मिली है।

सेना की वित्तीय शक्तियों काे भी बढ़ाया जा चुका है। सितम्बर 2020 में निर्णय लिया गया है कि आपातकालीन खरीद की शक्तियों का इस्तेमाल करके सेना के लिए तकरीबन 50000 करोड़ रुपये के नये हथियार खरीदे जाएं। डीआरडीओ की नयी मशीनगन परीक्षण में सफल हो चुकी है। यह गन एक मिनट में 700 राउंड फायर करती है। सेना हथियार और मिसाइल सिस्टम की खरीद कर रही है, जिससे हालात बिगड़ने पर चीन व पाक के मोर्चों पर असरदार कार्रवाई की जा सके।

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