एकदा

स्नेह का पुरस्कार

स्नेह का पुरस्कार

गणित के अध्यापक को परीक्षा लेनी थी। लेकिन सवाल हल नहीं हो पाने के कारण छात्र डरे हुए थे। आखिर में एक विद्यार्थी उठा और अध्यापक को अपनी उत्तर पुस्तिका दिखाई। उत्तर सही थे। अध्यापक ने उसकी पीठ थपथपाई और पुरस्कार देकर सम्मानित किया। अगले दिन जैसे ही अध्यापक कक्षा में आए पुरस्कार विजेता विद्यार्थी उनके पैरों से लिपट गया और फूट-फूट कर रोने लगा। अध्यापक ने पूछा- ‘तुम क्यों रो रहे हो। तुमने तो पुरस्कार जीत कर अच्छे विद्यार्थी होने का परिचय दिया है।’ विद्यार्थी ने कहा- ‘आपके द्वारा दिए गए पुरस्कार का मैं अधिकारी नहीं हूं। मैंने किताब से नकल करके सवालों को हल किया था। मुझे क्षमा कर दें।’ अध्यापक ने कहा- ‘तुम्हें सवालों का सही हल नहीं आता। लेकिन तुम्हें किसी को धोखा देना भी नहीं आता। तुमने आत्मा की आवाज सुनकर अपनी गलती स्वीकार कर ली। अपनी गलती मान लेने वाले बड़े होकर बड़ा काम और ऊंचा नाम करते हैं।’ अध्यापक के स्नेह का पुरस्कार पाने वाले वे व्यक्ति गोपाल कृष्ण गोखले थे।
प्रस्तुति : अरुण कुमार कैहरबा

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