'कुर्सी' की सवारी, तलवार से बदली किस्मत की रेखा : The Dainik Tribune

दिव्यांग नहीं, शक्ति स्वरूपा...

'कुर्सी' की सवारी, तलवार से बदली किस्मत की रेखा

कॉमनवेल्थ फैंसिंग में कांसे समेत जीत चुकी हैं 25 पदक

'कुर्सी' की सवारी, तलवार से बदली किस्मत की रेखा

जुनून और मेहनत जरूरी दिव्यांग लड़कियों को रेखा संदेश देती हैं कि दिव्यांगता को अभिशाप न बनने दें, बल्कि अपनी जिदंगी की कामयाबी के लिए एक जुनून पैदा कर कठिन परिश्रम से उसे हासिल करें।

वरात्र चल रहे हैं। इस दौरान नौ देवियों की आराधना होगी। हमारे-आपके बीच भी ऐसी अनेक देवियां हैं जो समाज को प्रेरणा दे सकती हैं। इन्होंने साबित किया है कि इरादे नेक और मजबूत हों तो शारीरिक दिव्यांगता लक्ष्य में रुकावट नहीं बन सकती। आइये, महिला शक्ति को समर्पित नवरात्र पर ‘दैनिक ट्रिब्यून’ की विशेष शृंखला के अंतर्गत ऐसी कर्मठ युवतियों की उपलब्धियों के बारे में जानें ताकि इन्हें हम कह सकें, 'दिव्यांग नहीं, ये हैं शक्ति स्वरूपा।' - संपादक

देशपाल सौरोत/ हप्र

पलवल, 29 सितंबर

कहते हैं कि अगर हिम्मत और जज्बा हो तो कोई कार्य मुश्किल नहीं है। इसे साबित कर दिखाया है पलवल के गांव खूजरका के एक मजदूर के घर जन्मी दिव्यांग बेटी रेखा तंवर ने। लंदन में आयोजित कॉमनवेल्थ फैंसिंग चैंपियनशिप (व्हीलचेयर तलवारबाजी) में कांस्य पदक विजेता रेखा तंवर आज पलवल ही नहीं, बल्कि हरियाणा में दिव्यांग बच्चों के लिए एक आदर्श बनकर उभरी हैं। बिना किसी सरकारी मदद के उन्होंने राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर 25 पदक जीतकर पलवल जिले का नाम देश में रोशन किया है। अब उनका लक्ष्य एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने का है, जिसके लिए वह दिन-रात प्रैक्टिस में जुटी हैं।

खजूरका निवासी लखनपाल और द्रौपदी देवी के घर जन्मी रेखा को बचपन में हुए पोलियाे ने एक पैर से 70 प्रतिशत दिव्यांग बना दिया। लेकिन, उन्होंने कभी अपनी दिव्यांगता को अभिशाप नहीं माना। बीए-जेबीटी तक शिक्षा प्राप्त कर चुकीं रेखा अपनी कामयाबी का सबसे ज्यादा श्रेय अपने कोच राजीव व सतबीर देशवाल को देती हैं।

उन्होंने कहा कि राजीव सर की प्रेरणा व तकनीक ने उन्हें आगे बढ़ने में मदद की है। रेखा कहती हैं कि यदि सरकारी मदद सही समय पर मिले तो ग्रामीण अंचल में ऐसी कई प्रतिभाएं छिपी हैं, जो देश के लिए बहुत कुछ कर सकती हैं।

पंचमम‍् स्कंदमाता

नवरात्र के पांचवें दिन दुर्गा मां के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। भगवान जी बालरूप में इनकी गोद में विराजते हैं। मां स्कंदमाता की आराधना में यह श्लोक पढ़ते हैं :

‘सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरंद्वया।

शुभदास्तु सदा देवी स्कंदमाता यशस्विनी।’

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