बंद आंखें और भविष्य के सवाल

तिरछी नज़र

बंद आंखें और भविष्य के सवाल

शमीम शर्मा

शमीम शर्मा

जो इश्क को जान लेता है फिर कई बार वही इश्क उसकी जान ले लेता है। एक दिन मेरे आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा जब एक लड़की ने मेरे पास आकर सुबकते हुये कहा कि उसे अपने मां-बाप से खतरा है। सत्रह साल की उस लड़की को अपने पिता की नसीहत, प्रेम और प्रार्थनाएं तीखी कील के समान चुभनशील लग रही थीं जो अपने गांव के एक बेराेजगार युवक के प्यार में अन्धी होकर आंख बन्द किये भागने को उतावली थी। करिअर, पढ़ाई, भविष्य आदि सवाल न तो उसने खुद से किये और न अपने प्रेमी से। ऐसी हालत में प्यार का सरूर उतरते ही जिंदगी सवालों की झड़ी लगा देती है। उन्माद में घर से भागे हुए प्रेमी युगल जब कुछ दिन पुलिस के संरक्षण में जीते हैं तो सारी हेकड़ी निकल जाती है। प्रेम में अन्धे होने की घड़ी में जो सवाल उन्होंने खुद से नहीं पूछे थे, अब पुलिस पूछ रही थी। प्रेम की चांदनी छंटने पर जिस अन्धकार से सामना करना पड़ा, जिन स्थितियों से पाला पड़ा, उन्होंने नाकों चने चबवा दिये और जीवन को कभी न सुलझ सकने वाली पहेली बना दिया। इसीलिये एक ताज़ा मुहावरा है कि प्यार और परांठा ताज़ा-ताज़ा ही अच्छा लगता है। किसी दीवाने ने लिखा है- खुदी को कर बुलन्द इतना कि हिमालय की चोटी पर पहुंचते ही खुदा बंदे से खुद पूछे- अबे ओ! अब नीचे कैसे उतरेगा?

ढाई अक्षर का प्रेम यदि उल्टा पड़ जाये तो डेढ़ टांग पर भी चलवा देता है। सारी उम्र की यह लंगड़ाहट व्यक्ति को कहीं का नहीं रहने देती। आजकल स्कूल-कॉलेज के छोटी उम्र के नवयुवक-युवतियां अन्धाधुन्ध प्रेम में जिस तरह भागादौड़ी कर रहे हैं, फिर घर के रहते हैं न घाट के। हर नसीहत उनके ऊपर से गुज़र जाती है जबकि प्रेम के मायने उन्हें पता ही नहीं होते। जिसे वे पूर्ण समर्पण समझ रहे होते हैं वह तो अल्पावधि में ही अहंकार और यथार्थ की भेंट चढ़ जाता है। ये वो प्यार होता है जो पल में ब्लॉक और पल में अनब्लॉक कर दिया जाता है। एक मनचले का सवाल है कि जो लोग यह कहते हैं कि प्यार में न भूख लगती है न प्यास तो ये प्रेमी लोग रेस्टोरेंट में क्या दो हजार के छुट्टे करवाने जाते हैं?

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एक बर की बात है अक रामप्यारी मचलते होये अपने ढब्बी नत्थू तै बूझण लाग्गी—हां रै! तैं मेरे ताहीं प्यार करै है अक ना? नत्थू भी उसकी ओर लखा कै बोल्या—और नी तो के, खूब करूं हूं। रामप्यारी बोल्ली—पर तू मेरी परवाह तो कोनीं करता। नत्थू का जवाब था—प्यार करणिये किसी की परवाह नहीं करया करते।

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