एकदा

सच्चा धर्म

सच्चा धर्म

एक बहुत बड़े पहुंचे हुए दरवेश थे। वे एक राज्य में मौलाना से मिले। नमाज़ का वक्त हुआ तो उन्हें हाथ-मुंह धोने के लिए पानी की जरूरत थी। नजदीक ही महिलाएं घड़े लेकर जाती हुई दिखाई दीं। वे दोनों भी वहां पहुंच गए। लेकिन वहां का दृश्य देखकर उन्हें हैरानी हुई। प्यास से तड़प रहे लोग पानी मांग रहे हैं और पहरेदार किसी को पानी लेने नहीं दे रहा था। दरवेश ने पानी लेने की अनुमति मांगी तो पहरेदार ने उन्हें भी मना कर दिया। दरवेश ने कहा, ‘राजा ने कहा था कि आपको हमारे राज्य में कोई दिक्कत नहीं आएगी। यदि मैं यहां से पानी नहीं मिलने के बारे में राजा को बताऊंगा तो क्या होगा?’ पहरेदार ने उनसे माफी मांगी और पानी देने को सहर्ष राजी हो गया। लेकिन दरवेश हाथ-मुंह धोना और नमाज भूल कर प्यासे लोगों को पानी देने में जुट गए। नमाज का समय निकल गया। मौलाना ने जब नमाज का वक्त गुजर जाने की बात कही तो दरवेश ने कहा कि मेरे खुदा का यही हुक्म था। सूफी चिश्तिया परंपरा के विश्व विख्यात संत शेख निजामुद्दीन औलिया इनसान की खिदमत को नमाज और रोज़े से भी बड़ा धर्म समझते थे। धर्म के जटिल सार को आसान ढंग से समझाने के लिए उन्होंने यह कहानी अपने साथियों को सुनाई थी।

प्रस्तुति : अरुण कुमार कैहरबा

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