कविताएं

कविता में होना

कविता में होना

कविता में होना

पहाड़ जैसा

देखने के लिए/हर किसी को

गर्दन टेढ़ी करने की ज़रूरत होता है।

कविता में होना

नदी सरीखा

देखने के लिए/हर किसी को

नज़र के साथ-साथ

चलने की ज़रूरत होता है।

कविता में होना

तूफान की तरह

समझने के लिए/हर किसी को

धर-पकड़ की ज़रूरत होता है।

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