साहित्य समाज की जीवन रेखा : डीएस हुड्डा : The Dainik Tribune

साहित्य समाज की जीवन रेखा : डीएस हुड्डा

एमडीयू में हरियाणा लिटरेरी फेस्टिवल शुरू

साहित्य समाज की जीवन रेखा : डीएस हुड्डा

रोहतक एमडीयू में बृहस्पतिवार को हरियाणा लिटरेरी फेस्टिवल की शुरुआत करते सेवानिवृत ले.ज. डीएस हुड्डा। -हप्र

रोहतक, 24 नवंबर (हप्र)

हरियाणा की समृद्ध संस्कृति, इतिहास और विरासत तथा राष्ट्र निर्माण में प्रदेश के योगदान को मुखरित करते हुए महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में बृहस्पतिवार को हरियाणा लिटरेरी फेस्टिवल-2022 शुरू हुआ। एमडीयू कुलपति प्रो. राजबीर सिंह तथा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सैन्य अधिकारी सेवानिवृत ले.ज. दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने तीन दिवसीय साहित्यिक-सांस्कृतिक-बौद्धिक महोत्सव का उद्घाटन किया। एमडीयू के हरियाणा अध्ययन केंद्र, छात्र कल्याण कार्यालय तथा राजकीय स्नातकोत्तर नेहरू कालेज, झज्जर की एलुमनाई एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में इस तीन दिवसीय हरियाणा लिटरेरी फेस्टीवल का आयोजन किया जा रहा है।

समारोह के उद्घाटन सत्र के मुख्यातिथि भारतीय थल सेना के सेवानिवृत ले.ज. डीएस हुड्डा ने कहा कि भारत के इतिहास में सैन्य संस्कृति के अलावा भी हरियाणा का विशेष योगदान है। हरियाणवी पहचान की विशिष्टता के संरक्षण के साथ-साथ हमें राष्ट्रीय पहचान को सुदृढ़ करना होगा। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक विरासत, साहित्य और संस्कृति किसी भी समाज की जीवन रेखा है।

प्रो. राजबीर सिंह ने कहा कि हरियाणा वेद तथा भगवत गीता के उपदेश की पवित्र धरती है। इस प्रदेश की माटी ने कवि, शायर, लेखक, संगीतज्ञ दिए हैं। कार्यक्रम के प्रारंभ में हरियाणा लिटरेरी फेस्टिवल के संयोजक राजकीय स्नातकोत्तर नेहरू कालेज झज्जर के एलुमनाई एसोसिएशन के अध्यक्ष कर्नल योगेन्द्र सिंह ने कहा कि हरियाणा लिटरेरी फेस्टिवल के आयोजन का उद्देश्य हरियाणा की विशिष्ट पहचान को संरक्षित तथा सुदृढ़ करना है।

इस कार्यक्रम के विश्वविद्यालय संयोजक हरियाणा अध्ययन केंद्र के निदेशक प्रो. जेएस धनखड़ ने कहा कि फेस्टिवल समावेशी हरियाणवी पहचान को स्वर दे रहा है।

उद्घाटन सत्र में मंच संचालन छात्र विनय मलिक तथा हेमंत धनखड़ ने किया। इस अवसर पर डीन, स्टूडेंट वेल्फेयर प्रो. राजकुमार, डीन, एकेडमिक एफेयर्स प्रो. नवरतन शर्मा, डीन मानविकी तथा कला संकाय प्रो. हरीश कुमार उपस्थित रहे।

इस मौके पर राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के निदेशक कर्नल युवराज मलिक, संस्कृति कर्मी हरविन्द्र मलिक, निर्मल बुरडक, डा. रणबीर सिंह फौगाट, प्रो. पूर्ण चंद शर्मा, कर्नल अशोक अहलावत ने विचार साझा किए।

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