पीजीआई में बच्चों के कृित्रम अंगों पर डॉक्टरों को सिखा रहे कैसे जीतेंगे जंग

पीजीआई में बच्चों के कृित्रम अंगों पर डॉक्टरों को सिखा रहे कैसे जीतेंगे जंग

रोहतक में मंगलवार को कोरोना की तीसरी लहर को देखते हुए कृत्रिम अंगों पर ट्रेनिंग लेते सीनियर डॉक्टर। -निस

अनिल शर्मा/निस

रोहतक, 22 जून

पीजीआई में पूरे प्रदेश के डॉक्टरों को आपातकाल में शिशुओं की देखभाल करने की विशेष ट्रेनिंग कृत्रिम अंगों पर प्रदान की जा रही है। तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए पीजीआई में सिर्फ बच्चों के लिए ही नहीं बड़ों के आईसीयू को भी बढ़ाने पर काम चल रहा है। पीजीआई में बच्चों के लिए 400 ऑक्सीजन बैड तैयार किए जाए और एक 100 बैड का आईसीयू भी तैयार किया जा रहा है। साथ ही मेडिकल गैस पाइप लाइन पर भी कार्य किया जा रहा है। पीजीआई कुलपति डॉ. ओपी कालरा ने कहा कि प्रदेश में आईसीयू के शिशु रोग विशेषज्ञों की काफी कमी है और तीसरी लहर में यदि बच्चे ज्यादा प्रभावित हुए तो स्थिति को सरकारी अस्पतालों में संभालने के लिए पूरे प्रदेश के डॉक्टरों को चरणबद्ध तरीके से डॉ. कुंदन मित्तल व डॉ. प्रशांत द्वारा ट्रेनिंग प्रदान की जा रही है ताकि वहां भी बच्चों को उच्च गुणवता का इलाज उपलब्ध हो सके। चिकित्सा अधीक्षक डॉ पुष्पा दहिया ने कहा कि डॉ. कुंदन मितल द्वारा प्रदेश के चिकित्सकों को ट्रेनिंग देने का जो बीड़ा उठाया गया है। पीजीआई के डॉक्टरों द्वारा तीसरी लहर की आंशका को देखते हुए पूरे प्रदेश के चिकित्सकों को ट्रेनिंग प्रदान करने का प्रपोजल तैयार किया गया था और एसीएस एमईआर आलोक निगम द्वारा उसे तुरंत मंजूरी प्रदान कर दी गई। मंगलवार से पीजीआईएमएस की स्किल लैब में यह दो दिवसीय ट्रेनिंग कार्यक्रम शुरू हो गया है। डॉ. कुंदन मित्तल ने बताया कि हर सप्ताह मंगलवार व बुधवार को यह ट्रेनिंग कार्यक्रम रखा जाएगा।

सीएचसी, पीएचसी की नर्सों की ट्रेनिंग शुरू

पीजीआई में सीएचसी और पीएचसी के डाक्टरों व नर्सो को विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है। पीजीआई के शिशु विभागाध्यक्ष डॉ. गीता गठवाला ने बताया कि सीएचसी या पीएचसी में कोई बीमार बच्चा आता है तो सबसे पहले उसको देखें कि बच्चा किस हालत में हैं। बच्चे के शरीर का रंग किस तरह का हो रखा है। साथ ही उसका तुरंत बीपी जांच करें और उसका श्वसन तंत्र भी जांचे। इसके अलावा बच्चे को बुखार तो नहीं है, उसकी प्लस देखें तथा उसके ऑक्सीजन लेवल की जांच करें। इससे यह पता चल जाएगा कि बच्चे में संक्रमण के जोखिम की स्थिति किस प्रकार है, इसके बाद आगामी इलाज शुरू करे।

ज्यादा ऑक्सीजन हो सकती है खतरनाक

सभी अस्पतालों में मशीनरी उपलब्ध है और विशेषज्ञों की कमी होने के चलते इन शिशु रोग चिकित्सकों, बेहोशी विभाग के डाक्टरों व मेडिकल अफसरों को बताया जा रहा है कि किस मशीन के माध्यम से हम गंभीर मरीज को कैसे बचा सकते हैं। उन्होंने बताया कि ऑक्सीजन एक दवा है, परंतु खतरनाक दवा साबित हो सकती है, यदि मात्रा से ज्यादा दे दी जाए तो। ऐसे में हर डॉक्टर व नर्स को पता होना चाहिए कि किस मरीज को कितनी ऑक्सीजन की मात्रा प्रदान करनी होती है। डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया कि झज्जर, जींद व सोनीपत जिले के 22 डाक्टरों को कृत्रिम अंगों पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने ने बताया कि आज की इस ट्रेनिंग में चाइल हेल्थ की डिप्टी डायरेक्टर डॉ. सिम्मीवीर भी ट्रेनिंग लेने आई हैं। इस अवसर पर डॉ. वीरेंद्र, डॉ. वंदना, डॉ. संजय जोहर, डॉ. मनीषा, डॉ. वंदना, डॉ. किरणप्रीत भी उपस्थित रहे।

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