Gyan ki Baatein : बच्चों का नाम उल्टा मत पुकारो... ऐसा क्यों कहती है दादी-नानी?
चंडीगढ़, 18 मार्च (ट्रिन्यू)
Gyan ki Baatein : "बच्चों का नाम उल्टा मत पुकारो"... ऐसा अक्सर भारतीय समाज में सुनने को मिलता है, खासकर जब बच्चों को उल्टे नाम से पुकारते हैं। इसमें एक गहरी सामाजिक और सांस्कृतिक सोच भी छिपी हुई है। दादी-नानी अक्सर यह कहती हैं क्योंकि उनका मानना है कि यह बच्चों की गरिमा और इज्जत के खिलाफ हो सकता है और इससे उनका मानसिक और भावनात्मक विकास प्रभावित हो सकता है।
क्यों नहीं पुकारना चाहिए उल्टा नाम
दादी-नानी बच्चों को उल्टा नाम पुकारने से इसलिए मना करती हैं क्योंकि इसे अपशकुन माना जाता है। उनका विश्वास होता है कि अगर किसी का नाम उल्टा पुकारा जाता है, तो यह उस व्यक्ति या बच्चे के जीवन में कुछ नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। भारतीय परंपरा में नामों को बहुत महत्व दिया जाता है और किसी के नाम का सही उच्चारण और पुकारना शुभ और सौभाग्यपूर्ण माना जाता है।
सांस्कृतिक परंपरा पर अधारित
दादी-नानी का यह भी मानना होता है कि बच्चे का नाम उसकी पहचान और भविष्य से जुड़ा होता है और अगर नाम गलत तरीके से पुकारा जाता है, तो यह उनके मानसिक विकास या समृद्धि पर असर डाल सकता है। यह एक तरह की सांस्कृतिक परंपरा है जो उनके अनुभव और विश्वासों पर आधारित होती है।
स्वाभिमान और आत्म-सम्मान पर असर
नाम किसी व्यक्ति की पहचान होता है और यह एक व्यक्ति के स्वाभिमान से जुड़ा होता है। जब बच्चों के नाम को उल्टा पुकारा जाता है तो यह उनके आत्म-सम्मान को ठेस पहुंचा सकता है। बच्चे यह महसूस कर सकते हैं कि उनके नाम का सम्मान नहीं किया जा रहा है, जो उनकी मानसिक स्थिति को प्रभावित कर सकता है। यह उनके मन में एक नकारात्मक छवि उत्पन्न कर सकता है, जिससे वे अपने आप को दूसरों से अलग महसूस कर सकते हैं।
ऐसे नाम न रखें
ज्योतिष के मुताबिक, बच्चों का नाम इश्वर, परमेश्वर, परमपिता, परमात्मा, ब्रह्मा, परमब्रह्मा, सचचिदानंद, वेद, हरि, भगवती, देव, देवी और ओम आदि नहीं रखना चाहिए। माना जाता है कि हर इंसान में कोई न कोई कम होती है। ऐसे में जब कोई उन्हें भला-बुरा कहता है तो अनजाने में हम देवी देवताओं को कोसते हैं, जोकि अच्छा नहीं है।
डिस्केलमनर: यह लेख/खबर धार्मिक व सामाजिक मान्यता पर आधारित है। dainiktribneonline.com इस तरह की बात की पुष्टि नहीं करता है।