प्रयागराज का माघ मेला केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और सामाजिक समरसता का विशाल सांस्कृतिक पर्व है। वर्ष 2026 में रिकॉर्ड भीड़ की संभावनाओं के बीच प्रशासन इसे महाकुंभ जैसी भव्य और सुव्यवस्थित व्यवस्था के साथ सजा रहा है।
प्रयागराज में लगने वाला माघ मेला केवल एक धार्मिक आयोजनभर नहीं है बल्कि आस्था, परंपरा और सामाजिक समन्वय का विराट सांस्कृतिक संगम है। यही कारण है कि दूसरे साल जहां माघ मेले की तैयारी दीपावली के बाद शुरू होती थी, वहीं इस साल बारिश खत्म होते ही उत्तर प्रदेश शासन माघ मेले की तैयारियों मंे जुट गया था। आगामी माघ मेला, जो कि पौष पूर्णिमा 3 जनवरी से शुरू होगा, की नवरात्रि से ही युद्धस्तर पर तैयारियां चल रही हैं।
मुख्य स्नान पर्वों पर भीड़
माघ मेले की भी उसी तरह कई तिथियां बहुत महत्वपूर्ण होती हैं जैसे किसी महाकुंभ में होती हैं। इसलिए आगामी 14 जनवरी को होने वाले मकर संक्रांति स्नान पर अनुमान है कि 3 करोड़ से ज्यादा लोग पहुंचेंगे और 18 जनवरी को पड़ने वाली मौनी अमावस्या पर स्नानार्थियों की संख्या बढ़कर 5 करोड़ तक हो सकती है। फिर 23 जनवरी को वसंत पंचमी और माघी पूर्णिमा पर भी जबर्दस्त भीड़ उमड़ने की संभावना है। इसलिए मेले का समापन जो 15 फरवरी के आसपास होगा।
मेले की बदली रणनीति
माघ मेला या कुंभ मेला की सबसे महत्वपूर्ण तैयारी मेला क्षेत्र का निर्धारण करना होता है। वर्ष 2025 में महाकुंभ के कारण अत्यंत विस्तृत कुंभ क्षेत्र भी कम पड़ गया था, लोगों की भीड़ अनुमान से कई गुना ज्यादा आ गई थी। विभिन्न अनुमानों के मुताबिक करीब 50 से 64 करोड़ लोगों ने महाकुंभ पर स्नान किया था। वैसे तो माघ मेले पर आमतौर पर ज्यादा श्रद्धालु नहीं आते और उसमें भी विदेशी श्रद्धालुओं की संख्या काफी कम होती है। लेकिन जिस तरह दुनिया के कोने-कोने में महाकुंभ का प्रचार हुआ था और पूरी दुनिया को इस विराट संस्कृति ने आकर्षित किया था, उसको देखते हुए माघ मेले के आयोजन में भी बहुत ज्यादा लोगों के आने की संभावना दिख रही है। इस कारण प्रयागराज प्रशासन बाकी सालों के माघ मेलों के मुकाबले इसकी ढाई से तीन गुना ज्यादा तैयारियां कर रहा है।
मेला लेआउट में बदलाव
मेला प्रशासन मेले का सुव्यवस्थित लेआउट अब तक दो बार बदल चुका है। वर्ष 2025 के महाकुंभ का दबाव इस तरह है कि जरा-सी भी चूक अब बर्दाश्त नहीं होने वाली। दरअसल, गंगा-यमुना के जलस्तर, उसके प्रवाह की गति और तटों की सुरक्षा देखते हुए साधु-संतों के आवास, स्वास्थ्य शिविर और पुलिस चौकियों के लिए जोनिंग व्यवस्था की जाती है।
घाट और कल्पवासियों की सुविधा
माघ मेले के प्रमुख घाटों जैसे संगम घाट, अरैल घाट और राम घाट न सिर्फ हर साल की तरह तैयार हो रहे हैं बल्कि पिछले अनुभवों के मुकाबले यहां कल्पवासियों और मेले के दौरान आने वाले सामान्य स्नानार्थियों की भीड़ को देखते हुए इन्हें पहले से बड़ा और ज्यादा व्यवस्थित रूप दिया जा रहा है। कल्पवासियों के लिए विशेष व्यवस्था की गई है, क्योंकि माघ मेला के वास्तविक स्नानार्थी तो कल्पवासी ही होते हैं और माघ मेला कल्पवासियों के लिए ही लगने वाला मेला है। ये कल्पवासी पूरे माघ महीने में गंगा-यमुना के संगम पर ही कुटी बनाकर निवास करते हैं और एक महीने तक विशिष्ट तपस्वी जीवन जीते हैं।
इस बार उन्हें पारंपरिक ढंग से अपनी कुटियों के निर्माण की इजाजत नहीं दी गई बल्कि प्रशासन ने खुद कल्पवासियों के टेंट, चूल्हा, प्रसाधन सुविधा, सुरक्षा तथा शुद्ध जल की अबाध व्यवस्था मुहैया करायी है। इस बार माघ मेला प्रशासन ने अधिक टिकाऊ टेंट, अग्नि सुरक्षा सिस्टम तथा बायो-टॉयलेट की व्यापक संख्या पर जोर दिया है। इस बार विशेष रूप से रो-रो जल वाहनों के माध्यम से कल्पवासियों के लिए स्वच्छ पानी की आपूर्ति की व्यवस्था की गई है।
ऊर्जा-सक्षम एवं सुरक्षा प्रणाली
इसके साथ ही अलग कल्पवासी सूचना केंद्र भी स्थापित किया गया है। इस बार ऊर्जा-सक्षम सौर लाइटों तथा छोटे सौर चार्जिंग स्टेशनों का उपयोग भी पहले से ज्यादा बढ़ाया गया है। माघ मेला पर पड़ने वाले प्रमुख स्नान दिवसों—पौष पूर्णिमा, मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या, वसंत पंचमी और माघी पूर्णिमा—पर अनुमानित श्रद्धालुओं से कुछ ज्यादा की व्यवस्था की जाएगी।
संगम क्षेत्र में बहुस्तरीय बैरिकेडिंग, ड्रोन निगरानी प्रणाली, घूमने वाले सुरक्षा दस्ते और गंगा पुलों व अप्रोच मार्गों पर वन-वे मूवमेंट को पहले से ज्यादा व्यवस्थित रखा जाएगा। मेला क्षेत्र में इस बार सिर्फ स्मार्ट ट्रैफिक कंट्रोल रूम नहीं होगा बल्कि अलग-अलग क्षेत्रों से शहर में प्रवेश करने वाले वाहनों के लिए मुख्य ट्रैफिक कंट्रोल रूम की शाखाएं भी होंगी, जो पूरी यातायात व्यवस्था को पहले से कहीं ज्यादा सुचारु रूप देंगी।
स्वास्थ्य सेवाए एवं आपदा प्रबंधन
इस बार के माघ मेले के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की व्यापक व्यवस्था की गई है। साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं को आपदा प्रबंधन से भी तालमेल बनाकर रखे जाने की व्यवस्था की गई है। इस बार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या हर बार के माघ मेला से दोगुनी होगी और संगम नोज पर चौबीस घंटे, सातों दिन एम्बुलेंस व्यवस्था तैनात रहेगी।
जल-जनित रोगों पर निगरानी के लिए त्वरित मेडिकल रिस्पॉन्स टीमें तथा विशेष आपदा प्रबंधन टीमें जैसे एसडीआरएफ, जल पुलिस, गोताखोर दल और नदी किनारे की बचाव नौकाएँ चौकस रहेंगी। स्वच्छता और कचरा प्रबंधन के मामले में भी 2026 का माघ मेला अब तक के मेलों का मानक होगा।
चौबीस घंटे सफाई दल तैनात रहेंगे और कचरा उठाने वाले वाहनों का पूरा तंत्र जीपीएस नियंत्रित होगा। घाटों पर बायोडिग्रेडेबल कूड़ेदान तथा प्लास्टिक-मुक्त मेला अभियान भी इस बार की महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं में शामिल होगा।
अखाड़ा स्थान एवं डिजिटल
साधु-समाज के लिए अखाड़ों हेतु इस बार पहले से डेढ़ गुना ज्यादा जगह उपलब्ध कराने की बात हुई है और डिजिटल सूचना प्रौद्योगिकी की तमाम सुविधाएं भी इस बार के माघ मेले की यूएसपी होंगी। सीसीटीवी आधारित भीड़ विश्लेषण, क्यूआर-आधारित पहचान प्रणाली, ताज़ा सूचनाओं से अपडेट रहने वाला माघ मेला एप और ई-रिक्शा व ऑनलाइन शटल सेवाएं हर समय सक्रिय रहेंगी।
सांस्कृतिक भव्यता
हर साल की तरह सांस्कृतिक और आध्यात्मिक कार्यक्रम इस मेले की प्रमुख निशानी होते हैं। इस बार इनके लिए बेहतर और आधुनिक सौंदर्यबोध से युक्त व्यवस्था की गई है। भजन संध्या, कथा प्रवचन, योग शिविर, वैदिक अनुष्ठान और गंगा आरती जैसे सांस्कृतिक आयोजन अपनी विशालता और भव्यता के चलते पहले से ज्यादा स्नानार्थियों और पर्यटकों को आकर्षित करेंगे। इसलिए इस बार का माघ मेला अब तक हुए सभी माघ मेलों से ज्यादा विस्तृत और भव्य होगा। इ.रि.सें

