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नैतिक मूल्यों की सशक्त पक्षधरता

पुस्तक समीक्षा
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मुनीश कुमार बुट्टा

‘दुनिया में आकर, बेशक खूब धन कमाया, कोठी बनाई, बैंक बैलेंस बढ़ाया, महंगी गाड़ी भी खरीदी लेकिन नहीं बने मानव तो सब कुछ बेकार’, डॉ. घमंडीलाल अग्रवाल लिखित लघु कविता संग्रह ‘नैतिक मूल्य कितने अमूल्य’ के खजाने का एक मोती है। इस पुस्तक में ऐसी लघु कविताएं हैं जो व्यक्ति को नैतिक मूल्यों का महत्व बताती हैं। उन मूल्यों को अपने जीवन में अंगीकार करने के लिए प्रेरित करती हैं।

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इस पुस्तक में कुल 108 लघु-कविताएं हैं, जिन्हें डॉ. घमंडीलाल अग्रवाल ने अपनी रचनात्मकता से संवारा है। एक मिनट से भी कम समय में पढ़ी जा सकने वाली प्रत्येक लघु कविता में कवि ने गागर में सागर भरने का काम किया है।

पुस्तक में कवि ने सच्चाई, ईमानदारी, मदद, मित्रता, परोपकार, प्रेम, क्षमा, अहिंसा, एकता, सहयोग, शिष्टाचार, करुणा, धैर्य, निष्पक्षता, वफादारी, सम्मान, समर्पण समेत 27 नैतिक मूल्यों का वर्णन किया है और प्रत्येक गुण को एक अध्याय के रूप में प्रतिबिंबित किया है। प्रत्येक अध्याय में चार-चार लघु-कविताएं हैं। सच्चाई के महत्व पर कवि ने लिखा है ‘सच्चाई की राह रहे कांटों से भरी, लेकिन देती सदैव फूलों का अहसास’।

इन लघु कविताओं में कवि ने रूपक अलंकार का प्रयोग किया है। पुनरुक्ति अलंकार का भी जमकर इस्तेमाल हुआ है। मुहावरों, विपरीतार्थक शब्दों के प्रयोग से लघु-कविताएं प्रभावी बन पड़ी है।

पुस्तक में कई जगह प्रूफ की कमी अखरती है। कविताओं में तुकबंदी का कम से कम प्रयोग किया है, लेकिन नये दौर का यह नया दस्तूर है। कुल मिलाकर यह लघु कविता संग्रह नैतिक मूल्यों के प्रचार, प्रसार में सार्थक प्रयास है।

पुस्तक : नैतिक मूल्य कितने अमूल्य कवि : डॉ. घमंडीलाल अग्रवाल प्रकाशक : आनन्द कला मंच प्रकाशक, भिवानी पृष्ठ : 128 मूल्य : रु. 300.

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