मानव मन की सुंदर अभिव्यक्ति

मानव मन की सुंदर अभिव्यक्ति

प्रद्युम्न भल्ला

डॉक्टर राजकुमार निजात के सद्य प्रकाशित लघुकथा संग्रह ‘चित्त चिंतन और चरित्र’ में उनकी 80 लघुकथाएं संग्रहित हैं। पिछले कुछ दशकों में लघुकथा विधा पर आशा से भी अधिक कार्य हुआ है। लघुकथा की एक विशेषता यह है कि इसका अंत मार्क होना चाहिए। जैसे अचानक कोई दंंश या डंक सा व्यक्ति को लगता है और वह बरबस ही सोचने पर मजबूर हो जाता है। 

इस संग्रह की अधिकतर लघुकथाएं मानवीय दृष्टि या बौद्धिक स्तर पर एक संदेश से अनुप्राणित हैं। लेखक ने लघुकथा के उस प्राचीन रूप को प्रयोगी बनाकर बहुत ही सुंदर पात्रों का चयन करके रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़कर उठाए गए कथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है जो वाकई एक सराहनीय प्रयास है। इन लघुकथाओं की विशेषता बहुआयामी है और पर्यावरणीय चिंताओं से लेकर मानव मन की परिष्कार तक है। 

कुछ लघुकथाओं के उदाहरण यहां काबिलेगौर हैं, जैसे लघुकथा बहुमत में कोल्ड ड्रिंक और चाय के बीच की बहस का अंत बहुत सुंदर ढंग से होता है। इसी प्रकार लघु कथा प्रकाश होल में सितारों के माध्यम से मानवीय मन को सकारात्मक सोच की ओर मोड़ने का एक सांकेतिक मगर बहुत ही प्रभावी प्रयास लघुकथाकार ने किया है। लघुकथा का अंत बहुत ही सुंदर है जब लेखक कहता है, ब्लैक होल तक जब यह बात पहुंची कि सितारों ने अपने अस्तित्व को बचाने के लिए एक नए प्रकार के होल का निर्माण करने का निर्णय लिया है तो उसके पूरे अस्तित्व में खलबली मच गई अर्थात ब्लैक होल को नष्ट ना करके उसके समानांतर एक प्रकाश होल को खड़ा कर देना एक नया प्रयोग है मगर पात्र बहुत ही सुंदर ढंग से इसका निर्वाह करते हैं। इसी प्रकार लघुकथा स्वर्ण काल में पुस्तक के महत्व को लेखक ने बहुत ही सुंदर ढंग से परिभाषित किया है। जैसे कि अंत में यह पंक्ति बहुत ही सटीक एवं सार्थक है, किताबों को लगा जैसे उनका स्वर्णकाल लौट आया है। 

इसी प्रकार लघुकथा अवस्थाएं भी युवा वृक्षों एवं सूखी नदी और बरगद के बीच हुई बातचीत के माध्यम से एक सुंदर संदेश देने में सफल होती है, जब सूखी नदी अंत में कहती है, समय की प्रतीक्षा करो मेरे तट के युवा साथियों, संयम उम्मीद और विश्वास के साथ खड़े रहो, तुम्हें तुम्हारे सभी प्रश्नों का साक्षात उत्तर अवश्य मिलेगा। लघुकथा गुंजन में सितारों ने आसमान में चमक रहे साथी सितारों से कुछ बातों के माध्यम से अंत में जब सार प्रस्तुत होता है तो वाकई मन के भीतर एक गुंजन का अहसास हुआ। इसी प्रकार लघुकथा उड़ान में भी परिंदों के माध्यम से व्यक्ति को एक प्रभावी संदेश दिया गया है कि चलते रहना जीवन है। 

इस संग्रह की बहुत महत्वपूर्ण लघुकथा वजूद का अंत भी बहुत ही सुंदर है जब पांव की जूतियों को पात्र बना कर लेखक ने बहुत सुंदर संदेश दिया है, मुझे घमंड में आकर आदमी को ऐसी चुनौती नहीं देनी चाहिए थी, आदमी के होने पर ही हम हैं, बिना आदमी के हम कुछ भी नहीं है, कहकर जूतियां आदमी के पांव में गिर पड़ी। लेखक शब्दों के शिल्पी हैं। पात्रों की कल्पना कर वे मानव मन को एक सुंदर दिशा देने में सफल रहते हैं। लघुकथा की यही विशेषता इनकी रचनाओं में नजर आती है।

पुस्तक : चित्त चिंतन और चरित्र लेखक : राजकुमार निजात प्रकाशक : बुक रिवर्स, इलाहाबाद पृष्ठ : 112 मूल्य : रु. 140.

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