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अस्पताल ने बचाया प्री-मेच्योर बच्ची का जीवन

जाको राखे साइयां मार सके न कोई, यह बात जींद के कमल नर्सिंग होम में एक बच्ची के मामले में चरितार्थ हुई। नर्सिंग होम ने कन्या बचाओ की मुहिम को भी आगे बढ़ाया। मामला कुछ इस तरह से है कि...
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जींद के कमल नर्सिंग होम से बच्ची को गोद में लेकर जाती उसकी मां और परिजन। -हप्र
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जाको राखे साइयां मार सके न कोई, यह बात जींद के कमल नर्सिंग होम में एक बच्ची के मामले में चरितार्थ हुई। नर्सिंग होम ने कन्या बचाओ की मुहिम को भी आगे बढ़ाया।

मामला कुछ इस तरह से है कि 18 जुलाई को जींद के सर्वोदय अस्पताल में 27 हफ्ते की और 830 ग्राम की प्रीमेच्योर बच्ची ने जन्म लिया। वहां कमल नर्सिंग होम की डॉ. पूजा और डॉ. प्रियंका बच्ची को संभालने के लिए तैयार थी। डिलीवरी होते ही बच्ची को इनक्यूबेट कर तुरंत कमल नर्सिंग होम की नर्सरी में शिफ्ट कर दिया गया। बच्ची के फेफड़े बिल्कुल मैच्योर नहीं थे। तुरंत नर्सरी ईचार्ज डॉ. विजय कुमार ने बच्ची का लाइफ सेविंग ट्रीटमेंट शुरू कर दिया। जब मां-बाप को पता चला कि उनके यहां पहली लड़की के बाद दूसरी लड़की हुई है, तो परेशान हो गए। उन्होंने कमल नर्सिंग होम संचालक डॉ. कमल गिरोतरा से बच्ची का इलाज करवाने में असमर्थता जताई और कहा कि उनके पास अस्पताल का खर्च उठाने के लिए पैसे नहीं हैं। इस पर डॉ. कमल ने उन्हें बहुत समझाया और कहा कि जो दवाई का खर्चा हो, वह दे देना, वह भी तब, जब बच्ची बच जाए तब, मगर इसका इलाज बंद मत करो, नहीं तो बच्ची अभी मर जाएगी। 830 ग्राम की बच्ची को नर्सिंग होम की पूरी टीम बचाना चाहती थी। उनकी मेहनत लगन और बेहतरीन सुविधाओं के बूते बच्ची को शनिवार को 42 दिन के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। बच्ची का वजन 1750 ग्राम था और मां का दूध ठीक से पीने लग गई थी। बच्ची की छुट्टी पर केक कटवा कर सभी ने उसकी दीर्घायु और स्वास्थ्य की कामना की और उसे फाइटर नाम दिया। बच्ची के मां-बाप भी खुश थे।

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पिंक कलर की गाड़ी में गई बच्ची

शहर के हांसी रोड पर मिल्क प्लांट के पास इस बच्ची के परिजन अपने साथ पूरी गाड़ी को पिंक कलर के फूलों और गुब्बारे से सजा कर लाए थे। अस्पताल संचालक डॉ. कमल गिरोतरा ने बताया कि वह अपने अस्पताल में गरीब परिवार की बच्चियों को बचाने में अस्पताल का कोई भी चार्ज नहीं लेते। बस जो उसकी दवाइयों का खर्चा होता है, वही लेते हैं।

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