स्मार्ट फोन मिला नहीं, बेकार हुई सि

समझौता लागू न करने के विरोध में आशा वर्करों का प्रदर्शन

समझौता लागू न करने के विरोध में आशा वर्करों का प्रदर्शन

झज्जर में बृहस्पतिवार को अपनी मांगों को लेकर लघु सचिवालय में नारेबाजी करतीं आशा वर्कर्स। -हप्र

झज्जर, 13 अगस्त (हप्र)

अपनी विभिन्न मांगों को लेकर पिछले कई दिनों से लघु सचिवालय में धरने पर बैठी आशा वर्करज बृहस्पतिवार को काफी उग्र नजर आई। धरने के बाद उन्होंने प्रदर्शन किया। आशा वर्करों ने कहा कि वे सरकार द्वारा लागू की गई ऑनलाइन प्रक्रिया के विरोध में नहीं है, लेकिन ऑनलाइन प्रक्रिया सुव्यवस्थित ढंग से चलाने के लिए सरकार को उन्हें संसाधन तो उपलब्ध कराने चाहिए। साल 2018 में उनके संगठन व सरकार के बीच समझौता हुआ था और उसमें कई मांगों पर सहमति बनी थी, लेकिन सरकार ने उस समझौता वार्ता में मानी गई शर्तों को भी आज तक लागू नहीं किया।  सरकार ने ऑनलाइन जुड़ने के लिए फॉरजी सिम तो उपलब्ध करा दी, लेकिन स्मार्ट फोन उन्हें आज तक नहीं दिया गया। जिसकी वजह से सरकार से मिली फॉर जी सिम उनके बैग में ही पड़ी है। सरकार को उन्हें ऑनलाइन ट्रेनिंग देनी चाहिए। लेकिन सरकार उनकी किसी भी मांग पर ध्यान नहीं दे रही है जोकि न्याय संगत नहीं है। उधर आशा वर्करों के धरने पर पूर्व शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल भी पहुंची और उनकी मांगों का समर्थन करते हुए सरकार से इन मांगों को पूरा करने की अपील की।

आशा वर्करों के साथ सौतेला व्यवहार

फरीदाबाद (हप्र) आशा वर्करों की हड़ताल बृहस्पतिवार को सातवें दिन भी जारी रही। यूनियन ने हड़ताल को 4 दिन और बढ़ा दिया है। हड़ताल में आंदोलन का आगे का स्वरूप निर्धारित करने के लिए 16 अगस्त को राज्य कमेटी की बैठक रोहतक में बुलाई गई है। यह जानकारी यूनियन की वित्त सचिव सुधा पाल ने दी।  बादशाह खान अस्पताल में बृहस्पतिवार को हड़ताल पर बैठी आशा वर्करों की सभा की अध्यक्षता जिला प्रधान हेमलता ने की। इस अवसर पर वीरेंद्र सिंह डगवाल ने राज्य सरकार पर आशा वर्करों के साथ सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी की बीमारी मेंं सबसे अधिक काम करने वाली आशा वर्करों को केंद्र सरकार द्वारा घोषित प्रोत्साहन राशियों का अभी तक भुगतान नहीं किया गया है। 

4 दिन और बढ़ाई हड़ताल

फतेहाबाद (निस) : आशा वर्कर्स यूनियन की जिला प्रधान शीला शक्करपुरा ने सिविल सर्जन कार्यालय पर हड़ताल के चौथे दिन आशा वर्कर्स के धरने को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि कोविड-19 में काम कर रही आशाओं को भत्ते के तौर पर 4000 रुपए जोखिम भत्ता दिया जाये, आठ एक्टिविटी का 50 प्रतिशत लागू किया जाये। आशा वर्कर्स इन मांगों के लिए पिछले 4 दिनों से हड़ताल पर हैं। उन्होंने कहा कि आशा वर्कर 24 घंटे काम कर रही है फिर भी सरकार का रुख सही नहीं है। आशा वर्करों का आंदोलन 4 दिन आगे बढ़ाया गया है। आशा वर्कर को हेल्थ वर्कर का दर्जा दिया जाए। 

सरकार ने किये झूठे वायदे

चरखी दादरी (निस) :  आशा वर्कर्स ने बृस्पतिवार को हड़ताल जारी रखी और सिविल अस्पताल में छठे दिन धरना दिया और सरकार के खिलाफ रोष प्रदर्शन किया। सीटू के प्रदेश महासचिव जयभगवान ने कहा कि सरकार ने हर बार इन्हें झूठे वायदे करके टरकाया है। इस बार अगर हड़ताल लंबी चली तो प्रदेश के कई विभागों का कार्य ठप्प हो जाएंगे। 

फ्रंट पर हैं आशा वर्कर

रोहतक  (हप्र) : हड़ताल के आठवें दिन सीएमओ कार्यालय पर आयोजित धरने की अध्यक्षता आशा वर्कर्स यूनियन (सीटू)  की जिला प्रधान अनीता भाली और रेमन ने की। आशा वर्करों को संबोधित करते हुए सीटू राज्य उपाध्यक्ष  रामचंद्र सिवाच एवं जिला सचिव प्रकाश चंद्र ने कहा कि करोनाकाल में आशा वर्कर फ्रंट वर्कर के रूप में काम कर रही हैं और सरकार फिर भी हमारी मांगों को अनदेखा कर रही है। आउट सोर्स कर्मचारी यूनियन के सचिव रोहित ने  बताया कि सरकार 21 जुलाई वाले नोटिफिकेशन को  लागू नहीं कर रही है।  

विभाग ने नहीं दिया मिलने का समय 

सिरसा (निस) : आशा वर्कर्स यूनियन की जिला प्रधान कलावती ने कहा कि उनके धरने को एक सप्ताह बीतने को हैं, लेकिन अभी तक विभाग की ओर से उन्हें मिलने के लिए समय भी नहीं दिया गया है, जिसके चलते कर्मचारियों में रोष बढ़ता जा रहा है।  

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