लेखक मंच ने किया तरलोचन सिंह को याद
लेखक मंच समराला की ओर से शनिवार को स्थानीय किंडरगार्टन स्कूल में दूसरा तरलोचन स्मृति समारोह आयोजित किया गया। मुख्य वक्ता और अध्यक्ष मंडल में शामिल प्रसिद्ध नाटककार प्रो. सतीश कुमार वर्मा ने मा. तरलोचन की साहित्यिक, अध्यापन, फिल्म निर्माण,...
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लेखक मंच समराला की ओर से शनिवार को स्थानीय किंडरगार्टन स्कूल में दूसरा तरलोचन स्मृति समारोह आयोजित किया गया। मुख्य वक्ता और अध्यक्ष मंडल में शामिल प्रसिद्ध नाटककार प्रो. सतीश कुमार वर्मा ने मा. तरलोचन की साहित्यिक, अध्यापन, फिल्म निर्माण, ट्रेड यूनियन नेता और रंगकर्मी की यात्रा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मास्टर तरलोचन न केवल इस क्षेत्र के गौरव थे, बल्कि रंगमंच के क्षेत्र में उनका एक व्यापक कैनवस है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के दौर में, जब पंजाब में सांप्रदायिक उन्माद जोरों पर था, तब मास्टर तरलोचन ने निडर होकर और जान हथेली पर रखकर अपने नाटकों के माध्यम से लोगों को सांप्रदायिकता के खिलाफ जागरूक किया। उन्होंने कहा कि जैसे दक्षिण के नाटककार सुवर्णा ने अपने गांव हेगड़ू को अपने नाम से विश्व मानचित्र पर प्रतिष्ठित किया, उसी तरह मास्टर तरलोचन ने भी अपने रंगमंचीय कार्यों से समराला को विश्व पटल पर रोशन किया। उन्होंने कहा कि मा. तरलोचन ने नाटककार गुरशरण की सोच को आगे बढ़ाया। उन्होंने तरलोचन को रंगमंच का जज बताते हुए कहा कि वे बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे। इस दौरान गुरशरण की बेटी अरीत कौर भी उपस्थित थीं। उन्होंने तरलोचन के साथ गुरशरण के संबंधों और उनकी नाट्यकला के बारे में अपने विचार साझा किए। प्रिंसिपल परमिंदर सिंह बैनीपाल, एडवोकेट दलजीत शाही और मंच के प्रधान नाटककार राजविंदर समराला ने भी मास्टर तरलोचन के साथ बिताए समय को साझा किया। इस अवसर पर प्रसिद्ध नाटककार सोमपाल हीरा द्वारा पंजाबी के प्रसिद्ध कवि सुरजीत पातर की कविताओं पर आधारित एकल नाटक ‘भाषा वहिंदा दरिया’ प्रस्तुत किया गया। लेखक मंच की ओर से सोमपाल हीरा को तरलोचन स्मृति पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
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