बाढ़ में फंसी महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को निकालने के लिए सरकार तुरंत व्यवस्था करे : डल्लेवाल
भारतीय किसान यूनियन एकता सिद्धूपुर की एक विशेष बैठक जगजीत सिंह डल्लेवाल, काका सिंह कोटड़ा, जसवीर सिंह सिद्धूपुर, मान सिंह राजपुरा, मेहर सिंह थेरी की अध्यक्षता में पंजाब भर से आए नेताओं के साथ हुई।
इस समय पत्रकारों से बातचीत करते हुए किसान नेताओं ने कहा कि पिछले दिनों किसानों पर आई प्राकृतिक आपदाओं के कारण किसानों की आर्थिकी पहले ही चरमरा चुकी है और सरकार किसानों के जख्मों पर मरहम लगाने की बजाय खोखली बयानबाजी करके केवल प्रभावित लोगों के जख्मों पर नमक छिड़क रही है, जिसका उदाहरण पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान द्वारा हाल ही में आई बाढ़ के दौरान मुर्गियों की बीमारी, बकरियों की बीमारी और हर तरह के नुकसान का मुआवजा देने की घोषणा से देखा जा सकता है, क्योंकि किसानों को आज तक बाढ़ के दौरान हुए नुकसान का मुआवजा नहीं मिला है और न ही उन मजदूरों को सरकार द्वारा कोई मुआवजा दिया गया है जिनके घर उस बाढ़ के दौरान गिर गए थे। किसान नेताओं से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि 21वीं सदी विज्ञान का युग है और इस समय मौसम की जानकारी मौसम विभाग के पास 15 दिन पहले ही पहुंच जाती है। फिर जब सरकार को यह जानकारी थी कि इस साल इतनी बारिश होगी, तो सरकार ने बांधों से थोड़ी मात्रा में पानी नदियों में क्यों नहीं छोड़ा? अगर सरकार समय रहते नदियों और नहरों के माध्यम से पानी की निकासी कर देती तो पंजाब की तबाही कभी ऐसी नहीं होती। ये बाढ़ इसलिए आई है क्योंकि सरकारों ने खतरे के निशान के करीब बांधों को भर दिया और फिर नदियों में भारी मात्रा में पानी छोड़ दिया। ये बाढ़ प्राकृतिक नहीं है। ये सरकार द्वारा जानबूझकर लाई गई बाढ़ है। इसलिए सरकार को बाढ़ के पानी में फंसे लोगों, खासकर बुजुर्गों, बच्चों और महिलाओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने का तुरंत प्रबंध करना चाहिए।