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Oct 16, 2021

पाक को सबक जरूरी

आतंकी घटनाओं को लेकर गृह मंत्री अमित शाह ने पाकिस्तान की आतंकी नीति पर करारा हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि अगर पाकिस्तान ने आतंकियों पर लगाम नहीं लगाई तो उसे एक और सर्जिकल स्ट्राइक झेलनी पड़ेगी। विगत कुछ दिनों से कश्मीर में आतंकी घटनाएं हो रही हैं। कश्मीर में आतंकी संगठन अल्पसंख्यकों को निशाना बना रहे हैं। घाटी में पिछले एक-डेढ़ साल में जम्मू-कश्मीर के लोगों ने सहज महसूस किया है, लोगों को रोजगार का मौका सही ढंग से मिला है। कश्मीर के विकास के लिए केन्द्र भी फंडिंग कर रहा है। यह बात जम्मू-कश्मीर की स्थानीय राजनीतिक पार्टियों और पाकिस्तान के आकाओं को हजम नहीं हो रही। 

शशांक शेखर, नोएडा

विश्व मंच पर उठायें

बांग्लादेश में इस बार दुर्गा पूजा पर इनसानियत के दुश्मनों ने जो कुछ हिंदुओं के साथ किया, वह शर्मनाक और निंदनीय है। वहां पर समय-समय पर इनके साथ ऐसी इनसानियत को शर्मसार करने वाली खबरें सुर्खियां बनती आ रही हैं। लेकिन बांग्लादेश सरकार इसके लिए गंभीर नहीं दिखती। बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार कर वे मुस्लिम समाज की छवि धूमिल कर रहे हैं। भारत को इन अत्याचारों के मुद्दे को विश्व मंच पर उठाने में अब और देरी नहीं करनी चाहिए। 

राजेश कुमार चौहान, जालंधर

सतर्क रहें

कोरोना की तीसरी लहर आने की पूरी संभावना कम नहीं हुई है। लेकिन चिंता का विषय यह है कि जिस गति से टीकाकरण बढ़ रहा है, वहीं लोगों में लापरवाही भी दिख रही है। बाजारों, माॅल और अन्य भीड़भाड़ वाली जगहों पर लोग बिना मास्क के घूम रहे हैं। वहीं त्योहारों का दौर भी आरंभ हो चुका है। सरकार को कोरोना प्रोटोकाल का अनुपालन सुनिश्चित करना होगा। आम लोगों को भी जागरूक रहने की जरूरत है।

संदीप कुमार वत्स, चंडीगढ़

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Oct 15, 2021

रावण दहन का हक

विजयादशमी के दिन अधर्म के प्रतीक रावण को जलाने से पहले लोग यह सोच लें कि क्या उन्होंने कभी रिश्वत ली, भ्रष्टाचार किया, शराब पी और पिलाई, रावण की तरह ही निर्दोष जीव -जंतुओं को काटा-खाया और डांस बार या अन्य ऐसे स्थानों पर जाकर दूसरों की बेटियों पर कुदृष्टि डाली? कमजोर की रोटी छीनने वाले, गरीब का अपमान करने वाले, निर्दोषों को दंड देने वाले व्यक्तियों को तो रावण जलाने का कोई अधिकार ही नहीं। भगवान राम ने यह कहा था कि वचन नहीं जाएगा, प्राण चाहे चले जाएं, पर आज जिस तरह झूठे आश्वासन और वचनों से चुनावों में लोगों को धोखा दिया जा रहा है, ऐसा धोखा देने वाले चुनावी वीरों को किसी प्रकार भी रावण को जलाने या भगवान राम के आदर्शों का बखान करने का कोई अधिकार नहीं। 

लक्ष्मीकांता चावला, अमृतसर

बेनकाब पाक

अमेरिकी उपविदेश मंत्री वेंडी शरमन भारत के दौरे पर आईं। पाकिस्तान से सीधी बात करते हुए उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान को लेकर हम चिंतित हैं। अफगानिस्तान में क्या चल रहा है, हम जानना चाहते हैं। अमेरिका की विदेश मंत्री के इस बयान से पाकिस्तान काफी नाराज है। पाकिस्तान अमेरिका से संबंध रखना चाहता है। लेकिन उसके लिए अमेरिका पाकिस्तान को मौका नहीं दे रहा है। अफगान में जो हालात हुए हैं, उसका जिम्मेदार पाकिस्तान को बताया है। इमरान चाहते हुए भी पाकिस्तान के लिए कुछ नहीं कर सकते। 

कांतिलाल मांडोत, सूरत

कोयले के विकल्प

कोविड-19 प्रतिबंधों में राहत और अर्थव्यवस्था के पटरी पर लौटने के बाद, भारत सहित कई देश कोयले की कमी का सामना कर रहे हैं। राज्यों को ब्लैकआउट की आशंका है। यह कम चिंताजनक हो सकता है यदि हम कोयले पर अपनी निर्भरता कम करते हैं और ऊर्जा के नवीकरणीय रूप की ओर बढ़ते हैं। सरकार को अपना ध्यान सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम पर भी केंद्रित करना चाहिए क्योंकि वे अधिक ऊर्जा-बचत और कम प्रदूषणकारी हैं।

आयुशी उपाध्याय, चंडीगढ़

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करारा जवाब दें Other

Oct 14, 2021

‘चोरी और सीनाजोरी’ का भद्दा उदाहरण कोई पेश कर रहा है तो वह चीन से अच्छा दूसरा कोई राष्ट्र नहीं हो सकता। पहले ही हांगकांग में लोकतंत्र की हत्या कर उनकी आजादी को छीन लिया है, अब वह ताइवान मे लोकतंत्र का गला घोटने व आजादी को छीनने पर आतुर है। उसके नापाक इरादों को चुनौती देने का काम न केवल भारत ने किया है, बल्कि ताइवान जैसा छोटा देश भी उसकी नाक में मिर्ची डालने से नहीं चूक रहा है। सभी देशों व संयुक्त राष्ट्र संघ को ताइवान, हांगकांग जैसे देशों की स्वतंत्रता संप्रभुता व लोकतंत्र को बरकरार रखने के लिए चीन को ‘ईंट का जवाब, पत्थर से देना होगा!’

हेमा हरि उपाध्याय, खाचरोद, उज्जैन

संकीर्ण राजनीति

13 अक्तूबर के दैनिक ट्रिब्यून में क्षमा शर्मा का ‘हमारा चुना हुआ शोर और चुप्पियां’ लेख कश्मीर में हुई हिंसक वारदातों का विश्लेषण करने वाला था। आवाम के चुने गए नेताओं का नैतिक पतन इस कदर हो जाता है कि जीवन मूल्य उनकी दृष्टि में मात्र चुनावी विजय तक सीमित हो जाते हैं। अल्पसंख्यकों की हत्याएं सारे राष्ट्र की गरिमा को चोट हैं। वतन में सुख-शांति, सहानुभूति उनके लिए चिंता का विषय नहीं है। धर्म जात पात, वोट की राजनीति से ऊपर उठकर लोकहित की चाहत सच्चे मायनों में लोकतंत्र के सभ्य कुशल शासनाधीशों की पहचान है।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

कसौटी पर साख

12 अक्तूबर का सम्पादकीय, ‘टाटा के हुए महाराजा’ में दैनिक ट्रिब्यून ने सही आकलन किया है कि घाटे में चल रही एयर इंडिया को मुनाफे वाली कंपनी में बदलना टाटा समूह की साख के लिए एक कसौटी भी है। ‘देर आयद दुरुस्त आयद’ टाटा समूह ने एयर इंडिया के मालिकाना हक़ प्राप्त करने के लिए अठारह हजार करोड़ रुपये दांव पर लगाकर इंडियन एयरलाइंस की डूबती नैया को बचाने का सराहनीय प्रयास किया है।

युगल किशोर शर्मा, खाम्बी, फरीदाबाद

सरकार की नाकामी Other

Oct 13, 2021

सरकार की आमदनी के मुकाबले खर्चा इतना बढ़ गया है कि उसने सार्वजनिक उपक्रमों में शतप्रतिशत निजी तथा विदेशी निवेश की अनुमति देनी शुरू कर दी। असल में सरकार को सार्वजनिक उपक्रमों, जो किसी अर्थव्यवस्था की रीढ़ होते हैं, चलाने ही नहीं आते, इसलिए उनमें घाटे के मद्देनजर उनको बेचा जा रहा है। एयर इंडिया को टाटा ग्रुप को बेच दिया क्योंकि इसके ऊपर करोड़ों रुपए का कर्जा चढ़ गया था। पूछा जा सकता है कि टाटा ग्रुप घाटे वाले इस उपकरण को लाभ में कैसे बदलेगा। सरकार जब सार्वजनिक क्षेत्र को लाभकारी ढंग से नहीं संभाल सकती तो देश की अर्थव्यवस्था को लोगों के हित के लिए कैसे संभालेगी। सरकार को सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को बेचने के बदले में उनको लाभप्रद बनाने के लिए नीति बनानी चाहिए।

शामलाल कौशल, रोहतक

प्रेरक सम्मान

विश्व शांति के लिये दो पत्रकारों को नोबेल पुरस्कार मिलना बेहद प्रशंसनीय है। आज विश्व में अभिव्यक्ति की आजादी संकट में है, ऐसे समय में अगर लोगों की हक दिलाने के लिये पत्रकारों को नोबेल पुरस्कार का सम्मान दिया जाता है तो यह काबिल-ए-तारीफ है। इन दोनों को यह पुरस्कार मिलने से मीडिया के ऊपर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। दोनों नोबेलिस्ट पत्रकारों से भावी पत्रकारों को यह अवश्य सीख लेनी चाहिए कि डगर कैसी भी हो, लेकिन अगर हमने किसी काम की जिम्मेदारी ली है तो हम उसका निर्वहन सही ढंग से करते हुए अंजाम तक लेकर जाएं।

शशांक शेखर, नोएडा

सकारात्मक हो सोच

अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस लड़कियों के सशक्तीकरण को बढ़ावा देने और लैंगिक समानता को सुदृढ़ करने के लिए हर साल मनाया जाता है। यह दिन विश्व के लिए समाज में बालिकाओं के साथ हो रहे भेदभाव और असमानता के विरुद्ध आवाज उठाने के लिए प्रतिबद्धता का होता है। अफसोस इस बात का है कि 21वीं सदी में आकर दुनिया के बहुत से देशों में लड़कियों के साथ भेदभाव आज भी जारी है। जबकि लड़कियां भी लड़कों के बराबर हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। हमें अपनी सोच को सकारात्मक बनाने की जरूरत है।

राजेश कुमार चौहान, जालंधर

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Oct 12, 2021

नशे पर शिकंजा

पिछले कुछ सालों में एनसीबी ने ड्रग्स मामले में जांच को लेकर जैसे तेजी दिखायी है, वह देश व किसी भी सभ्य समाज के लिए सुखद खबर है। पिछले दिनों ड्रग्स मामले में अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान समेत तीन आरोपियों को मुंबई की एक अदालत ने रिमांड पर भेज दिया। यह खबर भले ही पुलिस व एनसीबी के अधिकारियों के लिए सामान्य हो, लेकिन इसका प्रभाव समाज में भी देखने को भी मिलेगा। एनसीबी को ऐसे ड्रग्स मामलों में संलिप्त लोगों की पहचान कर उचित कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।

नितेश कुमार सिन्हा, मोतिहारी

आतंक की दस्तक

विस्थापितों के पुनर्वास को लेकर हो रहे विरोध को फिर से जम्मू-कश्मीर में आतंकी समर्थन मिलने लगा है। स्थानीय स्तर पर मिल रहे प्रश्रय से आतंकियों ने पिछले दिनों सात निर्दोषों की घर और स्कूल में घुसकर सरेआम हत्या कर दी। संपादकीय ‘आतंक की आहट’ में भी स्पष्ट किया है कि आम नागरिकों में भी दहशत का वातावरण निर्मित हो गया है, जिसमें स्थानीय प्रशासन की कमजोरी सिद्ध हो रही है। यद्यपि हुर्रियत नेता और कट्टरपंथी जेलों में बंद हैं, किंतु हत्याएं नहीं रुकना चिंताजनक तो है ही।

बी.एल. शर्मा, तराना, उज्जैन

सेवा-समर्पण की तार्किकता Other

Oct 11, 2021

विशुद्ध राजनीति

प्रधानमंत्री के जन्म दिवस पर आयोजित सेवा-समर्पण अभियान निस्संदेह विशुद्ध राजनीतिक कवायद है। सेवा-समर्पण निरंतर सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वहन है। व्यक्ति विशेष के जन्मदिवस पर सेवा-समर्पण का उपयोग राजनीतिक लाभ के अलावा कुछ नहीं है। राष्ट्र में बढ़ती हुई असहिष्णुता, धार्मिक वर्गीकरण, जातीय द्वेष, महंगाई, बेरोजगारी, जनसंख्या नियंत्रण, अशिक्षा और चिकित्सा के विषयों पर सेवा-समर्पण का भाव प्रतिबिंबित होना किसी भी राजनीतिक दल की सार्थकता और उपयोगिता सिद्ध करने में सहायक हो सकता है।

सुखबीर तंवर, गढ़ी नत्थे खां, गुरुग्राम

राजनीतिक प्रलोभन

सार्वजनिक जीवन में सेवा-समर्पण की भावना भारतीय संस्कृति तथा संस्कारों की महान द्योतक है। प्रधानमंत्री द्वारा इसे अपने जन्मदिन के पखवाड़े के रूप में मनाना स्वयं को महिमामंडित करने की विशुद्ध राजनीतिक कवायद है, जिसका कोई औचित्य नहीं बनता। लाल बहादुर शास्त्री, मोरारजी देसाई जैसे अनेक प्रधानमंत्री हुए हैं जिन्होंने स्वयं को महिमामंडित करने की बजाय आजादी के दीवानों को ऐसे कार्यक्रम समर्पित किये। देश में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, बढ़ते पेट्रोल-डीजल के दाम पार्टी की सार्थकता को सिद्ध कर ही रहे हैं।

एम.एल. शर्मा, कुरुक्षेत्र

प्रचार का हथकंडा

प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर सेवा समर्पण अभियान चलाना एक राजनीतिक हथकंडा मात्र ही है। आजकल के राजनेता हर मौके का राजनीतिक लाभ उठाने से बाज नहीं आते। क्या केवल प्रधानमंत्री के जन्मदिन को मनाने को लेकर ही लोगों की सेवा की जा सकती है? अगर सरकार सचमुच लोगों की सेवा के लिए कटिबद्ध है तो बढ़ती हुई महंगाई, बेकारी, महिलाओं के प्रति अपराध, कुपोषण, पीने का पानी, किसानों की समस्याओं को दूर करना, आर्थिकी असमानता को दूर करना, बेरोजगारी, ग्रामीण क्षेत्रों का विकास करने के लिए आवश्यक कदम उठाये।

शामलाल कौशल, रोहतक

प्रजातांत्रिक परंपरा

भाजपा द्वारा प्रधानमंत्री का जन्मदिन पखवाड़ा मनाने का औचित्य पार्टी की प्रजातांत्रिक मूल्य परंपरा को आगे बढ़ाने का आह्वान एवं सेवा-समर्पण का प्रतिमान है। इस समीचीन दृष्टिकोण से अब यही प्रश्न उठता है कि जहां लोकतंत्र का मूल्य बढ़ जाता है वहां राजनीति दरकिनार होकर गौण हो जाती है। यद्यपि पूर्वाग्रहों से मुक्त होकर विश्लेषण करें तो सेवा-पराकाष्ठा के धरातल पर मोदी की साख देश और दुनिया में परिलक्षित हुई है। अतीत में रसातल में गयी पार्टी को राजनीतिक धरातल पर पुनर्जीवित करने काम भी मोदी ने ही किया है।

सतपाल मलिक, सींक, पानीपत

सेवा का संकल्प

सेवा समर्पण भाव जीवन में एक अच्छी शुरुआत है। अगर हम अपने जीवन में इसे अपना लें तो हमारा घर, समाज तथा देश एक बेहतर कल की मिसाल बन सकता है। देश का मुखिया के जन्मदिन से अगर एक अच्छे विचार, अच्छे भाव की शुरुआत होती है तो इसे बेहतर ही कहा जाएगा। मोदी के जन्मदिन से देश में एक अच्छी विचारधारा की शुरुआत होती है तो यह उत्तम है। इसमें राजनीतिक स्वार्थ की दूरगामी रणनीति भी हो सकती है। कोई भी पार्टी अपने राजनीतिक घटा-जोड़ के बिना कोई कदम नहीं उठाती। इसलिए विशुद्ध सेवा-समर्पण की बात गले से नीचे नहीं उतरती।

सत्यप्रकाश गुप्ता, बलेवा, गुरुग्राम

ध्यान हटाने के लिए

लोकतंत्र को विश्व की सबसे बेहतर शासन प्रणाली माना जाता है और राजनीति को जन-सेवा का माध्यम बनाया जाता है। लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में हर राजनीतिक दल सत्ता पाने और इसे बनाए रखने तक ही सीमित नजर आता है। भाजपा ने नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के क्रम से 17 दिसंबर से 7 अक्तूबर तक सेवा समर्पण अभियान चलाया, जिसके जरिए वह पीएम की राजनीतिक यात्रा और कामों का बखान करेगी। आम जनता को बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, कोरोना काल के दौरान सरकार की असफलता और चौपट अर्थव्यवस्था, किसान आंदोलन जैसे मुद्दों से भटकाने के लिए ही इस अभियान की शुरुआत की गई है।

पूनम कश्यप, बहादुरगढ़

पुरस्कृत पत्र

अंत्योदय की भावना

प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में एक पखवाड़े का ‘सेवा समर्पण मुहिम’ को किसी खास शख्सियत के जन्मदिवस से जोड़ने में कोई बुराई नहीं है। लेकिन इस अवधि के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा निर्धारित किए गए लक्ष्य पर जनहित की दृष्टि से समर्पण भावना से कार्य होना चाहिए। सिर्फ वाहवाही लूटने एवं राजनीतिक नफे-नुकसान के लिए चलाए जाने वाले अभियानों पर जनता द्वारा कोई प्रतिसाद प्राप्त नहीं होता है। इस प्रकार की मुहिम के दौरान अंत्योदय की भावना से किए गए सार्थक प्रयासों का निश्चित रूप से पार्टी को लाभ प्राप्त होता है।

ललित महालकरी, इंदौर, म.प्र.

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Oct 09, 2021

दमन और सत्ता का मन

सात अक्तूबर के दैनिक ट्रिब्यून में राजकुमार सिंह का लेख ‘दमन, हनन और सत्ता का मन’ लखीमपुर खीरी कांड की हकीकत का चित्र दर्शाता है। जो बताता है कि देश की राजनीति कितनी निष्ठुर और निर्मम हो गई है। कैसे-कैसे लोग सांसद और मंत्री बन रहे हैं। चेहरे, चाल और और चरित्र बदलने का दावा करने वाले राजनीतिक दल ने केंद्रीय मंत्रिमंडल में कैसे-कैसे नगीने गढ़े हैं। कैसे मंत्री के परिवार के संस्कार हैं कि बेटे की काली करतूतों ने भाजपा की किरकिरी करा दी और कांग्रेस को लाशों पर राजनीति करने का सुनहरा अवसर दे दिया। प्रश्न यह भी है कि सामाजिक, राजनीतिक अन्याय, पुलिस की बर्बरता और हादसों में दर्जनों लोग रोज मरते हैं। कश्मीर में आतंकवाद से लोग मर रहे हैं। क्या कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व और राज्यों के क्षत्रप उनका दुख बांटने जा रहे हैं? क्या मुआवजा देने जा रहे हैं? इसमें दो राय नहीं कि लखीमपुर खीरी की घटना दुखद है। सवाल केंद्र सरकार पर भी है कि क्यों मंत्री को मंत्रिमंडल से नहीं हटाया गया? वीडियो वायरल होने के बाद दागी मंत्री के पुत्र को गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया? लेखक ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया कि राजनीतिक दल जाति विशेष के वोट बैंक के लिये दागी लोगों को क्यों मंत्री बनाया जाता है? वे किसी जाति व समुदाय की अस्मिता के प्रतीक कैसे हो सकते हैं? हकीकत बताने वाले लेख के लिये साधुवाद!

मधुसूदन शर्मा, रुड़की, हरिद्वार

नारी सशक्तीकरण

तीन अक्तूबर के दैनिक ट्रिब्यून के लहरें अंक में क्षमा शर्मा का ‘शक्ति और ममता की मूरत, घर-घर देवी की सूरत’ लेख मातृशक्ति स्वरूपा मां-जगदंबा के विभिन्न स्वरूप शक्तियों का वर्णन करने वाला था। प्राचीन सांस्कृतिक पारंपरिक रीति-रिवाजों को मनाने की शैली, विधिविधान और सामाजिक विविधता में एकता के सूत्रपात मनोहारी दृश्य की प्रस्तुति रही। शक्ति स्वरूपा नारी सशक्तीकरण विचारधारा में वृद्धि करने वाली है। मगर आये दिन नारी के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं सोचनीय हैं।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

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Oct 08, 2021

जीवनशैली बदलें

दुनिया के 21 देशों के 20 हजार बच्चों के सर्वे के मुताबिक 15 से 24 साल के बच्चे डिप्रेशन के दौर से गुजर रहे हैं। भारत में सात बच्चों में से एक अवसाद से पीड़ित है। यह एक गंभीर समस्या है। विचार करने का विषय है और इस गंभीर बीमारी ने बच्चों को कैसे जकड़ लिया? महामारी ने हमारे जीवन को विशेष रूप से बच्चों के भविष्य पर गहरी चोट की है। महामारी में स्कूल बंद रहे। बच्चे घरों में कैद रहे। उनकी कोई शारीरिक गतिविधि नहीं है। इन सभी कारकों ने उन्हें नकारात्मक सोचने पर मजबूर कर दिया। इन सब के बाद बच्चों को अपनी जीवन शैली बदलनी होगी। 

नरेंद्र के. शर्मा, भुजड़ू, जोगिंदर नगर

राजनीति न हो

लखीमपुर खीरी में जीप से कुचलने के कारण जो हादसा हुआ वह बहुत ही दुखद तथा निंदनीय है। उत्तर प्रदेश सरकार ने मृतक किसानों के परिजनों को 45-45 लाख रुपयों की राहत राशि देने तथा योग्यता अनुसार सरकारी नौकरी देने का ऐलान किया है, जो सरकार की संवेदनशीलता का प्रतीक है। अब लखीमपुर खीरी घटना राजनीति का रूप लेती जा रही है। विपक्ष इस मुद्दे को सुलझाने की बजाय उछालने के लिए उद्धृत है। विपक्ष को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए इसके समाधान पर आगे आना चाहिए। आम जनता इस घटनाक्रम को बखूबी देखती और समझती भी है। 

हेमा हरि उपाध्याय, खाचरोद, उज्जैन

मूल्यों की शिक्षा

शिकागो विश्वविद्यालय में सनातन धर्म और हिंदू दर्शन से संबंधित विभिन्न कोर्स शुरू किए जाने की पहल प्रशंसनीय है। स्थापना का उद्देश्य सनातन धर्म के आदर्श और मूल्यों की शिक्षा देना, उनका संरक्षण करना और प्रचार-प्रसार कर आगे बढ़ाना है। इसमें कई तरह के पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। वैदिक विषयों पर बैचलर, मास्टर और पीएचडी की डिग्री प्रदान की जाएगी। विदेशों में सनातन धर्म और हिंदू दर्शन के प्रति बढ़ता आकर्षण उसकी महत्वता को दर्शाता है।

संजय वर्मा, धार, म.प्र.

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Oct 07, 2021

सुधार की राह

5 अक्तूबर के दैनिक ट्रिब्यून में भरत झुनझुनवाला का ‘तंत्र में सुधार से अर्थव्यवस्था को गति’ लेख विश्लेषण करने वाला था। विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों के मूल्यांकन के अनुसार भारत में विकास तथा शिक्षा का स्तर दिनप्रतिदिन गिरता जा रहा है। लेखक के अनुसार सरकार वैश्विक स्तर के मुकाबले में शिक्षा पर कम व्यय करती है। वहीं सरकारी स्कूलों पर खर्च तो बहुत होता है परंतु जवाबदेही न होने के कारण परीक्षा परिणाम निराशाजनक होते हैं। इसके बावजूद लोग अपने बच्चों को इंग्लिश मीडियम पब्लिक स्कूलों में पढ़ाना चाहते हैं। वहीं लेखक का कहना है कि पर्यावरण में सुधार करके हम श्रमिकों की कार्यकुशलता बढ़ा सकते हैं। 

शामलाल कौशल, रोहतक

शिक्षा में प्रयोग

पूरे सोलह माह बाद बच्चों के स्कूल खुल गये हैं। कोविड-19 के कारण बंद रहे स्कूलों से विद्यार्थियों की पढ़ाई-लिखाई गायब हो गयी थी। स्कूल खोलने के बाद भी नित्य नये-नये उपक्रम किए जा रहे हैं। विडंबना की बात है कि अब नित्य नये-नये प्रयोग से जहां शिक्षक चकरा रहे हैं, वहीं छात्र को भी समझ में नहीं आ रहा है कि उन्हें आखिर करना क्या है। शिक्षाविदों को बच्चों को हिंदी, गणित, अंग्रेजी के अंतर्गत उसकी बुनियादी दक्षता पर भी जोर देना चाहिए, ताकि बच्चा पुनः मुख्य शिक्षा की धारा से जुड़ सके।

हेमा हरि उपाध्याय, खाचरोद, उज्जैन

घटता जनाधार

कांग्रेस का घटता जनाधार और कई राज्यों में करारी हार से कांग्रेस तिलमिला उठी है। प्रियंका वाड्रा कांग्रेस की नैया पार लगाने के लिए यूपी में इन दिनों किसानों का साथ दे रही है। कांग्रेस ने नए चेहरों को कांग्रेस में शामिल करने की ठानी है। मोदी की विकास नीतियों और विदेशों में बढ़ती भारत की पैठ से हड़बड़ाहट में कांग्रेस ने आपा खो दिया है। मोदी की विकास योजनाओं का भी कांग्रेस खुले मंच से विरोध करती है। 

कांतिलाल, मांडोत, सूरत

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मारक महंगाई Other

Oct 06, 2021

पिछले कुछ महीनों से खाद्य पदार्थों की कीमतों में काफी बढ़ोतरी हो गई। आम लोगों के लिए जीवनयापन करना कठिन होता जा रहा है। कोरोना संकट ने पहले ही आम लोगों से उनके रोजगार के साधन छीन लिए थे, फलत: उनके लिए जीवनयापन वैसे ही कठिन हो रहा था। सरसों के तेल और दाल की कीमतों ने तो ऐसे उछाल मारना शुरू कर दिया है कि रुकने का नाम ही नहीं ले रही है। इसके साथ ही पेट्रोल-डीजल की बढ़ती वृद्धि ने महंगाई को और हवा दे दी है। इन हालात में तो अब आम आदमी को ही जागरूक होकर सरकार को उनके द्वारा जनता से किए गए वादे को याद दिलाना होगा।

गीता कुमारी, सरहिंद, फतेहगढ़ साहब

आत्मघाती कदम

देश में वन एवं वन्य जीवों के संरक्षण को लेकर चर्चा फिर से जोरों पर है। बकस्वाहा के बाद फिर से छतरपुर जिले के केन-बेतवा नदी जोड़ परियोजना के कारण घने जंगलों को काटे जाने की योजना पूरी तरह तैयार कर ली गई है, जिसमें 23 लाख पेड़ काटने का निर्णय लिया गया है। अगर इतने पेड़ एक साथ काटे जाते हैं तो इसकी चपेट में स्थानीय ‘पन्ना नेशनल पार्क’ का लगभग 105 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र पूरी तरह आ जाएगा। जो कि पर्यावरण अनुकूलन के लिए विपरीत है।

नितेश कुमार सिन्हा, मोतिहारी

स्वच्छता की मुहिम

महात्मा गांधी जी के जन्मदिन पर देश में स्वच्छता अभियान की चर्चा हुई। इस मौके पर कहीं-कहीं स्वच्छ अभियान भी चलाया गया। विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन ने माना है कि भारत में प्रति व्‍यक्ति औसतन लगभग 6500 रुपये बीमारियों पर ही खर्च होता है। इस संगठन के अनुसार स्वच्छ भारत अभियान देश के आमजन पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। स्वच्छ भारत का सपना तभी पूरा होगा जब आमजन और नेता स्वच्छता के प्रति गंभीरता दिखाएंगे।

राजेश कुमार चौहान, जालंधर

आपकी राय Other

Oct 05, 2021

उनका भी वक्त

26 सितंबर के दैनिक ट्रिब्यून लहरें अंक में केवल तिवारी का ‘अनुभव की खान घर की शान’ लेख मानवीय जीवन में बुजुर्गों की अहमियत का आद्यंत विवेचन करने वाला था। अपने ही घर में अपनों द्वारा एक कैदी-सा जीवन जीते हैं। वृद्धाश्रम में अधिक सुख-सुविधाएं पाकर खुशहाल नजर आते हैं। संतान क्यों भूल जाती है कि यह समय उनके जीवन में भी आएगा।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल


राष्ट्र ऋणी

बहुत सारे देशभक्तों ने कुर्बानियां देकर देश आजाद करवाने में मदद की लेकिन गांधीजी की भूमिका अग्रणी रही। लेकिन कुछ लोग महात्मा गांधी के भारत को अंग्रेजों से स्वतंत्र करवाने में योगदान के ऊपर सवालिया निशान लगाने लगे हैं। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मतलब यह नहीं कि गांधी के बारे में कुछ भी कह दें!

शामलाल कौशल, रोहतक

कैसे थमें सड़क हादसे Other

Oct 04, 2021

सजगता अभियान

यातायात के नियमों का पालन न करना, शराब पीकर तीव्र गति से वाहन चलाना, मोबाइल से बात करना, यातायात मार्गों में खड्डे होना, स्पीड ब्रेकर व यातायात चेतावनी संकेत पट्टिका का अभाव सड़क दुर्घटनाओं में वृद्धि करता है। प्राकृतिक कारणों में धुंध-कोहरा के दौरान चालकों द्वारा लाल बत्तियों को न जलाना अथवा ब्रेक लाइट का खराब होना है। कारगर स्वास्थ्य सेवाएं, साफ-सुथरे यातायात मार्ग, शराब व मोबाइल का प्रयोग वाहन चलाने वालों पर लगाम, संकेत पट्टिकाएं तथा मीडिया के माध्यम से प्रचार-प्रसार की मदद से सड़क हादसों में कमी आ सकती है।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

सख्ती जरूरी

दुख की बात है कि 2020 में सड़क दुर्घटना में एक लाख बीस हज़ार लोग मारे गए। आज भी गांव या शहरों में सड़कों की हालत ठीक नहीं है, जिसका खमियाजा दुर्घटना के रूप में भुगतना पड़ता है। सरकार को सड़कों का मरम्मत कार्य शीघ्र करवाना चाहिए ताकि दुर्घटनाओं पर लगाम लगाई जा सके। दूसरा सबसे बड़ा दुर्घटना का कारण नाबालिग बच्चों को वाहन चलाने के लिए देना। माता-पिता का बच्चों पर नियंत्रण जरूरी है। इसके अतिरिक्त, चालक सड़क नियमों का सख्ती से पालन नहीं करते हैं।

सतपाल सिंह, करनाल

जागरूकता अभियान चले

सड़क हादसों में हर साल एक लाख से भी ज्यादा लोगों की जान जाती है, इसका कारण जल्दबाजी व लापरवाही तो है ही, लोग अपने जीवन मूल्य ही भूल गए हैं। हमें यातायात के नियमों का पालन करते हुए, अपने साथ-साथ दूसरों का भी ध्यान रखना होता है। दोषी तो काफी हद तक सड़कें भी हैं, लेकिन इससे भी बड़ा कारण है सड़क सुरक्षा नियमों की पूरी जानकारी का न होना। मोटर वाहन चालकों, पैदल यात्री, साइकिल चालक यहां तक कि पुलिस कर्मियों तक को भी यातायात नियमों की पूरी जानकारी का अभाव है। इसके लिए सरकार, सामाजिक संस्था और संगठन भी स्कूल-कॉलेजों व अन्य स्थानों पर समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाएं।

हर्षिता जांगड़ा, तोशाम, भिवानी

कानूनों की पालना

सड़क हादसों का कारण अनियंत्रित गति, ड्राइवर द्वारा शराब का सेवन, ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं करना, बसों में अधिक सवारी भरना, सड़कों एवं गाड़ियों का रख-रखाव सही नहीं होना और बच्चों का बिना लाइसेंस गाड़ी चलाना इत्यादि। सड़क दुर्घटनाओं में उपचार हेतु अभी तक ट्रॉमा सेंटर नहीं बन पाए हैं। एम्बुलेंस की कमी है, समय पर इलाज नहीं मिलने से काफी जानें चली जाती हैं। ट्रैफिक नियमों की अवहेलना पर कठोर दण्ड राशि, लाइसेंस रद्द करना जैसे नियम सख्त हों। सड़क सुरक्षा सप्ताह से जागरूकता तो जनता में ला रहे हैं लेकिन अभी भी आबादी की तुलना में व्याप्त संसाधन और नेटवर्क विकसित करने का प्रयास करना होगा।

भगवानदास छारिया, इंदौर

नियमों का पालन

देश में प्रति वर्ष बड़ी संख्या में सड़क दुर्घटनाओं में लोग बे-मौत मारे जाते हैं। यातायात के नियमों की लापरवाही इसका एक बड़ा कारण है। मोबाइल पर बात करते, तेज रफ्तार से गाड़ी चलाते हुए लोगों को आम देखा जा सकता है। लोगों की लापरवाही के साथ-साथ शासन-प्रशासन की ढिलाई भी देखी जा सकती है। दुर्घटना होने पर उचित समय पर उपचार न मिलना, सरकारी प्रबन्ध की कमजोरी ही दर्शाता है। सड़क हादसों को रोकने के लिए सरकार को यातायात के नियमों की पालना के लिए सख्ताई बरतने की ज़रूरत है।

सतीश शर्मा, माजरा

लापरवाही न हो

अब तो सड़क दुर्घटनाओं में सड़कों पर रात के समय बैठने वाले गोवंश भी बढ़ोतरी करने का कारक बन गए हैं। वहीं लापरवाही से वाहन चलाने वालों को सजा देने वाला तंत्र मजबूत नहीं है। यातायात पुलिस भी खानापूर्ति करती है और वह भी व्यक्ति की हैसियत के हिसाब से चालान करती है। यहां दोहरा मापदण्ड अपनाया जाता है। सड़कें कोई एक दिन में ठीक नहीं हो सकतीं लेकिन लापरवाही से या तेज रफ्तार से वाहन चलाने वालों पर तो कार्रवाई की जा सकती है। इसके साथ लोगों को जागरूक करना जरूरी है।

जगदीश श्योराण, हिसार

पुरस्कृत पत्र

सजगता-सतर्कता जरूरी

सड़क दुर्घटनाओं में मरने वाले लोगों के आंकड़े वास्तव में चिंताजनक हैं। कई बार प्रतिस्पर्धा के कारण चालक अपने वाहनों की रफ्तार बढ़ा देते हैं। प्रत्येक लेन व हर प्रकार के वाहनों के लिए गति सीमा तय है। इसका कड़ाई से पालन होना चाहिए। चालक का पूरा ध्यान ड्राइविंग पर ही होना चाहिए। नागरिकों की लापरवाही भी इन दुर्घटनाओं को बढ़ावा देती हैं। बसों के पीछे लटक कर या छतों पर बैठ कर सफ़र करना इन हादसों को निमंत्रण देने जैसा है। सामान ढोने वाले वाहनों में यात्रियों के सफ़र पर पूर्ण प्रतिबंध होना चाहिए। सड़कों का दोषपूर्ण होना भी हादसों का एक प्रमुख कारण है। ड्राइवरों के आराम व पर्याप्त नींद की व्यवस्था इन दुर्घटनाओं की रोकथाम में एक अहम भूमिका निभा सकती है।

शेर सिंह, हिसार

आपकी राय Other

Oct 02, 2021

दुनिया को खरी-खरी

प्रधानमंत्री ने चौथी बार संयुक्त राष्ट्र में विश्व को संबोधित किया, जिसमें सबसे पहले तो संयुक्त राष्ट्र को खुद को जिम्मेवारी से काम करने की नसीहत दी। वहीं बिना नाम लिए आतंकिस्तान पाक और साम्राज्यवादी चीन को क्षेत्रीय शांति बनाने और मिल कर काम करने की सलाह दी। प्रधानमंत्री ने अफगानिस्तान पर विश्व के सामने भारत का रुख साफ कर दिया है। जब तक महिलाओं को समान अधिकार और सुरक्षा की गारंटी नहीं मिलती एवं अफगान भूमि का प्रयोग आतंकी प्रयोजनों के लिए बंद नहीं होगा तब तक भारत अफगानिस्तान का साथ नहीं देगा।

पुलकित जैन, बनूड़, पंजाब

नशे का नश्तर

आजकल नशीले पदार्थों का सेवन लोगों के लिए आम होता जा रहा है। पंजाब में जिस कदर ड्रग्स का सेवन हो रहा है, वह काफी हैरान कर देने वाला है। पंजाब में हर तीसरा व्यक्ति नशे में डूबा रहता है। इसका असर सबसे ज्यादा पंजाब की नौजवान पीढ़ी पर देखने को मिल रहा है। इन सबको रोकने के लिए यहां नशा-मुक्ति योजनाओं जैसी जागरूकता की काफी जरूरत है। राज्य सरकार को भी इस पर अपनी कड़ी निगरानी के साथ कार्रवाई करवाने की जरूरत है।

गीता कुमारी, सरहिंद, फतेहगढ़ साहिब

करारा जवाब दें

सीमा पर चीन की हरकतें फिर बढ़ने लगी हैं। वार्ता करके पीछे हट कर चीन ने हमें भुलावे में रखने की कोशिश की है। अब सीमा क्षेत्र में हजारों चीनी सैनिकों का जमावड़ा निश्चित रूप से किसी न किसी अनहोनी का संकेत लग रहा है। भारत ने अब तक जितना संयम बरता है अगर उसकी जगह दुनिया का कोई और राष्ट्र होता तो कब का युद्ध छिड़ गया होता। बार-बार के झंझट से अच्छा है कि एक बार चीन को उसी की भाषा में करारा जवाब दिया जाए।

अमृतलाल मारू 'रवि', धार, म.प्र.

आपकी राय Other

Oct 01, 2021

जिम्मेदारी का अहसास

संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रधानमंत्री मोदी ने निःसंदेह अपनी छाप छोड़ी है। उन्होंने सन्देश दिया कि एक तरफ भारत जिम्मेदार राष्ट्र के रूप में वैश्विक महामारी कोरोना की चुनौती से निपटते हुए भी दूसरे देशों को वैक्सीन उपलब्ध कराने की जद्दोजहद में जुटा हुआ है, वहीं चीन अभी पारदर्शिता की कमी के रुख पर कायम है। वह कोरोना की उत्पत्ति की गुत्थी को सुलझाने में सहयोग देने को तैयार नहीं। चीन की वैक्सीन को दुनियाभर से वापस किया जा रहा है। कुल मिलाकर भारत अपनी बात रखने में सफल रहा।

चंद्र प्रकाश शर्मा, दिल्ली

प्रगतिशील सोच

26 सितंबर के दैनिक ट्रिब्यून अध्ययन कक्ष अंक में कमल कपूर की कहानी ‘शगुना का शगुन’ भारतीय पर्व की सांस्कृतिक, पारंपरिक आंचलिकता का समीक्षात्मक संदेश देने वाली थी। त्योहारों का महत्व मातृशक्ति बिना अधूरा है। रूढ़िवादी परंपराएं आज भी हमारे सामाजिक विकास में महिला सशक्तीकरण में बाधक हैं। शगुन-अपशगुन संकीर्ण मानसिकता का परिचायक है। कहानी प्रेरणास्रोत रही।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल

सम्मान के हकदार

पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात ने राजनीति के क्षेत्र में हलचल मचा दी है। कप्तान पहले ही अपनी भविष्य की राजनीति का संकेत दे चुके थे। नवजोत सिंह सिद्धू ने भी कांग्रेस पार्टी को मुश्किल में डाल दिया है। कयास लगाये जा रहे हैं कि अगर कैप्टन भाजपा में शामिल होते हैं, तो उन्हें पार्टी द्वारा पूरा सम्मान दिया जाएगा।

नरेंद्र कुमार शर्मा, भुजड़ू, मंडी

महिलाओं के हक में

सरकार को इस साल के भीतर लड़कियों के लिए एनडीए परीक्षा आयोजित करने का सुप्रीम कोर्ट का आदेश एक साहसिक कदम है। महिला अधिकारियों की आने वाली पीढ़ी इस निर्णय को समाज में एक लंबी छलांग के रूप में देखेगी। महिला न्यायाधीशों के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण का समर्थन व्यक्त करते हुए सीजेआई के हालिया बयान से पता चलता है कि न्यायपालिका अच्छे हाथों में है।

नेहा जमाल, मोहाली, पंजाब