उत्तर भारत में बारिश-बाढ़ ने मचाई तबाही, हालात जल-थल जैसे, बचाव में जुटी एजेंसियां
पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर सहित उत्तर भारत के अनेक इलाकों में लगातार बारिश के बाद हालात जल-थल जैसे हैं। स्थानीय एवं केंद्रीय एजेंसियां लगातार बचाव और राहत कार्य में जुटी हैं। पंजाब के आठ जिले भीषण बाढ़ की चपेट में हैं। प्रशासन के अनुरोध पर, सेना, सीमा सुरक्षा बल, भारतीय वायु सेना और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल ने संकट की स्थिति पर तुरंत प्रतिक्रिया दी है और बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चला रहे हैं।
अमृतसर जिला प्रशासन ने सेना की मदद से रामदास क्षेत्र के जलमग्न गांवों में फंसे बच्चों और बुजुर्गों सहित कई लोगों को निकाला। रावी नदी के बढ़ते जलस्तर से प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को बचाने के लिए वाहन एवं नावें तैनात की गईं हैं। प्रदेश के पठानकोट, गुरदासपुर, फाज़िल्का, कपूरथला, तरनतारन, फिरोजपुर, होशियारपुर और अमृतसर ज़िलों के गांव सर्वाधिक प्रभावित हैं। उधर, जम्मू-कश्मीर में हालात थोड़े सुधरे हैं, लेकिन नेशनल हाईवे सहित कई रास्ते अब भी बंद हैं। हिमाचल में भी नदियों के उफान पर होने से खतरा बरकरार है।
हरियाणा ने बढ़ाया मदद का हाथ
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने पड़ोसी होने के नाते पंजाब की मदद का ऐलान किया है। बृहस्पतिवार को चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत में नायब सैनी ने कहा कि बाढ़ के संबंध में उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री को पत्र भी लिखा है। उन्होंने लिखा, ‘इस प्राकृति आपदा में पंजाब के हमारे भाई-बहन भारी कष्ट झेल रहे हैं। हरियाणा सरकार और हरियाणा की जनता इस कठिन समय में पंजाब के साथ खड़ी है। यदि आपको किसी प्रकार की सहायता सामग्री, बचाव दल, चिकित्सा सहायता या अन्य संसाधनों की आवश्यकता हो तो निसंकोच अवगत कराएं।’ सैनी ने कहा कि संकट की घड़ी में प्रभावित हर व्यक्ति को शीघ्र राहत पहुंचाना हमारा उद्देश्य है।
बह गयी कई इमारतें
हिमाचल प्रदेश में रावी नदी में अचानक आई बाढ़ के कारण कांगड़ा जिले के सुदूर बड़ा बंगाल गांव में कई सरकारी इमारतें बह गईं। अधिकारियों ने कहा, ‘निचले बड़ा बंगाल में एक प्राथमिक और उच्च विद्यालय, पंचायत घर, एक आयुर्वेदिक औषधालय और एक नागरिक आपूर्ति भंडार बह गए। नागरिक आपूर्ति भंडार में लगभग 70 क्विंटल राशन रखा था। दो पुलों के बह जाने से गांव राज्य के बाकी हिस्सों से कट गया है।’