जेल में बंद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के संस्थापक इमरान खान को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है। इस बीच, कहा जा रहा है कि सरकार उन पर देश छोड़ने का दबाव बना रही है। उनके चाहने वालों में से कुछ लोगों ने आशंका जताई है कि जेल में उनकी हत्या कर दी गयी है।
उधर, रावलपिंडी की अदियाला जेल के बाहर खान की तीन बहनें, उनकी पार्टी के कार्यकर्ता और खैबर पख़्तूनख़्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफ़रीदी डेरा डाले हुए हैं और शहबाज शरीफ सरकार पर दबाव डाल रहे हैं कि उनसे मिलने दिया जाये। इस बीच, शनिवार को इमरान की पार्टी के सीनेटर खुर्रम ज़ीशान ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री जीवित हैं। उन्होंने कहा कि खान को पाकिस्तान छोड़ने के लिए दबाव डालने की एक रणनीति के तौर पर उन्हें एकाकी कोठरी में रखा जा रहा है। इस दावे के पीछे उन्होंने तर्क दिया कि सत्तारूढ़ व्यवस्था को इमरान खान की लोकप्रियता से खतरा है। गौर हो कि पिछले दिनों कुछ सोशल मीडिया खबरों में दावा किया गया था कि खान की हत्या कर दी गयी है। इसके बाद पीटीआई के कार्यकर्ता सड़कों पर उतर गये। इस बीच, इमरान के बेटे कासिम खान ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ‘मेरे पिता 845 दिनों से गिरफ़्तार हैं। पिछले छह हफ़्तों से उन्हें मौत की कोठरी में एकांत कारावास में रखा गया है, जहां कोई पारदर्शिता नहीं है। फोन पर कोई बातचीत नहीं हुई, कोई मुलाकात नहीं हुई और उनके जीवित होने का कोई सबूत नहीं मिला। सरकार उनके जीवित होने का सबूत दे।’
उधर, जीशान ने कहा, ‘इमरान पर ज्यादती मानवाधिकारों का पूर्ण उल्लंघन है। ऐसा लगता है कि वे उन्हें किसी चीज़ के लिए मजबूर करने की कोशिश कर रहे हैं।’ उन्होंने आगे कहा, ‘वे (सरकार) इमरान खान के साथ एक समझौता करने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें देश छोड़ने के लिए कह रहे हैं। वे यहां तक वादा करते हैं कि अगर वह विदेश चले जाते हैं और अपनी पसंद की जगह पर चुप रहते हैं, तो उन्हें रियायतें मिलेंगी। लेकिन इमरान इसे कभी मंजूर
नहीं करेंगे।’

