पंजाब के अनेक जिले भीषण बाढ़ की चपेट में
पंजाब के अनेक जिले भीषण बाढ़ की चपेट में हैं। अधिकारियों ने यह जानकारी देते हुए बताया कि जिला प्रशासन के अनुरोध पर, सेना, सीमा सुरक्षा बल, भारतीय वायु सेना और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल ने संकट की स्थिति पर तुरंत प्रतिक्रिया दी है और बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल, पंजाब पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ मिलकर ये अभियान चला रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि अब तक बचाए गए लोगों में बुजुर्ग, बच्चे और गर्भवती महिलाएं शामिल हैं। उन्होंने बताया कि बृहस्पतिवार को अमृतसर जिला प्रशासन ने सेना की मदद से रामदास क्षेत्र के जलमग्न गांवों में फंसे बच्चों और बुजुर्गों सहित कई लोगों को निकाला। रावी नदी के बढ़ते जलस्तर से प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को बचाने के लिए वाहन एवं नावें तैनात की गईं हैं। पंजाब में भीषण बाढ़ की स्थिति देखी गई। कुछ लोगों का कहना है कि यह 1988 की बाढ़ की याद दिलाता है, जब सतलुज, व्यास और रावी नदियों के उफान ने इन नदियों के किनारे बसे गांवों एवं कृषि भूमि को जलमग्न कर दिया था।
पठानकोट में एक अलग अभियान में, भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टरों ने बाढ़ के तेज़ होने पर फंसे हुए 46 नागरिकों को सफलतापूर्वक निकाला। भारतीय वायुसेना के प्रवक्ता ने बताया कि स्थानीय समुदायों की सहायता के लिए 750 किलोग्राम से ज़्यादा आवश्यक राहत सामग्री हवाई मार्ग से गिराई गई। प्रवक्ता ने बताया कि एक बेहद अहम अभियान में, गंभीर रूप से प्रभावित डेरा बाबा नानक क्षेत्र से 38 सैन्यकर्मियों और 10 बीएसएफकर्मियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। अधिकारियों ने बताया कि पठानकोट में भी, वायुसेना ने बुधवार को माधोपुर बैराज के गेट खोलने के लिए तैनात 60 सिंचाई अधिकारियों को हवाई मार्ग से निकाला। बीएसएफ ने कहा कि उसने गुरदासपुर और फिरोजपुर ज़िलों के बाढ़ प्रभावित इलाकों में बचाव अभियान शुरू किया है। बीएसएफ ने यह भी बताया कि उसके जवानों ने फिरोजपुर जिले के धीरा गारा, निहाला लवेरा और सुल्तानवाला गांवों में बचाव अभियान चलाया और सतलुज नदी के बढ़ते जलस्तर से परेशान स्थानीय लोगों को बचाया। गुरदासपुर में, बीएसएफ की टीमों ने मकोरा और चकमकोडा गांवों में नावों की मदद से 70 ग्रामीणों को बचाया। बीएसएफ ने बताया कि फिरोजपुर के कालूवाला गांव में एक और बचाव अभियान चलाया गया, जहां 14 निवासियों को उफनती सतलुज नदी से निकाला गया।
चंडीगढ़-मनाली एनएच बंद, दो लोगों की मौत
मंडी(निस) : हिमाचल में चंडीगढ़-मनाली नेशनल हाईवे-03 फिर से यातायात के लिए बंद हो गया है। पंडोह से लेकर मनाली तक जगह-जगह भूस्खलन के कारण सड़क मार्ग अवरुद्ध है। बनाला में बड़ी पहाड़ी दरकी और ये राष्ट्रीय उच्च मार्ग पुनः यातायात के लिए बंद हो गया। इधर पंडोह डैम के नजदीक कैंची मोड़ के पास नेशनल हाईवे का एक हिस्सा पूरी तरह से धंस गया है। पैदल चलने के लिए भी रास्ता नहीं बचा है। बीती रात को क्षेत्र में हुई भारी बारिश के कारण हाईवे का एक बड़ा भाग पूरी तरह से जमींदोज हो गया। उधर कुल्लू मनाली में स्थिति बेहद चिंताजनक है। कुल्लू से आगे मनाली तक राष्ट्रीय उच्च मार्ग 20 जगह बह गया है जबकि 50 के आसपास घर और होटल बह गए हैं। यहां मोबाइल नेटवर्क बंद है। हजारों लोग फंसे हुए हैं। कुल्लू में एक ट्रक चालक की हृदयाघात से मौत जबकि बंजार निवासी एक महिला की अस्पताल समय पर न पहुंच पाने से रास्ते में मौत हो गई।
पौंग बांध का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर
धर्मशाला (निस) : कांगड़ा जिले में स्थित पौंग बांध का जलस्तर आज सुबह से अधिकतम स्वीकार्य सीमा 1,390 फीट से ऊपर बना हुआ है, जिससे निचले इलाकों में स्थिति गंभीर हो गई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान जलस्तर 1,393.61 फीट दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान से तीन फीट से अधिक है। बांध में सुबह 79,780 क्यूसेक पानी का प्रवाह दर्ज किया गया, जबकि अतिरिक्त पानी के प्रबंधन के लिए 94,845 क्यूसेक का बहिर्वाह जारी है। बीबीएमबी के अधिकारियों ने बताया कि जलाशय के जलस्तर को नियंत्रित करने के लिए उच्च निर्वहन स्तर बनाए रखा गया है, हालांकि अधिकतम स्तर से मामूली गिरावट ही दर्ज की गई है। उधर डीसी इंदौरा उपमंडल में प्रभावितों के लिए संचालित किए जा रहे तीन रिलीफ कैंप राहत तथा पुनर्वास के कार्यों में किसी भी स्तर पर कोताही नहीं बरतने के निर्देश दिए हैं।