Kedarnath Garbage Record : हिमालय की गोद में गंदगी की मार, केदारनाथ में 3 महीने में ही कचरे का रिकॉर्ड टूटा
केदारनाथ धाम में चालू यात्रा के शुरुआती तीन महीनों में ही जितना कचरा उत्पन्न हुआ है, वह 2022 की मात्रा को पार कर चुका है। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, इस कचरे का बड़ा हिस्सा बिना शोधित किए आधार शिविर के पास डाला गया है।
पर्यावरणविद अमित गुप्ता द्वारा दायर एक आरटीआई (सूचना का अधिकार) आवेदन के जवाब में नगर पंचायत केदारनाथ ने बताया कि मई से जुलाई 2025 के बीच इस हिमालयी धाम में कुल 17.6 मीट्रिक टन कचरा उत्पन्न हुआ। इसमें से केवल 7.1 मीट्रिक टन का पुनर्चक्रण हो सका जबकि 10.5 मीट्रिक टन कचरा बिना शोधन के फेंक दिया गया। आंकड़ों के अनुसार मई में 8.4 मीट्रिक टन, जून में 5.6 मीट्रिक टन और जुलाई में 3.6 मीट्रिक टन कचरा पैदा हुआ। इन महीनों में क्रमश: 3.2, 2.4 और 1.5 मीट्रिक टन कचरे का ही प्रसंस्करण हुआ।
शेष कचरे को आधार शिविर के पास बनाए गए नए ‘लैंडफिल' स्थल पर डाला गया, जिसकी क्षमता 1,500 फुट है। आंकड़ों के अनुसार 2022 में केदारनाथ में 13.85 मीट्रिक टन कचरा उत्पन्न हुआ। गुप्ता को पहले मिले आरटीआई जवाबों से पता चला था कि 2022 से 2024 के बीच धाम में कुल 72.53 मीट्रिक टन कचरा पैदा हुआ। इसमें से केवल 32 प्रतिशत का शोधन हो सका और शेष 68 प्रतिशत बिना शोधन के फेंक दिया गया। इन 3 वर्षों में केदारनाथ में 49.18 मीट्रिक टन जैविक और 23.35 मीट्रिक टन अजैविक कचरा जमा हुआ।
इसके बावजूद न तो कोई आधिकारिक शिकायत दर्ज हुई और न ही किसी पर जुर्माना लगाया गया। गुप्ता ने कहा कि केदारनाथ में समुचित कचरा शोधन सुविधा नहीं है, जिसके कारण भारी मात्रा में कचरा सीधे लैंडफिल में डाला जा रहा है। एकल-उपयोग प्लास्टिक पर प्रतिबंध का सख्ती से पालन कराने की आवश्यकता है। समुद्रतल से 3,584 मीटर की ऊंचाई पर स्थित केदारनाथ यात्रा के सबसे प्रमुख स्थलों में एक है।