‘हवेली’ महज हवेली वालों की
ग्रामीण भित्तिचित्रों से सजे विशाल प्रवेशद्वार, बाहर बिछी चारपाई, रोशनी में चमकते पीतल के बर्तन और हवा में फैली मक्खन लगे पराठों की खुशबू... हरियाणा और पंजाब के हाईवे से गुजरने वाला हर व्यक्ति इस नजारे से वाकिफ है। हम बात कर रहे है ‘हवेली’ रेस्टोरेंट की। ‘हवेली’ एक रेस्टोरेंट से कहीं बढ़कर हाईवे की यात्रा के अनुभव में वह पड़ाव है, जहां अतीत की यादें और उत्तर भारतीय भोजन एक ही छत के नीचे मिलता है। पिछले हफ्ते, यह पहचान हाईवे से उठकर अदालत तक पहुंच गई। दिल्ली हाईकोर्ट ने हवेली रेस्टोरेंट एंड रिसॉर्ट्स लिमिटेड को अंतरिम राहत देते हुए लुधियाना स्थित उस रेस्टोरेंट पर ‘हवेली’ नाम का इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी, जिसने खुद को ‘पंजाबी हवेली’ के रूप में रीब्रांड किया था। साथ ही, अदालत ने ‘हवेली’ ब्रांड की विशिष्ट देहाती थीम की नकल करने पर भी रोक लगा दी है।
जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा ने ‘हवेली’ के पक्ष में अंतरिम राहत देते हुए, पंजाबी हवेली को विवादित चिह्न का इस्तेमाल करने वाले सभी होर्डिंग, बोर्ड, विज्ञापन और सोशल मीडिया अकाउंट हटाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि दोनों प्रतिष्ठान रंग-रूप में एक जैसे दिखते हैं। इसे संयोग मानकर खारिज नहीं किया जा सकता था। उन्होंने कहा कि इससे पता चलता है कि लुधियाना के आउटलेट ने जानबूझकर ‘हवेली’ द्वारा दशकों से अर्जित की गई साख का फायदा उठाने की कोशिश की है।
इस विवाद की शुरुआत 2021 में हुई थी, जब दोनों पक्षों के बीच संभावित साझेदारी पर बातचीत हुई। बातचीत विफल रही, लेकिन कुछ ही समय बाद लुधियाना के इस रेस्टोरेंट ने अपना नाम बदलकर ‘पंजाबी हवेली’ रख लिया। मामला तब और बढ़ गया जब प्रतिद्वंद्वी ने ट्रेडमार्क पंजीकृत करने के लिए आवेदन कर दिया। अपने मुकदमे में, हवेली ने लुधियाना की कंपनी पर न केवल उसके नाम का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया, बल्कि उस माहौल को भी चुराने का आरोप लगाया, जो उसके प्रतिष्ठानों को अलग पहचान देता है।