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महाराष्ट्र में हिंदी विरोध पर ‘भरत मिलाप’

दो दशक बाद एक मंच पर आये ठाकरे बंधु
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मुंबई, 5 जुलाई (एजेंसी)

महाराष्ट्र की राजनीति में मराठी पहचान के नाम पर और हिंदी भाषा ‘थोपने’ के विरोध में ठाकरे बंधुओं का ‘भरत मिलाप’ हुआ है। शिवसेना (उबाठा) के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे करीब दो दशक बाद पहली बार शनिवार को राजनीतिक मंच पर एक साथ नजर आए। भाजपा नीत महाराष्ट्र सरकार द्वारा हिंदी भाषा संबंधी सरकारी आदेश (जीआर) वापस लिए जाने का जश्न मनाने के लिए वर्ली में आयोजित ‘विजय’ रैली को दोनों ने संबोधित किया। इस दौरान उद्धव ने आगामी नगर निकाय चुनाव साथ मिलकर लड़ने का संकेत दिया। तालियों की गड़गड़ाहट के बीच उन्होंने कहा, ‘हम एकजुट रहने के लिए एक साथ आए हैं। हम एक साथ मिलकर बीएमसी और महाराष्ट्र में सत्ता हासिल करेंगे।’

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इससे पहले राज ठाकरे ने चुटकी ली और कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दोनों चचेरे भाइयों को एक साथ लाकर वह काम कर दिया है, जो शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे और अन्य लोग नहीं कर सके।

चचेरे भाई के साथ मतभेदों के कारण शिवसेना छोड़ने के बाद राज ठाकरे ने वर्ष 2005 में मनसे का गठन किया था। इस अवधि के दौरान भाजपा ने महाराष्ट्र के राजनीतिक परिदृश्य में अपना विस्तार किया और 2022 में शिवसेना को विभाजित करने वाले एकनाथ शिंदे और अजित पवार नीत राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के साथ हाथ मिलाया। पिछले चार महीनों में ठाकरे बंधुओं के एकसाथ आने की अटकलें तेज हो गई थीं। माना जा रहा है कि दोनों चचेरे भाइयों के एक साथ आने से न केवल दोनों दलों के कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ेगा, बल्कि इससे दोनों दलों को भी संजीवनी मिल

सकती है।

विजय नहीं, रुदाली दर्शन थी रैली : फडणवीस

पंढरपुर (एजेंसी) : महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते हुए कहा, ‘यह रैली विजय उत्सव नहीं, बल्कि ‘रुदाली’ दर्शन थी। कार्यक्रम में मराठी के बारे में एक शब्द भी नहीं बोला गया। उद्धव का भाषण इस बात पर केंद्रित था कि कैसे उनकी सरकार गिराई गई और कैसे वह दोबारा सत्ता हासिल कर सकते हैं।’

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