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बराड़ा के खेतों में जलभराव से फसलें बर्बाद, सीएम दरबार पहुंचा मामला

पहाड़ों से आ रहा पानी जहां बराड़ा रिहायशी क्षेत्र में अपना प्रकोप दिखा रहा है, वहीं यह बराड़ा से होकर आगे गांवों में फसलों को तबाह कर रहा है। खेतों में जलभराव का यह मामला अब मुख्यमंत्री के दरबार में...
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मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात करने पहुंचे बराड़ा के किसान। -निस
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पहाड़ों से आ रहा पानी जहां बराड़ा रिहायशी क्षेत्र में अपना प्रकोप दिखा रहा है, वहीं यह बराड़ा से होकर आगे गांवों में फसलों को तबाह कर रहा है। खेतों में जलभराव का यह मामला अब मुख्यमंत्री के दरबार में पहुंच गया है। बृहस्पतिवार को कई गांवों के दर्जनों किसान अपना दुखड़ा सुनाने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और कैबिनेट मंत्री कृष्ण बेदी के पास पहुंचे। गांव राजोखेड़ी निवासी करमजीत सिंह सैनी ने बताया कि बराड़ा में बाहर से आने वाला पानी मौजगढ़ के रास्ते रेलवे लाइन के नीचे से होता हुआ सज्जन माजरी में जा रहा है। यहां से सड़क पर बनी दो पुलियों के नीचे से पानी तेजगति से दादुपुर होता हुआ राजोखेड़ी, सुभरी और उगाला में जा रहा है। पानी का बहाव इतना तेज है कि इन गांवों के खेतों में पानी पूरी तरह भर चुका हैै। जिससे फसलें जलमग्न हो गई हैं।

उन्होंने इस संबंध में प्रशासन से कई बार गुहार लगाई। सभी गांवों के किसान मिलकर बराड़ा एसडीएम से मिले थे और उन्हें मुख्यमंत्री के नाम मांगपत्र भी दिया था। जब कहीं सुनवाई नहीं हुई तो वह मुख्यमंत्री नायब सैनी और कृष्ण बेदी से मिले, जहां मुख्यमंत्री व कैबिनेट मंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया कि नहरी विभाग के उच्चाधिकारियों से उनकी मीटिंग कराई जाएगी और नाले को दोबारा खुलवाने के आदेश दिए जाएंगे।

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इस अवसर पर करमबीर सिंह राजाखेड़ी, जयमल सिंह, जरनैल सिंह, करनैल सिंह, जसविंदर सिंह, जसवंत सिंह सुभरी, सुशील सैनी, बलदेव सिंह, सुरजन सिंह राजोखेड़ी, गुरचरण सिंह, गुलाब सिंह रामदत्त, सुरेश पाल सुभरी आदि किसान मौजूद थे।

बैतन नाला बंद होने से बढ़ी समस्या

किसान कर्मजीत सैनी ने बताया कि क्षेत्र की पानी निकासी के लिए नदीनुमा एक बड़ा नाला था जो साढौरा की तरफ से आता था और बराड़ा शहर, मौजगढ़, राजोखेड़ी, सुभरी, उगाला, अब्दुल्लागढ़ होते हुए कुरूक्षेत्र जिले के गांवों में चला जाता था। वर्ष 1965-66 में इस नाले को बंद कर दिया गया। इसके कारण आज इन गांवों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। बराड़ा के जिन गांवों में यह नाला अभी बचा है, उन गांवों का रिकॉर्ड तहसील में उपलब्ध है। गांव सिंबला के लोगों ने उन्हें अपने गांव से गुजर रहे इस नाले का नक्शा मुहैया करवाया है। वहीं बराड़ा शहर और अन्य क्षेत्र का नक्शा उनके पास है।

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