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पाइप लाइन से राजस्थान जाएगा हथिनी कुंड बैराज का पानी

चंडीगढ़, 1 दिसंबर (ट्रिन्यू) केंद्र की मोदी सरकार भी हरियाणा और राजस्थान के बीच नहरी पानी की आपूर्ति को लेकर हुए एमओयू से सहमत है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के पास भी इस एमओयू की कॉपी है। इतना ही नहीं,...
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चंडीगढ़, 1 दिसंबर (ट्रिन्यू)

केंद्र की मोदी सरकार भी हरियाणा और राजस्थान के बीच नहरी पानी की आपूर्ति को लेकर हुए एमओयू से सहमत है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के पास भी इस एमओयू की कॉपी है। इतना ही नहीं, अब दोनों राज्य राजस्थान तक पाइप लाइन के जरिये हथनी कुंड बैराज से पानी पहुंचाने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करेंगे। केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने लोकसभा में सीकर सांसद अमरा राम के सवाल के जवाब में इसका खुलासा किया।

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इसमें रोचक पहलू यह है कि कांग्रेस में रहते हुए उस समय तोशाम विधायक किरण चौधरी ने दोनों राज्यों के बीच हुए एमओयू का विरोध किया था। उन्होंने यमुना का पानी दक्षिण हरियाणा तक पहुंचाने की मांग की थी। लोकसभा चुनावों के बाद किरण चौधरी अपनी बेटी श्रुति चौधरी सहित कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गईं। अब किरण भाजपा की राज्यसभा सांसद हैं और उनकी बेटी श्रुति चौधरी नायब मंत्रिमंडल में सिंचाई मंत्री हैं। ऐसे में कह सकते हैं कि मां ने जिस परियोजना का विरोध किया था, अब उसे सिरे चढ़ाने की जिम्मेदारी बेटी के हाथों में हैं।

हालांकि, राजस्थान को बारिश के दिनों में तभी पानी की आपूर्ति होगी, जब हरियाणा अपने हिस्से और जरूरत के हिसाब के पानी का इस्तेमाल कर लेगा। पूर्व की मनोहर सरकार के समय यह परियोजना तैयार की गई थी। उस समय दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की मौजूदगी में इस परियोजना से जुड़े एमओयू पर साइन हुए थे। अमरा राम ने यमुना नदी के जल बंटवारे को लेकर सवाल उठाया था। दरअसल, यमुना नदी के जल का वार्षिक बंटवारा हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश व नयी दिल्ली के बीच किया हुआ है। केंद्रीय मंत्री की ओर से संसद में रखी गई रिपोर्ट के हिसाब से पिछले साल कुल 11.983 बीसीएम यानी बिलियन क्यूबिक मीटर पानी इन राज्यों को मिला। इनमें सबसे अधिक 5.730 बीसीएम पानी हरियाणा के हिस्से में आया।

इसी तरह, उत्तर प्रदेश को 4.032, राजस्थान को 1.119, हिमाचल प्रदेश को 0.378 तथा नई दिल्ली को 0.724 बीसीएम पानी मिला। केंद्रीय मंत्री ने वार्षिक जल आवंटन के साथ-साथ जुलाई से अक्तूबर, नवंबर से फरवरी तथा मार्च से जून यानी तिमाही के हिसाब से हुए जल वितरण का डाटा भी संसद में पेश किया। बेसिन राज्यों- उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और नयी दिल्ली में यमुना नदी के ओखला तक सतही प्रवाह के आवंटन को लेकर 12 मई, 1994 को एमओयू हुआ था।

2001 में उत्तराखंड को भी बेसिन राज्यों में शामिल किया गया।

पहले दिल्ली को मिलता है पानी : समझौते के तहत सबसे पहले दिल्ली के पानी की आपूर्ति पूरी की जा जाती है। इसके बाद शेष जल हरियाणा, उत्तर प्रदेश व राजस्थान को मिलता है। हालांकि, जलापूर्ति प्रणाली की सीमित क्षमता होने की वजह से उत्तर प्रदेश और राजस्थान जल के अपने पूर्ण आवंटित हिस्से का उपयोग करने में सक्षम नहीं हैं। इसीलिए राजस्थान ने हरियाणा के साथ एमओयू किया ताकि पाइप लाइन के जरिये अपने हिस्से का पानी हासिल किया जा सके।

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