Unified Pension Scheme : हरियाणा में यूपीएस लागू... 1 अगस्त से यूनिफाइड पेंशन स्कीम का विकल्प चुन सकेंगे कर्मचारी
दिनेश भारद्वाज
ट्रिब्यून न्यूज सर्विस
चंडीगढ़, 8 जुलाई।
हरियाणा की नायब सरकार ने कर्मचारियों को केंद्र की तर्ज पर यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) का लाभ देने को हरी झंडी दे दी है। पिछले दिनों हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में यूपीएस लागू करने का निर्णय लिया था। मंगलवार को सरकार ने इस संदर्भ में नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। प्रदेश के कर्मचारी पहली अगस्त से यूपीएस का विकल्प चुन सकेंगे। इस नोटिफिकेशन के बाद तय हो गया है कि ओल्ड पेंशन स्कीम (ओपीएस) को लेकर सरकार का कोई विचार नहीं है।
हालांकि विपक्षी दलों के अलावा कर्मचारी संगठनों द्वारा पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने की मांग की जा रही है। इस बार के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने सत्ता में आने के बाद ओपीएस लागू करने का वादा भी किया था। हालांकि केंद्र की मोदी सरकार ओपीएस की मांग को खारिज करते हुए न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस) के साथ यूपीएस लागू करने का ऐलान कर चुकी है। कर्मचारियों के पास अब दोनों पेंशन योजनाओं के विकल्प हैं।
हरियाणा में यूपीएस लागू होने के बाद भी कर्मचारियों के पास यह विकल्प रहेगा कि वे एनपीएस में रहना चाहेंगे तो वहां रह सकते हैं। अगर वे यूपीएस को एडॉप्ट करना चाहते हैं तो इसके लिए पहली अगस्त से वे अपना विकल्प चुन सकेंगे। फिलहाल यह फैसला केवल सरकारी विभागों के अधिकारियों व कर्मचारियों पर ही लागू होगा। बोर्ड-निगमों, यूनिवर्सिटी व सार्वजनिक उपक्रमों के अधिकारियों व कर्मचारियों को अभी यूपीएस के लिए इंतजार करना पड़ेगा।
25 वर्ष की सर्विस पर पेंशन
यूपीएस को लेकर मुख्य सचिव व वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने नोटिफिकेशन जारी किया है। इसके तहत सभी कर्मचारियों को सुनिश्चित पेंशन, पारिवारिक पेंशन और सुनिश्चित न्यूनतम पेंशन का लाभ मिल सकेगा। पेंशन का लाभ सबसे अधिक उन कर्मचारियों को होगा, जो 25 वर्ष या इससे अधिक की सर्विस पूरी करेंगे। 25 वर्ष की सर्विस के बाद कर्मचारियों को रिटायरमेंट के आखिरी 12 माह के औसत मूल वेतन का 50 प्रतिशत पैसा बतौर पेंशन मिलेगा।
न्यूनतम पेंशन 10 हजार तय
स्कीम में 10 हजार रुपये न्यूनतम पेंशन तय की गई है। 10 वर्ष या इससे अधिक (25 वर्ष से कम) की सर्विस के बाद सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को कम से कम 10 हजार रुपये मासिक पेंशन मिलेगी। पेंशनभोगी की मृत्यु की स्थिति में परिवार को अंतिम पेंशन राशि का 60 प्रतिशत मिल सकेगा। यह महंगाई राहत सुनिश्चित पेंशन भुगतान और पारिवारिक पेंशन दोनों पर लागू होगी। इसकी गणना सेवारत कर्मचारियों पर लागू महंगाई भत्ते के समान ही की जाएगी। महंगाई राहत केवल तभी देय होगी, जब पेंशन भुगतान शुरू हो जाएगा।
संशोधन की भी मांग
बेशक, कर्मचारी संगठनों की ओर से यूपीएस का विरोध किया जा रहा है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि उनकी मांग के बिना ही सरकार यूपीएस कर्मचारियों पर थोंप रही है। वहीं अंदरखाने यूपीएस को लेकर राजी कर्मचारियों की मांग है कि सरकार को इसके नियमों में बदलाव करना चाहिए। कर्मचारियों की दलील है कि जब प्रदेश में सरकारी नौकरियों में सामान्य वर्ग के लोग 42 वर्ष की उम्र तक आवेदन कर सकते हैं तो ऐसे में 25 वर्ष की सर्विस के बाद मूल वेतन की 50 प्रतिशत पेंशन का नियम गलत है। ओपीएस की तर्ज पर यूपीएस में भी 20 साल की सर्विस के बाद पूरी पेंशन का लाभ दिया जाना चाहिए।
18.5 प्रतिशत योगदान देगी सरकार
न्यू पेंशन स्कीम में कर्मचारी दस प्रतिशत अंशदान करते हैं। वहीं राज्य सरकार 14 प्रतिशत शेयर देती है। वहीं यूनिफाइड पेंशन स्कीम में सरकार का शेयर बढ़कर 18.5 प्रतिशत हो जाएगा। एकीकृत पेंशन योजना के तहत कोष में दो निधियां शामिल होंगी। एक व्यक्तिगत कोष जिसमें कर्मचारी अंशदान और हरियाणा सरकार से प्राप्त योगदान शामिल होगा, जो हरियाणा सरकार से अतिरिक्त योगदान द्वारा वित्त पोषित एक पूल कार्पस फंड के रूप में संचालित होगा। योजना के तहत कर्मचारी अपने (मूल वेतन महंगाई भत्ते) का दस प्रतिशत योगदान देंगे, जिसमें हरियाणा सरकार से मिला बराबर योगदान होगा। दोनों राशियां प्रत्येक कर्मचारी के व्यक्तिगत कोष में जमा की जाएंगी।