अनियंत्रित कार गौंछी ड्रेन में गिरी, तीन युवकों की मौत
फरीदाबाद की गौंछी ड्रेन एक बार फिर मौत का सबब बन गई। बीती रात मछली मार्केट के पास एक अनियंत्रित कार सीधे ड्रेन में जा गिरी, जिसमें सवार तीनों युवकों की डूबकर दर्दनाक मौत हो गई। मृतकों की पहचान पवन मौर्य, अमित झा और गौरव रावत (उम्र लगभग 40 वर्ष) के रूप में हुई है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसा रात करीब 10:40 बजे हुआ। कार मछली मार्केट से संजय कॉलोनी की ओर मुड़ रही थी, तभी चालक का संतुलन बिगड़ गया और गाड़ी पुलिया से सीधी ड्रेन में जा धंसी। चीख-पुकार सुनकर स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और रस्सियों की मदद से करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद तीनों को बाहर निकाला। तुरंत एंबुलेंस से बादशाह खान अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
हादसे की जानकारी मिलते ही जिला कांग्रेस अध्यक्ष बलजीत कौशिक मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रशासन को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि ड्रेन पर पहले लगी सुरक्षा जाली नगर निगम ने हटा दी थी और उसे दोबारा नहीं लगाया गया। यदि जाली होती तो यह त्रासदी टल सकती थी। उन्होंने मांग की कि मृतकों के परिजनों को 50-50 लाख रुपये मुआवजा दिया जाए और दोषी अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाए। कौशिक ने सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जब यह हृदयविदारक हादसा हुआ, उसी समय मुख्यमंत्री और राज्यपाल फरीदाबाद में मौजूद थे, लेकिन किसी अधिकारी ने घटनास्थल का दौरा करना जरूरी नहीं समझा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार अब केवल इवेंट्स तक सीमित हो गई है और जनता की समस्याओं से उसका कोई सरोकार नहीं है।
लगातार हादसों के बावजूद गौंछी ड्रेन पर सुरक्षा इंतजाम न होना लोगों के गुस्से का कारण बन गया है। तीन परिवारों के चिराग बुझने के बाद अब प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। यह हादसा न केवल लापरवाही को उजागर करता है बल्कि यह भी दिखाता है कि फरीदाबाद जैसे बड़े औद्योगिक शहर में आम लोगों की जान की कीमत कितनी सस्ती समझी जाती है।
पहले भी हो चुके हादसे
यह कोई पहला मामला नहीं है जब गौंछी ड्रेन ने किसी की जिंदगी छीनी हो। इसी वर्ष मार्च में मोहम्मद आजाद नामक युवक स्कूटी समेत इसी नाले में गिरकर अपनी जान गंवा चुका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर निगम ने सफाई के दौरान जाली हटाई थी, लेकिन उसे दोबारा नहीं लगाया गया। उनका कहना है कि यदि समय रहते जाली लगा दी जाती तो तीन घर उजड़ने से बच सकते थे।