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चमेलीवन मंदिर में बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या

होडल, 5 जुलाई (निस) समीपवर्ती भुलवाना गांव स्थित चमेलीवन मंदिर व यहां पर मौजूद अंजनी कुंड़ के साथ प्राचीन व ऐतहासिक,धार्मिक यादें जुड़ी होने के कारण प्रत्येक मंगलवार तथा शनिवार को यहां पर हजारों की संख्या में भक्तजन दर्शन करने...
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होडल, 5 जुलाई (निस)

समीपवर्ती भुलवाना गांव स्थित चमेलीवन मंदिर व यहां पर मौजूद अंजनी कुंड़ के साथ प्राचीन व ऐतहासिक,धार्मिक यादें जुड़ी होने के कारण प्रत्येक मंगलवार तथा शनिवार को यहां पर हजारों की संख्या में भक्तजन दर्शन करने के लिए आते हैं तथा दिन प्रतिदिन भक्तजनों की संख्या लगाातर बड़ती जा रही है। ब्रज क्षेत्रावासियों के अनुसार मंदिर में पहले काफी संख्या में बंदर, हिरण, खरगोश, आदी जानवर रहते थे। भगवान कृष्ण अक्सर अपनी गोपिकाओं व गवालों के साथ यहां पर गायों को चराने के लिए आते थे। एक दिन भगवान को गाय चराते हुए रात हो गई व मैया यशोदा उनको तलाश करते हुए चमेलीवन में आ गईं। माता को आता देख कर भगवान कृष्ण ने यहां पर स्थित कुंड में छलांग लगा दी थी।

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यहां वे हनुमान के वेश में प्रकट हुए तथा माता यशोदा ने उनकी हनुमान के रूप में पूजा अर्चना की। उस दिन से इस कुंंड का नाम अंजनि कुंड रख दिया गया। इस कुंड़ में से प्रगट हुई भगवान हनुमान की प्रतिमा को यहां पर स्थापति करके मंदिर का निर्माण कर दिया गया। इस अंजनि कुंड का वर्णन ब्रज भक्ति विलास नामक ग्रंथ में भी आता है। इसके अलावा घाटों का निर्माण, पशुओं के पीने के पानी, कुुंड़ में जाने के पक्के रास्ते का निर्माण करके इसका सौंदर्यीकरण किया गया है। मंदिर के महन्त घनश्याम वशिष्ठ उर्फ कान्हा भैया का कहना है की मंदिर में प्रत्येक शनिवार व मंगलवार को हनुमान की प्रतिमा पर चोला चढ़ाया जाता है। यहां पर इसकी मान्यता के कारण लगातार दो माह तक चोला बुक रहता है तथा भक्तजनों द्वारा अपने चोले की एड़वांस बुकिंग कराई जाती है। उन्होंने कहा कि यहां पर आने वाले प्रत्येक भक्तजन की मनोकामना पूर्ण होने के कारण ही दिन प्रतिदिन इसकी मान्यता बढ़ती जा रही है।

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