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गुरुग्राम विवि और सीएसआईआर-निस्पर के संयुक्त तत्वावधान में अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित

गुरुग्राम, 13 नवंबर (हप्र) गुरुग्राम विश्वविद्यालय और सीएसआईआर-राष्ट्रीय विज्ञान संचार एवं नीति अनुसंधान संस्थान (निस्पर) के संयुक्त तत्वाधान में 13 नवंबर को विवि. के सभागार में ‘पारंपरिक ज्ञान के संचार और प्रसार’ पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (सीडीटीके-2024) आयोजित किया गया। सम्मेलन...
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गुरुग्राम विश्वविद्यालय और सीएसआईआर-निस्पर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में हिंदी और पंजाबी भाषाओं में लिखित ‘भारतीय परंपराओं का खजाना और सार’ पुस्तक का विमोचन करते आयोजक।- हप्र
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गुरुग्राम, 13 नवंबर (हप्र)

गुरुग्राम विश्वविद्यालय और सीएसआईआर-राष्ट्रीय विज्ञान संचार एवं नीति अनुसंधान संस्थान (निस्पर) के संयुक्त तत्वाधान में 13 नवंबर को विवि. के सभागार में ‘पारंपरिक ज्ञान के संचार और प्रसार’ पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (सीडीटीके-2024) आयोजित किया गया। सम्मेलन की शुरुआत अतिथियों द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन करके की गयी। गुरुग्राम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर दिनेश कुमार ने स्वागत भाषण में भारतीय सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक दुनिया की आवश्यकताओं के अनुसार उनके अनुकूलन पर केंद्रित चर्चाओं और विचार-विमर्श के बारे में अपनी उत्सुकता व्यक्त की। अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में सार पुस्तक और हिंदी और पंजाबी भाषाओं में लिखित ‘भारतीय परंपराओं का खजाना और सार’ पुस्तक का विमोचन भी हुआ।

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अपने संबोधन में विशिष्ठ अतिथि सीएसआईआर-निस्पर, नयी दिल्ली की निदेशक, प्रो. रंजना अग्रवाल ने स्वस्तिक (वैज्ञानिक रूप से मान्य पारंपरिक ज्ञान) के बारे में बताया। दक्षिण एशियाई विश्वविद्यालय, नई दिल्ली (भारत) के अध्यक्ष प्रोफेसर के. के. अग्रवाल ने मुख्य अतिथि के रूप में उद्घाटन सत्र को संबोधित किया और अंतःविषय अनुसंधान और सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। मुख्य व्याख्यान डॉ. शेखर सी. मांडे, विशिष्ट प्रोफेसर, सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय और पूर्व महानिदेशक सीएसआईआर द्वारा दिया गया।

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