गांवों में फसलें, शहर में सड़कें बर्बाद
मानसून की बारिश अब किसानों के लिए आफत बनने लगी है। शुक्रवार को हुई बारिश के बाद खेतों में जलभराव हो गया है। जिले में एक हजार एकड़ में धान की फसल बरसाती पानी में डूब गई है, कपास की फसल और पशुओं के हरे चारे की फसल बर्बाद हो गई हैं। लगातार हो रही और भारी बारिश के कारण किसानों के सबमर्सिबल व ट्यूबवैल जमीन में धंस गए हैं। आगामी दिनों में और बारिश का अलर्ट जारी किया गया है, ऐसे में किसानों की समस्या और ज्यादा बढ़ सकती है। कई गांवों के किसान शुक्रवार को डीसी से मिले और पानी निकासी की मांग की। जिले के पिल्लूखेड़ा क्षेत्र के गांव मोरखी, भिड़ताना, भंभेवा, मालश्रीखेड़ा, लुदाना, ललितखेड़ा, धड़ौली, जुलाना के निडाना, शामलो कलां, शामलो खुर्द, गोसाई खेड़ा, बुआना समेत 20 से ज्यादा गांवों में इस समय खेतों में खड़ी फसल बरसाती पानी में डूब चुकी है। चार से पांच फीट तक भरे पानी के कारण कपास की फसल खराब होने लगी है। जलभराव के बाद धान की फसल ऊपर से पांच से छह इंच ही दिख रही है। पानी में डूबी फसल में ही किसान खाद डालने पर मजबूर हो रहे हैं। ज्वार समेत पशुओं का चारा भी खराब हो चुका है। बारिश का सीजन शुरु होने से पहले जिला स्तर पर बरसाती पानी की निकासी के लिए योजना तैयार की गई थी। ड्रेनों की साफ-सफाई पर लाखों रुपये खर्च किए गए। मानसून सीजन में जैसे ही बारिश हुई, तो अधिकारियों के दावों तथा तामझाम को हिला कर रख दिया है। जिसके चलते गांवों के खेतों में बरसाती पानी जमा हो गया है। बरसात ने जींद शहर की पहले से बेहद खराब सड़कों का हाल और भी खराब कर दिया है। बारिश ने शहर में कई सड़कों को वाहनों के चलने लायक नहीं छोड़ा है। एसपी निवास से परशुराम चौक जाने वाली जो सड़क कुछ समय पहले 3 करोड़ से बनी थी, वह पूरी तरह टूट कर वाहनों के लिए बंद हो गई है। सड़क निर्माण पर खर्च हुई 3 करोड़ की राशि पर बारिश ने पानी फेर दिया है। इस सड़क के निर्माण के समय ही यहां के लोगों ने इसकी निर्माण क्वालिटी पर सवाल उठाए थे। इसी तरह सफीदों रोड, रोहतक रोड, रेलवे जंक्शन से लालपुर कलां जाने वाली हाल ही में बनी सड़क भी बारिश में टूट गई हैं। इन सड़कों से निकलना अब बेहद मुश्किल और खतरों से खाली नहीं रह गया है। टूटी सड़कों में बने बहुत गहरे गड्ढों में बरसाती पानी भरने से कई दुपहिया वाहन और कार क्षतिग्रस्त हो चुके हैं।