Tribune
PT
About the Dainik Tribune Code Of Ethics Advertise with us Classifieds Download App
search-icon-img
Advertisement

गर्भस्थ शिशु की सफल सर्जरी कर अमृता अस्पताल ने दी नई जिंदगी

गर्भ में पल रहे शिशुओं को अमृता अस्पताल में नई  जिंदगी मिली है, हाई.रिस्क और पहली बार की गई जटिल सर्जरी के जरिये कई गर्भस्थ शिशुओं का बचाया गया। एक परिवार के लिए दुख की शुरुआत गर्भावस्था के 23वें हफ्ते...
  • fb
  • twitter
  • whatsapp
  • whatsapp
featured-img featured-img
फरीदाबाद में सफल सर्जरी के बाद शिशुओं और माताओं के साथ मौजूद डॉ रीमा भट्ट और अमृता अस्पताल की टीम। - हप्र
Advertisement

गर्भ में पल रहे शिशुओं को अमृता अस्पताल में नई  जिंदगी मिली है, हाई.रिस्क और पहली बार की गई जटिल सर्जरी के जरिये कई गर्भस्थ शिशुओं का बचाया गया। एक परिवार के लिए दुख की शुरुआत गर्भावस्था के 23वें हफ्ते में हुई, जब डॉक्टरों ने पाया कि बच्चे के फेफड़ों के चारों ओर भारी मात्रा में तरल जमा है। 28वें हफ्ते तक बच्चा हाइड्रॉप्स फीटेलिस नामक खतरनाक स्थिति में पहुंच गया, जो अक्सर प्रसव से पहले ही घातक सिद्ध होती है। डॉ. रीमा भट्ट, हेड ऑफ फेटल मेडिसिन ने गर्भ के भीतर ही थोरेको.एम्नियोटिक शंट सर्जरी का निर्णय लिया। बारीक ट्यूब के जरिये बच्चे के फेफड़ों से तरल निकाला गया। 30वें हफ्ते में इमरजेंसी डिलीवरी करनी पड़ी। 1.8 किलो वजनी यह नन्हा शिशु पैदा हुआ। तुरंत वेंटिलेटर पर रखा गया और डॉ. निधि गुप्ता सीनियर कंसल्टेंट नियोनेटोलॉजी के नेतृत्व में एनआईसीयू में भर्ती किया गया।

सात हफ्ते गहन चिकित्सा से गुजऱे। बच्चे को छाती में ड्रेन्स लगाए गए, ऑक्ट्रीओटाइड इंजेक्शन दिए गए और विशेष डाइट दी गई। धीरे-धीरे फेफड़े ठीक होने लगे। डॉक्टरों ने इसे दुर्लभ जीत बताया, क्योंकि जन्मजात चाइलोथोरैक्स की वैश्विक जीवित रहने की दर मुश्किल से 50 प्रतिशत है। 38 वर्षीय महिला को 17 साल आईवीएफ तकनीक मातृत्व सुख की प्राप्ति हुई। डॉ. रीमा भट्ट ने कहा। हर अजन्मे शिशु को एक मौका मिलना चाहिए।

Advertisement

Advertisement
×