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जिम्मेदारी के अहसास से बढ़ती है त्योहारी मौसम की रंगत

भारत में फेस्टिव सीजन उल्लास और उमंग से भरपूर होता है, लेकिन इसके साथ कुछ कानूनी सीमाएं भी जुड़ी होती हैं। नाच-गाना, डीजे, जुलूस, पंडाल, विसर्जन या सार्वजनिक कार्यक्रम—हर गतिविधि के लिए नियम कानून तय हैं, जिनका पालन आवश्यक है।...
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भारत में फेस्टिव सीजन उल्लास और उमंग से भरपूर होता है, लेकिन इसके साथ कुछ कानूनी सीमाएं भी जुड़ी होती हैं। नाच-गाना, डीजे, जुलूस, पंडाल, विसर्जन या सार्वजनिक कार्यक्रम—हर गतिविधि के लिए नियम कानून तय हैं, जिनका पालन आवश्यक है।

भारत में फेस्टिव सीजन की असली शुरुआत गणेश उत्सव से होती है। इसके बाद नवरात्रि, दुर्गापूजा, दिवाली, छठ, क्रिसमस और नये साल तक नियमित रूप से उत्सवी माहौल बना रहता है। उत्सवधर्मी भारतीय लोग इस फेस्टिव सीजन के दौरान खूब नाचते, गाते हैं, जुलूस निकालते हैं, डीजे में हंगामा करते हैं, पंडाल लगाते हैं और मेलों का रंग हम सबके सिर पर चढ़कर बोलता है। लेकिन मस्ती के इस माहौल में कुछ कानूनी लक्ष्मण रेखाएं भी होती हैं। हमें याद रखना चाहिए कि उन लक्ष्मणरेखाओं को नहीं लांघना वर्ना कई तरह की परेशानियों, मुसीबतों से दो-चार होना पड़ता हैं।

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जिम्मेदारी के साथ उत्सव

यह सही बात है कि गणपति उत्सव के दौरान महाराष्ट्र में राज्य सरकार अधिसूचना देकर रात 12 बजे तक डीजे चलाने की अनुमति देती है। यही छूट पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान और गुजरात में नवरात्रि के समय गरबा, डांडिया आदि के लिए छूट मिलती है। कई बार विशेष उत्सव आयोजनों के लिए स्थानीय थाने, एसडीएम ऑफिस या नगर निगम से ऐसे मौकों के लिए विशेष पुलिस अनुमति लेनी पड़ती है, तब नियमित रात्रिकालीन छूट मिल जाती है। लेकिन इन सारे विशेष मौकों को छोड़कर नॉयज पॉल्यूशन (रेगुलेशन एंड कंट्रोल) रूल्स-2000 के तहत रात 10 बजे के बाद सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर या डीजे बजाना प्रतिबंधित होता है। साथ ही दिन में भी डीजे की ध्वनि सीमा 55 डेसिबल और रात के लिए 45 डेसिबल (आवासीय क्षेत्र) की अनुमति होती है। इसका उल्लंघन करने पर आप पर भारी-भरकम जुर्माना थोपा जा सकता है। पार्टी या उत्सव आयोजन में मौजूद सामान की जब्ती हो सकती है। एफआईआर की जा सकती है। अगर आपका यह आयोजन सड़क या सार्वजनिक मार्ग को बिना अनुमति रोककर किया जा रहा है, तो कानूनन सार्वजनिक उपद्रव और अपराध माना जाता है। जहां तक त्योहारी मौसम का सवाल है तो इस मौसम में 15 दिन तक लाउडस्पीकर लगाने और डीजे की ध्वनि सीमा पर छूट होती है। लेकिन छूट का मतलब यह नहीं है कि पूरी रात बिना किसी सीमा के आप बजा सकते हैं। त्योहार के मौसम पर और छूट के समय भी ध्वनि सीमा सामान्य रहनी चाहिए। अगर नियम टूटा तो आपका डीजे और लाउडस्पीकर पुलिस जब्त कर सकते हैं। आयोजकों पर पुलिस थाने में एफआइआर दर्ज करायी जायेगी और जुर्माना क्या लगेगा, यह एसडीएम तय करेगा।

उत्सवप्रियता और सावधानी

मस्ती में कहीं भी नाचने लग जाना, आपकी उत्सवप्रियता और स्वभाव हो सकता है, लेकिन कानून की नजर में इसकी छूट नहीं है। भले कुछ मौकों पर इसकी थोड़ी बहुत छूट मिलती हो, लेकिन इसके लिए आपको पुलिस थाने, एसडीएम ऑफिस या कार्पोरेशन ऑफिस से जुलूस या आयोजन के पहले ही परमिशन लेनी होती है। बिना अनुमति अगर आप सड़क रोककर नाचे, गाये, तो न केवल आपका बैंडबाजा जब्त हो जायेगा बल्कि पुलिस थाने में आपके विरुद्ध सार्वजनिक उपद्रव के लिए कार्रवाई होगी। यह ठीक है कि विशेष त्योहारी मौकों पर सार्वजनिक स्थानों पर पंडाल लगाने की पुलिस या नगर पालिका छूट देती है। लेकिन आपके पास वह छूट उस समय मौजूद होनी चाहिए, जब आपको आपकी गतिविधियों के लिए कानूनी कार्रवाई के दायरे में लाया जा रहा हो। एक यह बात भी समझ लें कि आपको ये छूट तभी मिलती है, जब आपके आयोजन स्थल के पास, पास से गुजरने का कोई वैकल्पिक मार्ग भी हो। इसलिए कोई उत्सव आयोजन के पहले इस बात को ध्यान में रखें। एक बात यह भी ध्यान रखने की होती है कि अग्निशमन का भी रास्ता अवरुद्ध नहीं होना चाहिए।

पंडाल और मंडप की सुरक्षा

पंडाल लगाने के लिए नगर निगम, स्थानीय पुलिस, फायर डिपार्टमेंट से न केवल एनओसी लेना जरूरी होता है बल्कि बिजली और सजावट, फायर सेफ्टी के स्टैंडर्ड के मुताबिक ही होना चाहिए। कोई हादसा हो जाने पर आयोजकों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जायेगा। गौरतलब है कि शादी या निजी कार्यक्रम के लिए भी यदि सार्वजनिक स्थल का इस्तेमाल हो रहा है तो यही नियम लागू होते हैं। याद रखें त्योहारों पर आतिशबाजी की थोड़ी छूट तो होती है, लेकिन ग्रीन क्रेकर्स का नियम लागू होता है।

सार्वजनिक स्थल में मद्यनिषेध

यह तो आपको पता ही है कि सार्वजनिक स्थल में शराब पीना, परोसना व पिलाना मना होता है। साथ ही नशे में हुड़दंग करना, अश्लील हरकतें करना या डांस करना भी अपराध माना जाता है। साथ ही इसके लिए भारी जुर्माना, जेल और लाइसेंस निलंबन की भी सजा होती है। आप इसके लिए किसी तरह के अपने फंक्शन या आयोजन आदि के नाम पर छूट नहीं ले सकते। याद रखिए, किसी भी तरह से इसकी छूट नहीं दी जाती।

भीड़ एवं विसर्जन के नियम

अगर आप किसी सार्वजनिक उत्सव का आयोजन करते हैं, तो इस उत्सव के आयोजकों की यह जिम्मेदारी होगी कि वे आयोजन स्थल में किसी तरह के साम्प्रदायिक नारे, भड़ाकाऊ भाषण या अश्लील गाने की छूट नहीं देंगे। इन जगहों पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए धाराएं सख्ती से लागू होती हैं ताकि किसी भी तरह की छेड़छाड़ या असभ्य हरकत न हो। ऐसा होने पर आपकी त्वरित गिरफ्तारी हो सकती है। यहां तक कि शादी ब्याह के मौके पर भी अगर सार्वजनिक जगह पर अश्लील हरकतें की गईं तो उस शादी के प्रबंधकों और हरकत करने वाले व्यक्तियों से कानूनी तरीके से सख्ती से निपटा जायेगा। इसी तरह मूर्ति विसर्जन के समय कानून के साथ कुछ पर्यावरणीय नियम भी लागू होते हैं। मसलन एनजीटी और सीपीसीबी के आदेश के तहत प्लास्टर ऑफ पेरिस, कैमिकल रंग और प्लास्टिक की सजावट वाली मूर्तियों के जल विसर्जन पर पाबंदी है। आप नदी, तालाब आदि पर ये चीजें नहीं प्रवाहित कर सकते। प्रशासन अकसर ऐसी चीजों के विसर्जन के कृत्रिम टैंक बनवाता है। हर हाल में वहीं विसर्जन करना जरूरी होता है। अगर आप नहीं मानते तो आयोजकों पर सीधे आर्थिक जुर्माना और मुकदमें की कार्यवाई होती है। इ.रि.सें.

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