नन्ही सी जान की हो खास देखभाल : The Dainik Tribune

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नन्ही सी जान की हो खास देखभाल

नन्ही सी जान की हो खास देखभाल

रजनी अरोड़ा

सर्दियों में शिशुओं की देखभाल करना काफी चुनौतीपूर्ण होता है। कमजोर इम्यूनिटी होने के कारण गिरता तापमान उन्हें ज्यादा प्रभावित करता है। देखरेख में जरा-सी लापरवाही उन्हें बीमार कर सकती है। लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखा जाये तो शिशु की सर्दियां आरामदायक और सुरक्षित निकल सकती हैं।

रोजाना मसाज

अगर शिशु 15-20 दिन का हो चुका है, तो सर्दियों में रोजाना बादाम, ऑलिव या सरसों के गुनगुने तेल से मसाज करनी चाहिए। मसाज शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाने व हड्डियों की मजबूती में सहायक है। मसाज दोपहर को तब करें, जब रूम-टैम्परेचर गर्म हो- वो चाहे धूप से हो या हीटर चलाकर मेंटेन किया हो। खिड़की-दरवाजे बंद कर लें। बच्चे के पूरे कपड़े एकसाथ न उतारें। पहले टांगों की मसाज करके कपड़े पहना दें, फिर ऊपरी भाग की मसाज करें। ऐसा करने से उसे ठंड नहीं लगेगी। मसाज के तुरंत बाद उसे नहलाएं या गर्म पानी में भिगोए तौलिये से स्पांज करें।

कब और कैसे नहलाएं

गर्भनाल गिरने तक नवजात को स्पांज ही करें क्योंकि जरा-सी असावधानी होने पर गर्भनाल टूट सकती है। ठंड ज्यादा हो, तो एक दिन छोड़कर नहलाएं, रोजाना स्पांज कर कपड़े जरूर बदलें। नहलाते समय रूम और बाथरूम-टैम्परेचर गर्म रखें। कमरे में भी टब रखकर नहला सकते हैं। ध्यान रखें कि गुनगुने पानी से 4-5 मिनट में फटाफट नहला दें। बाल सप्ताह में 2 बार धोएं। धोने से पहले गुनगुने ऑयल से मसाज करें जिससे सिर पर डेंड्रफ की परत ने जमे। नहलाने के बाद उसे तौलिये में लपेटें और पोंछ कर सुखा लें। बेबी-लोशन लगाकर शीघ्र कपड़े पहना दें।

कपड़ों का ध्यान

बच्चे के कपड़े मसाज करने से पहले ही निकाल कर रख लें। नहाने के बाद कपड़े ढूंढने लगें, तो उसे ठंड लग सकती है। यह भी ध्यान रखें कि अपने से एक-दो लेयर ज्यादा पहनाना ही काफी है। वुलन कपडों से पहले कॉटन अंडरगार्मेंट्स और टी-शर्ट पहनाएं। जुराबें जरूर पहनाएं ताकि बच्चा ठंड के असर से महफूज रहे।

डायपर पहनाएं

सर्दियों में लंगोट या अंडरवियर गीले पहनने से ठंड लगने या इन्फेक्शन की आशंका रहती है। बेहतर है कि बच्चे को डायपर पहनाएं और 3-4 घंटे के बाद जरूर बदलें। अगर बच्चा डायपर में मल-त्याग कर दे, तो उसे तुरंत उतार दें। मल गुनगुने पानी या गीली कॉटन से साफ कर लें। डायपर वाली जगह सूखने पर ही डायपर पहनाएं। पहनाने से पहले स्किन पर पाउडर के बजाय बेबी क्रीम, बादाम या सरसों का तेल जरूर लगाएं। इससे रैशेज से बचाव होता है। जबकि पाउडर उसके अंदर जाकर बाद में रोगों की वजह बन सकता है।

त्वचा की नमी बनाए रखें

बच्चे की त्वचा पर दिन में 2-3 बार और रात को सोने से पहले बेबी-लोशन जरूर लगाएं। होंठों पर हल्का-सा गर्म देसीघी लगाएं।

इन्फेक्शन से बचाव

बाहर से आये व्यक्ति के हाथ सेनिटाइज कराकर ही बच्चे के पास आने दें। घर में किसी को सर्दी-जुकाम है तो उससे उचित दूरी बनाकर रखें। इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए 6 महीने के बच्चे को नहाने के बाद और रात को सोने से पहले शहद चटाएं। 8-9 महीने के बच्चे को मटर के दाने के बराबर गुड़ चूसने को दें। जुकाम हो, तो रात को सोने से पहले उसकी छाती, पीठ और पैर-तलवे पर बेबी रब या लहसुन-अजवायन मिलाकर बने सरसों के तेल से मसाज करें। नाक बंद हो तो सलाइन वॉटर ड्रॉप्स डालें और स्टीम दें। वहीं इन्फेक्शन, फ्लू से बचने को डॉक्टर की सलाह पर इनफ्लूएंजा वैक्सीन जरूर लगवाएं।

बच्चे को गर्म रखें

जरूरी है कि मां खुद भी ठंड से अपना बचाव करें क्योकि मां से बच्चे को ठंड लगने की संभावना रहती है। यथासंभव शिशु को अपने पास रखें और पास सुलाएं गर्म चादर बिछाएं या फिर गर्म पानी की बोतल रखकर गर्म करें। भारी कंबल न ओढ़ाएं वरना हिलने-डुलने पर कंबल उसके मुंह पर आ सकता है। हाथ-पैर ठंडे हों, तो थोड़ी देर हीटर चलाएं। कमरे की हवा ड्राई न हो, बाल्टी में पानी भर कर रखें। दिन में भी बच्चे को 11-4 बजे के बीच बालकनी या आंगन में धूप में एकाध घंटा जरूर लेकर जाएं। धूप में मौजूद विटामिन डी हड्डियों की मजबूती में सहायक है।

डाइट का ख्याल

इम्यूनिटी बूस्ट करने के लिए जरूरी है कि कम से कम 6 महीने तक शिशु को स्तनपान कराएं। 3-4 घंटे के अंतराल पर और रात को भी दूध पिलाएं। 6 महीने की अबाद उसे फार्मूला मिल्क, अर्द्ध ठोस आहार या अन्य तरल आहार देने शुरू करें। 10 महीने से बड़े बच्चे को गर्म सूप, बेसन का शीरा, हॉट चॉकलेट, फलों का जूस, दलिया, खिचड़ी, दाल का पानी, सूजी का हलवा दे सकते हैं। डिहाइड्रेशन या पाचन से संबंधित समस्याओं से बचने के लिए दिन में थोड़ा-थोडा गुनगुना पानी पीने को देते रहना चाहिये।

-डॉ. सुरभि गुप्ता, बालरोग विशेषज्ञ, दिल्ली से बातचीत पर आधारित

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