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ब्लड प्रेशर पर काबू पाकर टालें हृदय रोग के जोखिम

युवाओं में खतरनाक हाई डायस्टोलिक स्तर
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युवाओं में नीचे के ब्लड प्रेशर यानी डायस्टोलिक का हाई होना हृदय के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। डॉक्टरों के मुताबिक, इसके लक्षण लगातार थकान और चक्कर आना, सिर में भारीपन, सीने में दबाव, तेज धड़कन आदि होते हैं। यह 90 एमएमएचजी से अधिक हो तो दिनचर्या सही करें व खानपान पर नियंत्रण रखना शुरू कर दें। वहीं मेडिसिन की जरूरत है या नहीं, इस बारे डॉक्टरी सलाह लें।

डॉ.माजिद अलीम

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ऊपर यानी सिस्टोलिक और नीचे यानी डायस्टोलिक- दोनों ब्लड प्रेशर अपने-अपने तौर पर खतरनाक होते हैं। लेकिन उनके खतरे की प्रकृति उम्र और स्वास्थ्य की स्थिति पर निर्भर करती है। अगर आपकी उम्र 40 से कम की है तो नीचे का ब्लड प्रेशर यानी डायस्टोलिक का हाई होना हृदय रोग की शुरुआत का जबर्दस्त लक्षण है। अगर आपकी उम्र 40 और 60 के बीच की है, तो दोनों ही ब्लड प्रेशर खतरनाक हैं और ऊपर तथा नीचे दोनों ही रक्त दबावों पर ध्यान रखना जरूरी है। लेकिन अगर आपकी उम्र 60 साल से ऊपर है, तो ऊपरी यानी सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर ज्यादा खतरनाक होता है, क्योंकि यह धमनियों की कठोरता और दिल के दौरे का बड़ा कारण बनता है।

डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर के कारण

दरअसल नीचे का ब्लड प्रेशर वह रक्त दबाव होता है, दिल की धड़कनों के बीच- जब हार्ट रिलैक्स कर रहा होता है- धमनियों में होता है। जब यह 90 एमएमएचजी से अधिक हो जाता है तो यह डायस्टोलिक प्रेशर माना जाता है। डायस्टोलिक प्रेशर के कुछ खास कारण होते हैं। मसलन- इससे पता चलता है कि आपकी धमनियां कठोर हो गई हैं। उम्र बढ़ने के साथ धमनियां अपना लचीलापन खोने लगती हैं, जिससे डायस्टोलिक प्रेशर बढ़ जाता है। नीचे का ब्लड प्रेशर ज्यादा होने का एक संकेत है कि आप थायरॉयड की समस्या से जूझ रहे हैं या इसकी चपेट में आने वाले हैं। डायस्टोलिक का संकेत यह भी कि आप किडनी की समस्या से जूझ रहे हैं या भविष्य में जूझ सकते हैं। किडनी की कार्यक्षमता कमजोर होने पर ब्लड प्रेशर का नियंत्रण गड़बड़ा जाता है। एक मतलब यह भी है कि आप अपने शरीर के अनुपात से ज्यादा मोटे और ओवरवेट हैं। बीपी लगातार बढ़ा हुआ है, तो हो सकता है कि आप लगातार तनाव में हैं और आपकी नींद पूरी नहीं हो रही है। यह भी कि आप नमक का अत्यधिक सेवन कर रहे हों। सोडियम ब्लड वॉल्यूम बढ़ाकर डायस्टोलिक प्रेशर को प्रभावित करता है। संभव यह भी कि अगर आपका नीचे का ब्लड प्रेशर लगातार बढ़ा हुआ है तो आपकी खानपान की आदतें सही नहीं होंगी और व्यायाम से आप दिल चुराते होंगे। क्योंकि तला, भुना खाने वालों और निष्क्रिय जीवनशैली जीने वालों का भी नीचे का ब्लड प्रेशर ज्यादा होता है।

ऐसे जानें कि डायस्टोलिक बीपी है

सवाल है आखिर कैसे समझें कि हम डायस्टोलिक या नीचे के बढ़े हुए ब्लड प्रेशर से जूझ रहे हैं। अगर नीचे का ब्लड प्रेशर 90 या उससे ऊपर लगातार बना रहता है, तो यह मांसपेशियों और धमनियों पर लंबे समय तक दबाव बनाता है, जिससे दिल का दौरा पड़ सकता है। हार्ट फेल्योर की समस्या हो सकती है और किडनी डैमेज हो सकती है। नीचे के ब्लड प्रेशर बढ़े होने के लक्षण होते हैं- लगातार थकान और चक्कर आना। सिर में भारीपन रहना। सीने में रह-रह करके दबाव महसूस होना और सांस लेने में तकलीफ। जब नीचे का ब्लड प्रेशर अधिक होता है तो धड़कन तेज हो जाती है।

तुरंत करें ये उपाय

सवाल है अगर डायस्टोलिक बीपी के लक्षण महसूस कर रहे हों, तब क्या करें? सबसे पहले बिना डॉक्टर के पास गये भी अपने खाने में नमक की मात्रा कम कर लें। कम से कम आधा घंटे सुबह नियमित व्यायाम करें। तनाव मुक्त रहने की कोशिश करें। इसके लिए योग और ध्यान करें। कैफीन और एल्कोहल का सेवन सीमित कर दें और अगर ब्लड प्रेशर की दवा खा रहे हैं, तो उसे नियमित खाएं।

राहतकारी घरेलू नुस्खे

डायस्टोलिक से राहत के लिए रोज सुबह खाली पेट एक या दो कच्चे लहसुन की कलियां खाएं और पानी पी लें। यह रक्तवाहिकाओं को आराम देता है। वहीं हर सुबह रात में भीगे एक चम्मच मेथी के दाने खूब चबा-चबाकर खाने से और मेथी का वह पानी पी लें। हर सुबह एक चम्मच आंवले के रस में एक चम्मच शहद मिलाकर लेने से भी फायदा होता है। प्रतिदिन चार-पांच तुलसी की पत्तियां और दो-तीन नीम की पत्तियां सुबह-सुबह खाने से डायस्टोलिक बीपी के नियंत्रण के साथ साथ इम्यूनिटी बढ़ती है। खास बात, सुबह वॉक करना कभी न भूलें।

हेल्दी खानपान और व्यायाम

जब नीचे का या ऊपर का भी ब्लड प्रेशर ज्यादा हो तो अधिक नमक, अचार, पापड़ और चिप्स जैसी चीजें या तो न खाएं या फिर बहुत सीमित मात्रा में खाएं। तले, भुने खाद्य पदार्थों से बचें। चाय और कॉफी दोनों ज्यादा न पीएं। रेड मीट और प्रोसेस्ड मीट से तौबा कर लें। इनका खाना आपके ब्लड प्रेशर को घातक स्तर तक बढ़ा सकता है। वहीं तनाव, गुस्सा भूलकर भी न करें और देर रात तक जगने से बचें। बीपी मॉनिटर मशीन घर पर रखें और दिन में दो बार अपना ब्लड प्रेशर नापें तथा एक हफ्ते में इसकी समीक्षा करें। डॉक्टर ने जिस दवा को खाने का सुझाव दिया हो, उसे बिल्कुल समय पर खाएं। हर दिन कम से कम सात घंटे की नींद लेना भी बहुत जरूरी है। साथ ही शवासन, शशांकासन और भ्रामरी प्राणायाम नियमित रूप से करें।

-इ.रि.सें.

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