Explainer: क्या है ‘आपकी बेटी हमारी बेटी’ योजना, हरियाणा में CAG ने अपनी जांच में क्या पाया?
Aapki Beti Hamari Beti scheme: कैग (CAG) ने ‘आपकी बेटी हमारी बेटी’ योजना (ABHB) में करोड़ों रुपये का घोटाला उजागर किया है। इसमें 7,723 लाभार्थियों को एक से अधिक बार पंजीकृत पाया गया। कुछ मामलों में तो एक ही लाभार्थी का पंजीकरण दो, तीन, चार, पांच, छह और यहां तक कि नौ बार तक हुआ। हालांकि, महिला एवं बाल विकास विभाग ने ऑडिट के बाद वसूली की प्रक्रिया शुरू की है, लेकिन अब तक पूरी राशि वापस नहीं ली जा सकी है।
‘आपकी बेटी हमारी बेटी योजना’ का उद्देश्य क्या है?
राज्य में लिंगानुपात सुधारने के लिए हरियाणा सरकार ने अगस्त 2015 में ‘आपकी बेटी हमारी बेटी योजना’ (ABHB) की संचालनात्मक गाइडलाइंस अधिसूचित की थीं। योजना के तहत अनुसूचित जाति के परिवारों और बीपीएल परिवारों की पहली बेटी को लाभ दिया जाता है। 22 जनवरी 2015 या उसके बाद किसी भी परिवार में पैदा हुई दूसरी बेटी या जुड़वा बेटियों को भी इस योजना में शामिल किया गया। 24 अगस्त 2015 या उसके बाद पैदा हुई तीसरी बेटी को भी मार्च 2017 से योजना में शामिल कर दिया गया।
योजना के तहत प्रत्येक लाभार्थी को 21,000 रुपये की एकमुश्त अनुदान राशि दी जाती है। यह राशि जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO) के कार्यालय द्वारा लाभार्थी के नाम से (मां, पिता या अभिभावक के माध्यम से) भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) में जमा कराई जाती है। एलआईसी लाभार्थी के नाम पर एक सदस्यता प्रमाणपत्र जारी करता है। निवेश की परिपक्व राशि 18 वर्ष की आयु पूरी होने पर देय होती है।
योजना के लिए आवेदन कैसे किया जा सकता है?
विभाग द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया के अनुसार लाभार्थियों को सरल पोर्टल (SARAL Portal) के माध्यम से आवेदन करना होता है। आवेदन की पात्रता और डुप्लीकेशन की जांच महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी (WCDPO) द्वारा की जाती है। जांच के बाद आवेदन संबंधित DPO को स्वीकृति, मंजूरी और राशि एलआईसी में जमा कराने के लिए भेजा जाता है।
कैग ने योजना में क्या पाया?
अक्टूबर 2022 में सोनीपत के DPO कार्यालय और नवंबर 2022 में जींद के जुलाना WCDPO कार्यालय के रिकॉर्ड की जांच के दौरान, कैग ने पाया कि विभाग ने एकमुश्त 21,000 रुपये की राशि कई लाभार्थियों के नाम पर बार-बार एलआईसी में जमा कराई। इसके बाद महिला एवं बाल विकास महानिदेशक (DG WCD) कार्यालय से अन्य जिलों का एलआईसी डेटा भी मंगाया गया। जांच में पाया गया कि जनवरी 2015 से जुलाई 2022 तक 3,60,188 बेटियों को योजना के तहत पंजीकृत किया गया और एलआईसी को कुल 756.39 करोड़ रुपये (प्रत्येक लाभार्थी पर 21,000 रुपये) का प्रीमियम भुगतान किया गया।
जब डेटा पर डुप्लीकेट फ़िल्टर (नाम, जन्म तिथि, पिता और माता का नाम) लगाया गया तो सामने आया कि 7,723 लाभार्थियों का पंजीकरण एक से अधिक बार हुआ है।“ इस प्रकार, 8,238 मामलों में एलआईसी प्रमाणपत्र जारी किए गए, जिससे 7,723 लाभार्थियों को 17.30 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि का भुगतान हुआ,” कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा।
कैग ने पाया कि योजना की प्रक्रियाएं स्वचालित (automated) नहीं थीं। लाभार्थियों की सूची बनाना, कोषागार से धन निकालना और सूची एलआईसी को भेजना, सब काम मैन्युअली किया जा रहा था। रिपोर्ट में कहा गया, “ इसलिए आवेदन की स्वीकृति और धनराशि जारी करने की प्रक्रिया के दौरान डुप्लीकेट लाभार्थियों की पहचान और उन्हें हटाने का कोई तंत्र उपलब्ध नहीं था।”
गड़बड़ियां सामने आने के बाद विभाग ने क्या किया?
जुलाई 2023 में विभाग ने कैग के समक्ष तथ्यों को स्वीकारते हुए बताया कि उसने एलआईसी से 836 मामलों में 2.09 करोड़ रुपये की वसूली की है और शेष राशि की वसूली के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। सितंबर 2024 तक विभाग ने बताया कि उसने 1,966 मामलों में 6.79 करोड़ रुपये की वसूली की है, हालांकि पूरी जानकारी नहीं दी गई। कैग रिपोर्ट में कहा गया, “इस प्रकार, आवेदन की प्रक्रिया के दौरान डुप्लीकेट लाभार्थियों की पहचान और उन्हें हटाने की व्यवस्था न होने के कारण, 7,402 लाभार्थियों को कई बार लाभ मिल गया, जिससे एलआईसी को 15.54 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि का भुगतान हुआ। यह मामला मार्च 2023 में सरकार को जवाब/टिप्पणी के लिए भेजा गया था, लेकिन जनवरी 2025 तक सरकार का जवाब नहीं मिला।”
कैग की सिफारिश
कैग ने सिफारिश की है कि राज्य सरकार को अतिरिक्त भुगतान की गई राशि की वसूली करनी चाहिए और पोर्टल की खामियों को दूर करके भविष्य में लाभार्थियों के डुप्लीकेट पंजीकरण को रोकना चाहिए।