Explainer: सार्वजनिक धन, निजी लाभ- सिरसा नगर परिषद घोटाले के अंदर की कहानी
Sirsa Municipal Council Scam: सिरसा नगर परिषद में 2012 से 2014 के बीच हुए करोड़ों रुपये के विकास कार्यों में बड़ा घोटाला सामने आया है। हरियाणा राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने इस दौरान किए गए कई प्रोजेक्ट्स में गंभीर अनियमितताएं पाई हैं। जांच रिपोर्ट में 21 अधिकारियों के नाम शामिल हैं और संबंधित अधिकारियों व ठेकेदारों से लगभग 35 लाख रुपये की वसूली के आदेश दिए गए हैं। सात अभियंताओं के खिलाफ चार्जशीट तैयार कर उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है।
सतर्कता ब्यूरो ने जांच में क्या पाया?
रिपोर्ट में सामने आया कि कई विकास कार्य बिना अनुमोदन और निविदा नियमों का उल्लंघन करते हुए किए गए। कुछ प्रोजेक्ट्स विवादित भूमि पर दिखाए गए, ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए निविदाएं समय से पहले खोली गईं और बिना उचित निविदा प्रक्रिया के भुगतान कर दिए गए। स्ट्रीटलाइट्स के बिल बिना टेंडर जारी किए ही पास कर दिए गए। सीमेंट, रेत और बजरी जैसे घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया। सड़कों के डिवाइडरों के लिए लोहे की ग्रिल और एंगल साइट से गायब मिले और कई सड़कें आधिकारिक दावों से छोटी पाई गईं।
रिपोर्ट में किन अधिकारियों के नाम हैं?
रिपोर्ट में 21 अधिकारियों की पहचान की गई है, जिनमें सात अभियंता भी शामिल हैं। नामित अभियंताओं में उस समय के नगर अभियंता सुबर सिंह और भूपेंद्र सिंह, तथा कनिष्ठ अभियंता राजेश कुमार, अरुण कुमार, राजेश दलाल, दीपक कुमार और ओमप्रकाश (सेवानिवृत्त) शामिल हैं। प्रोजेक्ट पर काम करने वाले ठेकेदारों पर भी जुर्माना लगाया गया है।
अब तक क्या कार्रवाई हुई है?
सात अभियंताओं के खिलाफ चार्जशीट का मसौदा तैयार कर जिला नगर आयुक्त के माध्यम से निदेशालय को भेज दिया गया है। सतर्कता ब्यूरो ने संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों से 35 लाख रुपये की वसूली के भी आदेश दिए हैं। सिरसा नगर परिषद को यह रिपोर्ट पिछले सप्ताह प्राप्त हुई।
वर्तमान नगर परिषद ने क्या कहा?
कार्यकारी अधिकारी सुनील रंगा ने पुष्टि की कि उन्हें पिछले सप्ताह सतर्कता रिपोर्ट मिली है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट के निर्देशों के अनुसार चार्जशीट का मसौदा तैयार कर उच्चाधिकारियों को भेज दिया गया है। आगे की कार्रवाई मुख्यालय स्तर पर की जाएगी।