मुख्य समाचारदेशविदेशहरियाणाचंडीगढ़पंजाबहिमाचलबिज़नेसखेलगुरुग्रामकरनालडोंट मिसएक्सप्लेनेरट्रेंडिंगलाइफस्टाइल

देश के सबसे स्वच्छ शहर में अस्वच्छ हरकतें

इंदौर में रिश्तों का छल
Advertisement

आठ बार स्वच्छता का खिताब जीतने वाले इंदौर की स्वच्छता पर पिछले दिनों रहस्यमय कांड के दाग लगे, जिसके पीछे दो महिलाओं की शातिर दिमाग की हरकतें थीं। उन्होंने घटनाओं को जिस तरह साजिश में गूंथा, वह आश्चर्य करने वाली बात है। किसी अपराध फिल्म की जैसी स्क्रिप्ट रचने वाली महिलाओं का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था।

इंदौर में करीब 3 महीने में दो ऐसी घटनाएं हुई, जिन्होंने पूरे देश में इंदौर की एक अलग छवि निर्मित की। यह छवि है आपराधिक कृत्य वाली और संयोग कि कृत्य करने वाली दोनों महिलाएं हैं। पहले सोनम रघुवंशी का नाम आया जिसकी 11 मई को राजा रघुवंशी से शादी हुई थी। उसने प्रेमी के साथ शादी के पहले ही साजिश रचकर पति राजा रघुवंशी को हनीमून ट्रिप पर शिलांग में सुपारी देकर मरवा दिया। इसके बाद अर्चना तिवारी ने परिवार के शादी के दबाव के आगे झुकने के बजाय खुद को परिदृश्य से गायब करने की चाल चली। राखी पर अपने घर कटनी जाते समय वह रास्ते में ट्रेन से बेहद शातिराना तरीके से गायब हो गई। उसके गायब होने की साजिश में एक लड़का सारांश सामने आया। रेलवे पुलिस परेशान रही। उसे नर्मदा और जंगल में तलाश किया गया। लेकिन, बाद में पुलिस ने लिंक जोड़कर 12 दिन बाद उसे भारत-नेपाल की सीमा पर पकड़ लिया।

Advertisement

इंदौर में रहकर जज की तैयारी कर रही 29 साल की कटनी की अर्चना तिवारी की गुमशुदगी और बरामद होने की गुत्थी हैरत पैदा करने वाली है। रेलवे पुलिस की जांच ने साफ किया कि यह कोई अपहरण या हादसा नहीं, बल्कि खुद अर्चना की रची गई साजिश वाली कहानी थी। समाज में महिलाओं की एक संवेदनशील छवि है। इसलिए सहज भरोसा नहीं होता कि कोई मध्यमवर्गीय परिवार की लड़की खुद को शादी से बचाने के लिए इतनी गहरी साजिश रच सकती है। अर्चना घर वालों के इस फैसले से नाराज थी कि उसकी शादी एक पटवारी से की जा रही है, जबकि वो सिविल जज बनने की तैयारी कर रही थी। सवाल उठता है कि उसने विरोध न करके अपने आपको परिदृश्य से गायब करने का उपक्रम क्यों किया।

यदि पूरे घटनाक्रम पर नजर दौड़ाई जाए, तो एक बात साफ़ नजर आती है कि जिस तरह फुलप्रूफ षड्यंत्र रचा गया, वो किसी सामान्य लड़की के बस की बात शायद नहीं हो सकती। सात अगस्त की रात अर्चना इंदौर से नर्मदा एक्सप्रेस ट्रेन से रक्षाबंधन के लिये कटनी के लिए रवाना हुई थी। लेकिन, वहां नहीं पहुंची। देर रात उसका मोबाइल बंद हो गया। घबराए परिवार ने भोपाल के जीआरपी थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। जांच में सामने आया कि अर्चना ने गुम होने की योजना पहले से बना रखी थी। वकील होने के नाते उसे कानून और जांच प्रक्रिया की बारीकियां पता थीं। उसने सोचा कि अगर मामला जीआरपी में दर्ज होगा, तो उस पर गहन जांच नहीं होगी।

इसी सोच के तहत इटारसी के पास जंगल में अर्चना ने अपना मोबाइल फोन फेंक दिया, ताकि लोकेशन ट्रेस न हो सके। उसने साथी सारांश के साथ ट्रेन से उतरने के बाद ऐसा रास्ता चुना, जहां टोल टैक्स और सीसीटीवी कैमरे न हों। इस सफर में सारांश दूरी बनाकर उसके साथ रहा। पूरे घटनाक्रम में अर्चना के दो दोस्तों सारांश और ड्राइवर तेजेंद्र की अहम भूमिका रही। सारांश से अर्चना की पहचान इंदौर में पढ़ाई के दौरान हुई थी। तेजेंद्र ने बीच रास्ते में ट्रेन में अर्चना को साड़ी और कपड़े दिए। तेजेंद्र और सारांश की मदद से अर्चना इटारसी से निकलकर शुजालपुर पहुंची। उन्होंने लंबा रूट लिया ताकि किसी टोल प्लाजा या कैमरे में न आएं।

वह इंदौर, बुरहानपुर, हैदराबाद व जोधपुर होते हुए दिल्ली पहुंची। फिर सारांश के साथ 14 अगस्त को नेपाल चली गई। इस दौरान अर्चना ने नया सिम कार्ड या फोन भी मध्य प्रदेश से नहीं लिया, ताकि कहीं भी उनकी ट्रैकिंग न हो सके। निस्संदेह, ये किसी सामान्य लड़की के दिमाग की उपज नहीं हो सकती।

जांच टीम ने सैकड़ों सीसीटीवी फुटेज खंगाले। बड़ा सुराग तब मिला, जब अर्चना की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) में एक नंबर पर लंबे समय तक बातचीत दर्ज हुई, वह नंबर सारांश का निकला। सारांश को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई तो पूरा राज खुल गया और अर्चना को नेपाल बॉर्डर से पकड़ा गया। अर्चना की अविश्वसनीय दलील थी कि सारांश के साथ उनके कोई प्रेम संबंध नहीं हैं ,उसने सिर्फ इस पूरी योजना में मदद की।

अब दूसरी लड़की सोनम रघुवंशी की कहानी, जिसने साजिश रचने में किसी जासूसी फिल्मों की कहानी को मात कर दिया। शुरुआत हुई 11 मई से जब राजा रघुवंशी और सोनम रघुवंशी की परिवार की राजी-मर्जी से शादी हुई। यह एक साधारण विवाह था, पर क्या पता था कि कुछ ही दिनों में यह शादी देशभर में सुर्खी बन जाएगी। इंदौर से हनीमून के लिए शिलांग गए इस नवविवाहित जोड़े राजा और सोनम की कहानी ने पूरे देश को झकझोर दिया। एक सपनों भरा हनीमून भयानक त्रासदी और रहस्यमय हत्याकांड में बदल गया। दिलचस्प बात यह कि हनीमून की प्लानिंग सोनम ने खुद की। टिकट से लेकर होटल बुकिंग तक सब कुछ सोनम के नाम से हुआ।

राजा और सोनम मेघालय के शिलांग में डबल डेकर लिविंग रूट ब्रिज, नोंग्रियाट गांव घूमने गए। यही वह जगह थी, जो इस हत्याकांड का साइलेंट गवाह बना। उसी दिन दोनों अचानक लापता हो गए। फिर न राजा का पता चला, न सोनम का। सुराग न मिलने पर नव दंपति का केस दर्ज किया गया। मीडिया ने लापता कपल पर रोमांचक एंगल से रिपोर्ट करना शुरू कर दिया। 2 जून को राजा का शव एक खाई में मिला। शव की हालत इतनी खराब थी कि पहचान करना मुश्किल था। लेकिन, राजा के हाथ पर गुदे 'राजा' टैटू ने उसकी पहचान पक्की कर दी। पोस्टमार्टम में हत्या की पुष्टि हो गई।

राजा का शव मिलने के बाद भी सोनम के गायब होने के शक को अलग एंगल से देखा गया। पर, किसी ने यह नहीं सोचा था कि इस पूरी साजिश की मास्टरमाइंड सोनम है। और इसके पीछे उसकी चाल राजा से पीछा छुड़ाना और प्रेमी राज कुशवाह से शादी करना था। 9 जून को सोनम गाजीपुर में नाटकीय परिस्थिति में पकड़ी गई। लेकिन, तब तक पुलिस ने साजिश के सारे पत्ते खोल दिए और ऐसी स्थिति में सोनम ने खुद को पुलिस के हवाले कर दिया। उसने पुलिस के सामने जो खुलासे किए, वो चौंकाने वाले थे। हनीमून ट्रिप पर पति की हत्या करवाने की साजिश उसने इस तरह रची थी कि किसी को भरोसा न हुआ कि शादी के 10 दिन बाद वो ऐसा खौफनाक कारनामा कर सकती है।

ये दो घटनाएं बताती हैं कि अपराध का चेहरा बदल रहा है। षड्यंत्र रचकर कोई बड़ी वारदात करना अब सिर्फ आपराधिक सोच वाले लोगों की बपौती नहीं रह गया। कोमलांगी समझी जाने वाली मध्यमवर्गीय परिवार की पढ़ी-लिखी लड़कियां भी साजिश रचकर बड़ी घटना कर सकती हैं।

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।

Advertisement
Show comments