एनडीआरएफ की ट्रेनिंग ऐसी है कि ये कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी काम करते हैं। लेकिन उससे भी बड़ी बात है इनका समर्पण भाव। इस समय इनकी टुकड़ियां न केवल हिमाचल, उत्तराखंड में राहत कार्य में दिन-रात जुटी हुई हैं बल्कि बिहार की बाढ़ में भी बड़ी भूमिका निभा रही हैं।
इस समय देश के हिमालयी क्षेत्रों में भयंकर प्राकृतिक आपदा आई हुई है। कहीं भूस्खलन तो कहीं बादल फटना। दर्जनों लोग काल कवलित हो गये हैं और हजारों मकान तथा दर्जनों बस्तियां दब गई हैं। हिमाचल प्रदेश तथा उत्तराखंड में प्रकृति का प्रकोप कुछ ज्यादा ही है। इन राज्यों में तुरंत राहत की व्यवस्था करना बेहद कठिन है क्योंकि आपदा प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचना ही बेहद कठिन होता है। रास्ते कट जाते हैं, पहाड़ी नदियां उफन जाती हैं और आस-पास से कोई मदद नहीं मिल पाती है। लेकिन अब जिस तरह से राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल यानी एनडीआरएफ समर्पित भाव से उन इलाकों में राहत कार्य करने में जुटा हुआ है उसे देखकर आशा की किरण जाग उठी है।
इस बल का गठन ही प्राकृतिक आपदाओं और खतरनाक परिस्थितियों से निबटने के लिए किया गया था। पिछले पांच-छह वर्षों में इसने जबर्दस्त तरीके से काम किया और लोगों में इतना विश्वास पैदा कर दिया कि अब विपदा आते ही इसे बुलाया जाता है और इसके जवान तुरंत आकर राहत कार्यों में लग जाते हैं। इनकी ट्रेनिंग ही ऐसी है कि ये कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी काम करते हैं। लेकिन उससे भी बड़ी बात है इनका समर्पण भाव। इस समय इनकी टुकड़ियां न केवल हिमाचल, उत्तराखंड में राहत कार्य में दिन-रात जुटी हुई हैं बल्कि बिहार की बाढ़ में भी बड़ी भूमिका निभा रही हैं। इसने अब तक डेढ़ लाख लोगों की जान बचाई है और लाखों फंसे लोगों को निकाला है। गृह मंत्रालय ने इसे पूरी तरह से साजो सामान से लैस कर दिया है जिससे राहत कार्यों में तेजी आ सके।
मंत्रालय ने 2024-25 में एसडीआरएफ के लिए 20,264 करोड़ रुपये आवंटित किये और एनडीआरएफ के लिए 5,160 करोड़ रुपये आवंटित किये हैं। जिसके परिणाम देखने में आ रहे हैं। मार्च, 2021 में एक नया एलर्ट सिस्टम जारी किया गया जिससे अब संगठन पहले ही खतरे की संभावना बता देता है जिससे लोग सावधान हो जायें। इसका उदाहरण है कि इसने अब तक 631.1 करोड़ एलर्ट मैसेज भेजे हैं और बेशकीमती जिंदगियां बचाई हैं। इसका कार्य सिर्फ भारत ही नहीं था बल्कि विदेशों में भी रहा। हमने देखा कि कैसे तुर्की में इसने समर्पित भाव से इंसानियत की रक्षा की।
केवल एनडीआरएफ ही नहीं बल्कि सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, कोस्ट गार्ड को पूरी शक्तियां दीं बल्कि संसाधन तथा पूरे कानूनी अधिकार भी दिये। इसके ठोस परिणाम साफ दिखाई दे रहे हैं। कश्मीर में सुरक्षा बलों की त्वरित और दीर्घकालीन कार्रवाई से 2019 से 2025 तक के बीच हिंसक घटनाओं में 2004-09 के बीच बड़ी कमी आई है। कश्मीर के अलावा मध्य तथा पूर्व भारत में नक्सली हिंसा पर लगाम तो लगी ही है, उनके बड़े लीडर या तो मारे गये हैं या समर्पण कर चुके हैं। गृह मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि 2009 से 2024 के बीच नक्सली हिंसा की वजह से होने वाली मौतों में उल्लेखनीय कमी आई है। नक्सलियों के खिलाफ अर्ध सैनिक बलों का अभियान इस समय इतना जबर्दस्त है कि देश के छह जिले ही अब नक्सल हिंसा से प्रभावित रह गये हैं। दावा है कि जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत मार्च 2026 तक नक्सलवाद का समूल नाश कर दिया जायेगा। 2019 से 2025 तक के बीच 1025 नक्सली मारे गये हैं और 6,983 गिरफ्तार हो चुके हैं। यह संख्या बताती है कि नक्सलवाद अब अपनी अंतिम सांसें ले रहा है। सरकार इसके लिए आधुनिक टेक्नोलॉजी से लेकर आर्थिक संसाधन में कोई कमी नहीं होने दे रही है। इसके साथ-साथ आतंकवाद पर लगाम लगाने के लिए भी कई कड़े कदम उठाये जा रहे हैं जो देखने में आ रहे हैं। इसके लिए एनआईए का दायरा बढ़ाया गया है और कानून भी सख्त किये गये हैं।
लेकिन सिर्फ सख्ती या सुरक्षा बलों की ताकत से कई बार समस्याएं नहीं सुलझती हैं और इसलिए गृह मंत्रालय राज्यों के साथ मिलकर विकास तथा पुनर्वास की कई योजनाओं पर काम कर रहा है। विकास एक ऐसा माध्यम है जिससे हिंसा तथा अराजकता पर अंकुश लगाया जा सकता है। इसे ही ध्यान में रखकर पूर्वोत्तर के राज्यों में कई योजनाएं बनाई गई हैं। वहां शांति प्रक्रिया के तहत छह वर्षों में 12 शांति समझौते हुए जिस कारण से स्थिति में अभूतपूर्व सुधार आया। वहां अफस्पा को तेजी से हटाया जा रहा है और दो राज्यों त्रिपुरा तथा मेघालय में यह पूरी तरह से हटा दिया गया है तथा अन्य राज्यों के थोड़े से हिस्से में ही यह लागू है।
साइबर क्राइम देश के सामने एक चुनौती की तरह है और इसका मुकाबला आसान नहीं था लेकिन गृह मंत्रालय को नोडल एजेंसी बनाकर इस दिशा में सख्त कार्रवाई हो रही है। इसके लिए इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (14सी) बनाया गया है। यह साइबर क्राइम से निबटने के लिए आधुनिकतम टेक्नोलॉजी से लैस है और इसने इन अपराधों पर अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किया है और अभी भी कर रहा है। साइबर क्राइम के अलावा देश में ड्रग्स के खतरों के खिलाफ कई कदम उठाये गये हैं जिनमें काफी सफलता मिली है।
लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।