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मिसाइल-बम ले लो और नोबेल प्राइज दे दो

उलटबांसी

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ट्रंप कमाल के शांतिदूत हैं, वह यह भी कह सकते हैं कि महाभारत का युद्ध भी उन्होंने रुकवाया। और विश्वयुद्ध एक और विश्वयुद्ध दो भी उन्होंंने रुकवाया।

 

ट्रंप कारोबारी हैं। उन्हें कुछ ना कुछ बेचना है, पर साथ में यह भी दिखाना है कि वह दुनिया के बास हैं। दुनिया को कंट्रोल में रखते हैं। ट्रंप को नोबल पुरस्कार चाहिए, पर कारोबार कैटेगरी के लिए कोई नोबल पुरस्कार है ही नहीं। तो ट्रंप खुद को शांतिदूत साबित करवा कर नोबल लेना चाहते हैं। ट्रंप कहते हैं कि वह शांतिदूत हैं, उन्होने तमाम युद्ध रुकवा दिये हैं। पर लोग उन्हे कारोबारी मानते हैं। ट्रंप यूक्रेन युद्ध के लिए हथियार बेचना चाहते हैं, पर यूक्रेन के पास पैसे नहीं हैं। ट्रंप कह रहे हैं कि यूरोपीय देश पहले अमेरिका से हथियार खरीदें और फिर इन हथियारों को यूक्रेन को दें। माल ट्रंप का बिकना चाहिए, पैसे चाहे जहां से आयें।

ट्रंप कमाल के शांतिदूत हैं, वह यह भी कह सकते हैं कि महाभारत का युद्ध भी उन्होंने रुकवाया। और विश्वयुद्ध एक और विश्वयुद्ध दो भी उन्होंंंने रुकवाया। यह भी संभव है कि वह विश्वयुद्ध तीन शुरू करवा दें , फिर उसे रुकवा दें।

ट्रंप होशियार कारोबारी हैं, हथियार खरीदेंगे यूरोपीय देश, उन्हे इस्तेमाल करेगा यूक्रेन। हथियार बेचना तो कारोबारियों का काम है। अगर अमेरिका यूक्रेन का बहुत बड़ा समर्थक है, तो अमेरिका को अपने सैनिक उतारने चाहिए यूक्रेन में। पर नहीं ट्रंप कारोबारी हैं, हथियार बेच देंगे, सैनिक एक भी ना भेजेंगे। लड़ते रहो भईया, खरीदते रहो हथियार। दूर से आग लगा माल बेचते रहो।

जेलेंस्की समझ जाएं कि जो युद्ध दूसरों के सहारे लड़े जाते हैं, उन युद्धों के फैसले भी दूसरे ही तय करते हैं। जेलेंस्की ने दूसरों के उकसावे में आकर रूस से लड़ाई मोल ली। अब जेलेंस्की की पिटाई हो रही है। ट्रंप कह रहे हैं कि मैं पहलवान ना हूं, मैं तो कारोबारी हूं, मिसाइल ले लो, बम ले लो।

ट्रंप पहलवानी करना चाहते हैं कारोबार के जरिये। जेलेंस्की के पास पैसे नहीं हैं, यूरोपीय देशों को उम्मीद थी कि अमेरिका पैसे देता रहेगा। ट्रंप इन दिनों पैसे लेने के मूड में हैं। जेलेंस्की के लिए युद्ध उस डांस की तरह है, जिसमें पैसे आयेंगे, तो डांस चलेगा । डांसर तो जेलेंस्की हैं, पर पीछे से पैसे उछालने वाले दूसरे देश थे। ये देश पैसे उछालते हुए थक लिये हैं।

ट्रंप कह रहे हैं कि मैं भी अब पैसे नहीं उछालूंगा, मिसाइल बम उछाल सकता हूं, पैसे लेकर। पैसे यूरोपीय देशों को देने हैं। यूरोपीय देश भी अमेरिका के आसरे थे। अमेरिका अब कारोबार के आसरे है। कारोबार का तो एक ही उसूल है, माल निकाल, आइटम खऱीद।

ट्रंप की आवाज सुनायी दे रही है- मिसाइल ले लो, बम ले लो।

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