तिरछी नज़र
खेल भावना का तकाज़ा है कि खेल को सिर्फ खेल के रूप में स्वीकार किया जाए। यह भी ज़रूरी है कि जीतने वाले को हारने वाले से कहीं अधिक विनम्र बने रहने की आवश्यकता होती है। भारत एक बार फिर...
उथल-पुथल भरे मौजूदा वैश्विक परिदृश्य में देश के लिए अपनी जगह व भूमिका की पहचान ज़रूरी है। खासकर संरक्षणवादी व वैश्वीकरण- विरोधी नीतियों के दौर में। बेशक 2008 के असैन्य परमाणु समझौते के बाद भारत-अमेरिका संबंधों में बेहतरी शुरू हुई...
ग्लोबल साउथ में आकार और प्रतिभा के मामले में कोई भी राष्ट्र नेतृत्व करने के लिए हमसे बेहतर स्थिति में नहीं है। मौजूदा वैश्विक स्थितियों का फायदा उठाकर नेतृत्वकारी भूमिका के लिए उद्योग के लिए देश के खुद के 4.0...
भारत के लोकतंत्र और फिल्म उद्योग में परिवारवाद इस कदर गहराया है कि सत्ता, अवसर और पहचान कुछ चुनिंदा परिवारों तक ही सीमित होकर रह गई है, जिससे आम जनता को बराबरी का हक नहीं मिल पाता। अपने देश में...
चौ. देवीलाल ने अपने समर्पित जीवन से ग्रामीण भारत, खासकर किसानों और मजदूरों के उत्थान के लिए संघर्ष किया। वे लोकदल के प्रमुख नेता थे जिन्होंने गैर-कांग्रेसी आंदोलन को संगठित किया और हरियाणा की राजनीति में नए परिवर्तन लाए। उनकी...
अपनी जिन प्रतिभाओं के लिए अमेरिका जैसे विकसित देशों के दरवाज़े बंद होने पर भारत में जितनी भावनाएं आहत होती हैं उतनी अपनी प्रतिभाओं के पलायन से क्यों नहीं होतीं? आख़िर हमारी प्रतिभाएं अपने सारे संसाधन, श्रम और बुद्धि अपने...
पंजाब में आई हालिया बाढ़ ने व्यापक जन-धन की हानि की है। असामान्य बारिश इसकी वजह बनी, लेकिन बांधों का तर्कसंगत और समयबद्ध प्रबंधन बाढ़ की विभाषिका को कम कर सकता है। भविष्य में ऐसी तबाही की पुनरावृत्ति रोकने हेतु...
एक बात ने भारत में पर्यवेक्षकों का ध्यान खींचा है, कि ‘दोनों में से किसी भी देश पर हुए आक्रमण को दोनों के खिलाफ आक्रमण माना जाएगा।’ इससे कुछ लोग इसे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसी परिस्थिति से जोड़ रहे हैं। सच...