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गर देखने हों दिन में तारे, तो शिक्षक बन जा प्यारे

तिरछी नज़र
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शिक्षक के दायित्व की अंतहीन लंबी फेहरिस्त है, वे केवल कहलाने मात्र के शिक्षक हैं, मगर सारे सरकारी कार्य का संपादन उनके कंधों पर है, कई बार तो ऐसे ऐसे कार्यों में उनको झोंक देते हैं जिनका उनसे कोई वास्ता नहीं है।

भोला जी एक सरकारी विद्यालय में शिक्षक हैं, अपनी नौकरी के शुरुआती दौर में विद्रोही तेवर रखते थे, कई बातों को आसानी से नहीं मानते थे, इसी कारण सात साल में सात मर्तबा बदली हो गई। किन्तु जब से वे अनुभवी, उम्रदराज शिक्षक सहनशील जी के संपर्क में आए हैं, उनके सान्निध्य में टिक कर नौकरी कर रहे हैं।

सहनशील जी ने भोला जी को बताया कि शिक्षक को सरकारी महकमे में जादुई कर्मचारी मान लिया है या यूं कहें कि संसार में ऐसा कोई काम नहीं जिसको शिक्षक अपने बूते न कर पाता हो, इसलिए ठंडे दिमाग से सभी आदेश का पालन करें और कभी भी उलझनें की हिमाकत न करें। यही कारण है कि आजकल भोला जी अपने बहुआयामी व्यक्तित्व को संवारने में लगे हुए हैं।

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भोला जी के दायित्व की अंतहीन लंबी फेहरिस्त है, वे केवल कहलाने मात्र के शिक्षक हैं, मगर सारे सरकारी कार्य का संपादन उनके कंधों पर है, कई बार तो ऐसे ऐसे कार्यों में उनको झोंक देते हैं जिनका उनसे कोई वास्ता नहीं है, पिछली बार भोला जी को सामूहिक विवाह की जिम्मेदारी दे दी, इससे निपटे तो एक पूरे साल के लिए चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा बन गए, यह काम अभी पूरा भी नहीं हुआ कि घर-घर सर्वे करने का आदेश मिल गया, इससे निजात मिलती उसके पहले ही जाति प्रमाण पत्र बनाने का फरमान आ गया, यह काम अभी चल ही रहा था, कि साइकिल वितरण का भार आ गया।

पूरे संसार में हमारे देश में केवल और केवल शिक्षक को ही सर्वशक्तिमान माना गया है, जिस पर प्राकृतिक आपदा का भी असर नहीं होता है, चाहे बाढ़ की विभीषिका हो या सूखे का दंश, शिक्षक की तैनाती कर दी जाती है, कई बार तो सम्बन्धित विभाग के कर्मचारी गायब रहते हैं और शिक्षक मौके पर तैनात रहते हैं।

घोर आश्चर्य तो यह है कि साल भर शिक्षक को अन्य कार्यों में उलझाए और स्कूल से दूर रखने के बाद यदि परीक्षा परिणाम संतोषजनक नहीं आया तो उसका ठीकरा भी शिक्षक के सिर पर ही फोड़ा जाता है। उससे शिक्षा की बेहतरी की उम्मीद भी रखी जाती है।

बहरहाल, भोला जी आपने प्राणपण से अपने कर्तव्य का पालन करने में लगे हुए हैं, फिर भी एक दिन ई-अटेंडेंस न लगाने पर कारण बताओ नोटिस मिल गया, इसलिए भोला जी कहते हैं, कि ‘गर दिन में देखने हों तारे, तो शिक्षक बन जा प्यारे।’

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