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यह वंशानुगत धरोहर, किसी भी हाल में लुटने नहीं देंगे

मोहाली के 17 गांवों की साझा जमीन बेचने के विरोध में किसान संगठनों का बड़ा जमावड़ा, बोले
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मोहाली के गुरुद्वारा अंब साहिब में बृहस्पतिवार को इकट्ठे हुए अलग-अलग किसान संगठनों के प्रतिनिधि।-निस
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मोहाली के 17 गांवों की साझा शामलात ज़मीन को सरकार द्वारा बेचने की तैयारी के विरोध में आज गुरुद्वारा अंब साहिब परिसर में किसान यूनियनों, ग्राम प्रतिनिधियों और अन्य समर्थकों का विशाल जमावड़ा हुआ। इस मौके पर ज़मीन बचाने के लिए साझा रणनीति तैयार की गई और सरकार को खुली चुनौती दी गई। इस दौरान जमीन बचाओ गांव बचाओ कमेटी का गठन भी किया गया।

किसान नेताओं ने बताया कि 25 अगस्त को डीडीपीओ मोहाली ने बीडीपीओ को पत्र लिखकर 17 ग्राम पंचायतों की बैठक 26 अगस्त को बुलाई थी। बैठक में पंचायतों पर दबाव बनाया गया कि ये ज़मीनें विभिन्न प्रोजेक्टों के पास आती हैं, इसलिए इन्हें खुली बोली के ज़रिए बेचने का प्रस्ताव पारित करें। मगर 17 में से किसी भी सरपंच ने ऐसा फ़ैसला लेने से साफ़ इनकार कर दिया।

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किसानों ने कहा कि अधिकारी उन्हें यह समझाने का यत्न कर रहे हैं कि दैड़ी गांव की 5 एकड़ ज़मीन की नीलामी हाल ही में हुई। यदि यह ज़मीन गमाडा द्वारा अधिगृहीत होती तो कीमत 6 करोड़ रुपये प्रति एकड़ तय होती, लेकिन पंचायत विभाग की नीलामी में यह 20 करोड़ रुपये प्रति एकड़ बिकी। उन्होंने कहा कि वे विभाग की ऐसी चिकनी चुपड़ी बातों में आने वाले नहीं हैं।

किसानों ने चेतावनी दी कि यदि यह ज़मीनें बिक गईं तो भविष्य में ग़रीब परिवारों को प्लॉट, खेल मैदान या कम्युनिटी सेंटर बनाने के लिए गांवों के पास कुछ नहीं बचेगा। उन्होंने कहा कि यह हमारी वंशानुगत धरोहर है और इसे किसी भी कीमत पर इसे लुटने नहीं दिया जाएगा।

प्रगतिशील फ्रंट के चेयरमैन दर्शन सिंह धालीवाल ने सरकार और कॉरपोरेट घरानों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह केवल 17 गांवों की बात नहीं बल्कि पंजाब के 13 हज़ार गांवों पर डाका डालने की साज़िश है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक भ्रष्टाचार और कॉरपोरेट गठजोड़ मिलकर पंजाब को लूट रहे हैं। किसान नेता परमदीप सिंह बैदवान ने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ़ किसानों की नहीं बल्कि 80% भूमिहीन ग्रामीणों की भी है। उन्होंने ऐलान किया कि किसी भी हाल में ज़मीनें बिकने नहीं दी जाएंगी।

अंत में किसान संगठनों ने एक स्वर में कहा कि ये ज़मीनें सरकार की नहीं, गांववासियों की हैं। इसे पीढ़ी-दर-पीढ़ी बचाया जाएगा और लूट की हर कोशिश नाकाम होगी।

पंचायती ज़मीन चहेतों को देने की साजिश : बलबीर सिद्धू

पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता बलबीर सिंह सिद्धू ने पंजाब सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि सरकार मोहाली विधानसभा क्षेत्र के 17 गांवों की पंचायती ज़मीन अपने चहेतों को सौंपने की तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा कि यह गांववासियों के साथ धोखा है और इसके ख़िलाफ़ बड़ा संघर्ष किया जाएगा। सिद्धू ने बताया कि सुखगढ़, सफीपुर, ग्रीन एन्क्लेव, दौन, मानकपुर कल्लर, कंडाला, कंबली, बेहरामपुर, रायपुर कलां, चप्पड़चिड़ी कलां, रुड़का, बड़ी, तंगोरी, रायपुर खुर्द, गिद्दड़पुर, नानूमाजरा और भागोमाजरा की पंचायती ज़मीन को सरकार खुले बोली तंत्र से बेचने की योजना बना रही है। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी नगर परिषद खरड़ के ज़रिए दाऊं गांव की ज़मीन बिल्डर को देने की कोशिश हुई थी। जिला अधिकारियों ने रोक लगाने के आदेश दिए थे, फिर भी नगर परिषद ने प्रस्ताव पारित कर दिया। यह साफ़ दिखाता है कि दबाव और गुमराह कर पंचायतों की ज़मीनें हड़पने का खेल चल रहा है।

शामलात भूमि की नीलामी पर कोई निर्णय नहीं : डीडीपीओ

डीडीपीओ मोहाली, परमबीर कौर ने स्पष्ट किया है कि 17 गांवों की शामलात भूमि की बिक्री के प्रस्ताव के संबंध में छपी खबरें तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग का प्राथमिक उद्देश्य शामलात भूमि को अवैध अतिक्रमणों से बचाना है, विशेष रूप से रियल एस्टेट परियोजनाओं के पास स्थित छोटे भूखंडों और नाममात्र दरों पर पट्टे पर दी गई भूमि को। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट में जिस भूमि का उल्लेख किया जा रहा है, वह गैर-कृषि भूमि के छोटे-छोटे टुकड़े हैं, जो आमतौर पर 500 से 1500 वर्ग गज तक के होते हैं और कॉलोनियों जैसे शहरीकृत या अर्ध-शहरीकृत क्षेत्रों में स्थित हैं। इनमें से कई भूखंड पहले से ही अतिक्रमण की चपेट में हैं या ग्राम पंचायतों को नगण्य किराया आय देते हैं। ऐसे मामलों में, जिला अधिकारियों ने इन भूखंडों की पहचान करने का प्रयास किया है, और अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, नीलामी के माध्यम से उच्च व्यावसायिक मूल्य प्राप्त करने की संभावना तलाशी जा रही है। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया अभी प्रारंभिक चरण में है। उन्होंने आगे बताया कि नीतिगत ढांचे या इन भूखंडों की नीलामी पर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

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