पार्टी की विफलताओं से निगम का भविष्य खतरे में
आम आदमी पार्टी चंडीगढ़ ने दोहराया कि वह शहर की सड़क विकास परियोजनाओं, खासकर वी-3 सड़कों के उन्नयन के पक्ष में है। लेकिन पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी नेतृत्व वाले नगर निगम हाउस पर आरोप लगाया कि उसने 262 किमी वी-3 सड़कों को फंड की कमी का हवाला देकर अवैध व गैर-लोकतांत्रिक तरीके से यूटी प्रशासन की इंजीनियरिंग विभाग को सौंप दिया।
बृहस्पतिवार को सेक्टर-39 स्थित पार्टी कार्यालय में आप चंडीगढ़ के अध्यक्ष विजयपाल सिंह ने कहा कि पार्टी सड़कों के विकास के खिलाफ नहीं है। हम चाहते हैं कि चंडीगढ़ की हर सड़कें वर्ल्ड क्लास हों लेकिन यह प्रस्ताव बिना बहस, बिना समयसीमा और बिना लिखित आश्वासन के पारित किया गया कि परियोजना पूरी होने के बाद सड़कें एमसी को वापस दी जाएंगी। यह लोकतंत्र का दमन है।
आप का आरोप है कि प्रस्ताव को पास कराने के लिए मेयर ने विपक्षी पार्षदों को हटाने के आदेश दिए। मार्शलों को तैनात कर आप और कांग्रेस पार्षदों को जबरन बाहर निकाला गया। इनमें योगेश ढींगरा, दमनप्रीत सिंह, हरदीप सिंह, मनोवर, रामचंद्र यादव, जसविंदर कौर, सुमन, अंजू और प्रेम लता शामिल थे। बाहर निकाले जाने के बाद केवल भाजपा पार्षदों की मौजूदगी में वोटिंग करवाई गई और प्रस्ताव पारित कर दिया गया। विजयपाल ने इसे चंडीगढ़ के लोकतंत्र के लिए काला दिन बताते हुए कहा कि पंजाब नगरपालिका अधिनियम, 1976 (जो चंडीगढ़ में लागू है) की धारा 44 और 45 में इस तरह संपत्ति हस्तांतरण का कोई प्रावधान नहीं है। यहां तक कि यूटी कानून विभाग ने भी इस मामले में स्पष्टता मांगी है। आप ने आरोप लगाया कि भाजपा अपनी विफलताओं को छिपाने और नगर निगम को कमजोर करने के लिए मार्शलों का दुरुपयोग कर रही है।
उन्होंने कहा कि एमसी को मजबूत करने और प्राथमिकताओं को तय करने की बजाय भाजपा जनता को गुमराह कर रही है कि आप विकास विरोधी है। उन्होंने चेताया कि यह प्रस्ताव असंवैधानिक है और इससे अन्य नगर निगम संपत्तियों को भी अवैध रूप से ट्रांसफर करने का रास्ता खुल सकता है। आप ने ऐलान किया कि वह इस निर्णय को हर स्तर पर, यहां तक कि कानूनी फोरम में भी चुनौती देगी।