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चंडीगढ़ में कौशल मंत्रियों की रीजनल कॉन्फ्रेंस -‘कौशल मंथन’ आयोजित

कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को चंडीगढ़ में कौशल मंत्रियों की रीजनल कॉन्फ्रेंस - ‘कौशल मंथन’ का आयोजन किया। प्रधानमंत्री के ‘स्किलिंग, री-स्किलिंग और अप-स्किलिंग’ के मंत्र से प्रेरित इस कॉन्फ्रेंस की अध्यक्षता केंद्रीय कौशल विकास और उद्यमशीलता...
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चंडीगढ़ में बृहस्पतिवार को कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय की ओर से आयोजित कौशल मंत्रियों की रीजनल कॉन्फ्रेंस ‘कौशल मंथन’ के मौके पर केंद्रीय राज्यमंत्री जयंत चौधरी। -हप्र
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कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को चंडीगढ़ में कौशल मंत्रियों की रीजनल कॉन्फ्रेंस - ‘कौशल मंथन’ का आयोजन किया। प्रधानमंत्री के ‘स्किलिंग, री-स्किलिंग और अप-स्किलिंग’ के मंत्र से प्रेरित इस कॉन्फ्रेंस की अध्यक्षता केंद्रीय कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी ने की। इस अवसर पर कौशल मंत्रियों, सांसदों, वरिष्ठ अधिकारियों और नीति निर्माताओं ने उत्तर भारत के विभिन्न हिस्सों से भाग लिया। कॉन्फ्रेंस में बिहार, चंडीगढ़, दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के राज्य/केंद्रशासित प्रदेश सरकारों की भागीदारी रही।

इस कॉन्फ्रेंस के केंद्रीय विचार-विमर्श में हाल ही में स्वीकृत 60,000 करोड़ राष्ट्रीय योजना - आईटीआई उन्नयन और कौशल उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना थी। इस योजना का उद्देश्य हब-एंड-स्पोक मॉडल और अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से 1,000 सरकारी आईटीआई को विश्व-स्तरीय उत्कृष्ट संस्थानों में परिवर्तित करना है। यह परिवर्तन उद्योग-नेतृत्व वाले स्पेशल पर्पज़ व्हीकल्स (एसपीवी) के माध्यम से किया जाएगा।

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इस योजना पर चर्चा के साथ-साथ अन्य प्रमुख पहलों जैसे प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई 4.0), नेशनल अप्रेंटिस प्रमोशन स्कीम (एनएपीएस) और जन शिक्षण संस्थान (जेएसएस) पर भी विमर्श हुआ। प्रतिभागियों ने राज्य-स्तरीय कार्यक्रमों और क्षेत्रीय उद्योग आवश्यकताओं के साथ इन योजनाओं को मजबूती से एकरूप हो जाने की आवश्यकता पर बल दिया। जयन्त चौधरी ने कोऑर्डिनेशन और कन्वर्जेन्स के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत की आकांक्षा ‘विश्व की स्किल कैपिटल’ बनने की है और यह तभी संभव है जब हम असली कन्वर्जेन्स में मिलकर काम करें। प्रत्येक राज्य की अपनी विशिष्टताएं हैं, लेकिन संसाधनों का साझा उपयोग, रणनीतियों का एकीकरण और उद्योग को समान भागीदार के रूप में जोड़कर ही हम आईटीआई को बदल सकते हैं, युवाओं को सशक्त बना सकते हैं और ऐसा ईकोसिस्टम बना सकते हैं जिसमें कौशल से रोजगार, उद्यमशीलता और श्रम का सम्मान सुनिश्चित हो।

कॉन्फ्रेंस में पंजाब के कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा, हरजोत सिंह बैंस, दिल्ली के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा, हिमाचल प्रदेश के मंत्री धर्माणी, हरियाणा के मंत्री गौरव गौतम, कपिल देव अग्रवाल, कृष्ण कुमार बिश्नोई शामिल रहे। कॉन्फ्रेंस में सांसद (राज्यसभा) एवं राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप और खेल, कौशल योजना एवं उद्यमशीलता नीति निर्माण के उपाध्यक्ष विक्रमजीत सिंह साहनी भी उपस्थित रहे।

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