PGI Chandigarh : टेलीमेडिसिन की दो दशक की उपलब्धियों का जश्न, पीजीआई चंडीगढ़ बना डिजिटल हेल्थ संवाद का केंद्र
विवेक शर्मा/ट्रिन्यू
चंडीगढ़, 15 अप्रैल
20 साल पहले जब पीजीआई चंडीगढ़ ने टेलीमेडिसिन विभाग की नींव रखी थी, तब यह एक सपना था- इलाज को दूर-दराज के गांवों तक पहुंचाना, बिना मरीज को अस्पताल लाए। आज वही सपना तकनीक के पंख लगाकर हकीकत बन चुका है। इसी प्रेरक यात्रा का उत्सव मनाते हुए पीजीआईएमईआर के टेलीमेडिसिन विभाग ने मंगलवार को अपना 20वां स्थापना दिवस भव्य रूप से मनाया।
कैरोन प्रशासनिक खंड के बोर्ड रूम में आयोजित इस कार्यक्रम में चिकित्सा जगत की जानी-मानी हस्तियों, डिजिटल हेल्थ एक्सपर्ट्स और वरिष्ठ अधिकारियों ने शिरकत की। कार्यक्रम न केवल बीते वर्षों की उपलब्धियों का लेखा-जोखा था, बल्कि इसमें डिजिटल हेल्थ के आने वाले कल की भी झलक दिखाई दी।
विजन से मिशन तक की यात्रा
कार्यक्रम की शुरुआत प्रो. बिमन साइका ने स्वागत भाषण के साथ की। उन्होंने बताया कि कैसे पीजीआई ने तकनीक को मानव सेवा से जोड़ा और देश में टेलीमेडिसिन की बुनियाद रखी। उन्होंने विभाग की प्रमुख उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं को साझा किया।
अब इलाज सिर्फ अस्पताल तक सीमित नहीं- डॉ. विवेक लाल
पीजीआई के निदेशक डॉ. विवेक लाल ने उद्घाटन भाषण में कहा, "टेलीमेडिसिन अब सिर्फ विकल्प नहीं, जरूरत बन चुकी है। कोविड महामारी ने हमें सिखाया कि मरीजों तक पहुंचने के लिए तकनीक सबसे सशक्त माध्यम है।"
डिजिटल हेल्थ : जेब में डॉक्टर, एक क्लिक पर इलाज
मुख्य अतिथि लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) नरेंद्र कोटवाल ने अपने प्रेरणादायक संबोधन में कहा कि देश में टेलीमेडिसिन अब स्वास्थ्य सेवाओं का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। उन्होंने केंद्र सरकार की विभिन्न डिजिटल ऐप्स की सफलता का उल्लेख करते हुए कहा, "आज तकनीक ने डॉक्टर को आपकी जेब में पहुंचा दिया है।"
ई-संजीवनी : भारत की डिजिटल क्रांति का चेहरा
स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री मधुकर कुमार भगत ने बताया कि ई-संजीवनी न केवल भारत में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी टेलीमेडिसिन की शक्ति का प्रतीक बन चुका है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में टेलीमेडिसिन को लागू करने में डॉक्टरों की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
टेली-ऑप्थल्मोलॉजी में क्रांति लाने वाला अरविंद मॉडल
डॉ. किम आर. (अरविंद आई हॉस्पिटल, मदुरै) ने टेली-आई केयर के क्षेत्र में किए गए अपने कार्यों की प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि कैसे तकनीक के सहारे उन्होंने हजारों ग्रामीण मरीजों की आंखों की रोशनी लौटाई, बिना उन्हें शहर बुलाए। "हमने तकनीक से दूरी नहीं घटाई, रोशनी दी है," उन्होंने कहा।
विशेषज्ञों की चर्चा : डिजिटल स्वास्थ्य के नए रास्ते
डॉ. लिजा दास द्वारा संचालित पैनल चर्चा में पीजीआई के अनुभवी डॉक्टरों ने डिजिटल हेल्थ टूल्स, टेली-फॉलोअप क्लीनिक, टेलीपैथोलॉजी और मरीजों के चयन जैसे अहम पहलुओं पर विचार साझा किए।
टेली-पीआईसीयू : बच्चों की जान बचाने का नया मॉडल
प्रो. जयश्री मुरलीधरन ने सेक्टर-16 अस्पताल के साथ चल रहे टेली-पीआईसीयू प्रोजेक्ट की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हब एंड स्पोक मॉडल से “गोल्डन ऑवर्स” में उपचार शुरू हो पाता है, जिससे बच्चों की जान बचाना आसान होता है।
शब्दों से अधिक, अनुभवों की गूंज
चर्चा के दौरान प्रो. संजय भदादा, प्रो. वनीता जैन, प्रो. उमा नाहर साइका, डॉ. राजा रामचंद्रन और डॉ. संजय सूद ने अपने विभागों में टेलीमेडिसिन के प्रयोग और भविष्य की संभावनाओं को साझा किया।
भविष्य की ओर बढ़ते कदम
कार्यक्रम के अंत में डॉ. अमित अग्रवाल ने सभी अतिथियों, वक्ताओं और प्रतिभागियों का आभार जताते हुए कहा, "यह सिर्फ एक जश्न नहीं, एक नई शुरुआत है- जहां तकनीक और सेवा साथ मिलकर स्वास्थ्य का नया भारत बनाएंगे।"